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अतिरिक्त मुआवजे के विरोध में उच्च न्यायालय जाएंगे
Gurgaon
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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गुड़गांव। आईएमटी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन ने हरियाणा औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम की ओर से भेजे गए नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला लिया है। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि अतिरिक्त मुआवजा का नोटिस गलत है।
आईएमटी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने कहा कि एचएसआईआईडीसी की ओर से उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिसमें उद्यमियों से 3552 रुपये प्रति गज के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजा मांगा गया है। यह अतिरिक्त मुआवजा मांगा जाना पूरी तरह से सही नहीं है। एचएसआईआईडीसी को 55 प्रतिशत एरिया में प्लॉट बेचने थे। इसकी बजाए 60 प्रतिशत एरिया में प्लॉट काटकर बेचे गए। जिससे एचएसआईआईडीसी ने 83 एकड़ अतिरिक्त जमीन में प्लॉट काटकर बेचे। इससे करीब 600 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इसके अलावा एचएसआईआईडीसी ने काफी एरिया का कमर्शियल उपयोग किया है। इससे करीब 600 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अन्य मदों में करीब 200 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा कि उद्यमियों पर महज 400 रुपये प्रति गज का अतिरिक्त मुआवजा बनता है। इसे उद्यमी अदा करने को तैयार हैं। इस मुद्दे को लेकर एचएसआईआईडीसी के एमडी को पत्र लिखा है। इसके अलावा प्रदेश के राज्यपाल को भी पत्र भेजा है। इस मुद्दे को लेकर एक कमेटी बनाई जाए। जो जायज मुआवजे पर सहमति बनाए। उद्यमियों की बात को नहीं माना गया तो वह उच्च न्यायालय का सहारा लेंगे। 19 नवंबर को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश ने बताया कि उद्यमियों की मांग को नहीं माना गया तो हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। इस मौके पर यूनियन के पदाधिकारी अनिल शर्मा, प्र्रवीण शर्मा, जसविंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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आईएमटी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने कहा कि एचएसआईआईडीसी की ओर से उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिसमें उद्यमियों से 3552 रुपये प्रति गज के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजा मांगा गया है। यह अतिरिक्त मुआवजा मांगा जाना पूरी तरह से सही नहीं है। एचएसआईआईडीसी को 55 प्रतिशत एरिया में प्लॉट बेचने थे। इसकी बजाए 60 प्रतिशत एरिया में प्लॉट काटकर बेचे गए। जिससे एचएसआईआईडीसी ने 83 एकड़ अतिरिक्त जमीन में प्लॉट काटकर बेचे। इससे करीब 600 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। इसके अलावा एचएसआईआईडीसी ने काफी एरिया का कमर्शियल उपयोग किया है। इससे करीब 600 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अन्य मदों में करीब 200 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा कि उद्यमियों पर महज 400 रुपये प्रति गज का अतिरिक्त मुआवजा बनता है। इसे उद्यमी अदा करने को तैयार हैं। इस मुद्दे को लेकर एचएसआईआईडीसी के एमडी को पत्र लिखा है। इसके अलावा प्रदेश के राज्यपाल को भी पत्र भेजा है। इस मुद्दे को लेकर एक कमेटी बनाई जाए। जो जायज मुआवजे पर सहमति बनाए। उद्यमियों की बात को नहीं माना गया तो वह उच्च न्यायालय का सहारा लेंगे। 19 नवंबर को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश ने बताया कि उद्यमियों की मांग को नहीं माना गया तो हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। इस मौके पर यूनियन के पदाधिकारी अनिल शर्मा, प्र्रवीण शर्मा, जसविंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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