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50 हजार में खरीदकर 15 लाख में बेचते थे किडनी
पंचकूला/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Mar 2013 01:22 AM IST
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गुड़गांव के चर्चित किडनी कांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को दस में से पांच दोषियों को सजा सुनाई, जबकि पांच को बरी कर दिया।
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किडनी कांड के सरगना डॉक्टर अमित और डॉक्टर उपेंद्र का रैकेट दिल्ली, एनसीआर के साथ विदेशों में भी फैला हुआ था।
जांच में सामने आया था कि डॉक्टर अमित जरूरतमंदों से 50 हजार रुपये में किडनी खरीदकर विदेशियों और अन्य लोगों को 15 से 18 लाख रुपये बेचकर ट्रांसप्लांट करता था। इसके लिए दो टीमें भी काम करती थीं।
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एक टीम जरूरतमंदों को चुनती थी तो दूसरी उन लोगों को जिन्हें किडनी की जरूरत थी। जरूरतमंदों का पहले माइंडवाश किया जाता था। जब वे तैयार होते जाते तो पहले उन्हें गुड़गांव स्थित सेक्टर 23 के मकानों में ठहराया जाता था।
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फिर उनका खून का सैंपल और अन्य जांच की जाती थी। दूसरी टीम किडनी लेने वालों से संपर्क कर उन्हें गुड़गांव स्थित डीएलएफ की एक कोठी में ठहराती थी।
इस खेल में इस बात का ख्याल रखा जाता था कि दोनों टीम के बीच कोई संपर्क न हो पाए। केस के ट्रायल के दौरान कई गवाहों ने बताया कि उन्होंने डा. अमित से 15 से 20 लाख रुपये में किडनी ट्रांसप्लांट करवाई थी।
डॉक्टर अमित और डॉक्टर उपेंद्र किडनी ट्रांसप्लांट का काम करते थे। मनोज लैब टेक्नीशियन है, जबकि मोहम्मद शाहिद और ग्यासुद्दीन दलाल का काम करते थे।
किडनी डोनर से बन गया दलाल
किडनी कांड में आरोपी ग्यासुद्दीन को पहले डॉक्टर अमित की टीम ने शिकार बनाया। उसकी किडनी निकाल ली और उसके एवज में उसे 50 हजार रुपये दिए। ग्यासुद्दीन बहुत ही गरीब घर से था।
इसलिए जब उसे इतनी बड़ी रकम मिली तो वह खुश हो गया। उसने रैकेट को बताया कि वह अपने जैसे कई लोगों को ला सकता है। इस तरह ग्यासुद्दीन डॉ. अमित की टीम में शामिल हो गया और उनके लिए काम करने लगा।
अमित के भाई खिलाफ साबित नहीं हो सके आरोप
किडनी रैकेट में शामिल डॉक्टर अमित के भाई जीवन, डॉक्टर सरज, ड्राइवर जगदीश, नर्स लिंडा व डॉक्टर केके अग्रवाल के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके।
एडवोकेट अभिषेक शर्मा ने बताया कि इन आरोपियों का इस रैकेट से कोई भी लेना-देना नहीं था। उनके खिलाफ सीबीआई कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई। एडवोकेट मनबीर राठी ने बताया कि अदालत ने सराहनीय फैसला दिया है। इस केस में वे लीगल सेल की ओर से एडवोकेट थे।
मनी लांड्रिंग पर भी कसा गया शिकंजा
डॉक्टर अमित और उपेंद्र पर दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (ईडी) के तहत मामला चल रहा है। आरोप है कि डॉक्टर अमित और उपेंद्र ने इस अवैध कारोबार के चलते करीब सौ करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई थी।
जब डॉक्टर अमित को गिरफ्तार किया गया था तो उसके पास से करीब सवा करोड़ रुपये की विदेशी करेंसी मिली थी। फिलहाल ईडी के तहत अभी मामला चल रहा है।
डॉक्टरों को सात साल की सजा
गुड़गांव के चर्चित किडनी कांड के मुख्य आरोपी डॉ. अमित कुमार और डॉ. उपेंद्र को सात-सात साल की कैद और 60-60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दलाल की भूमिका निभाने वाले मोहम्मद शाहिद को साढ़े चार साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
गयासुद्दीन और मनोज के जेल में बिताए गए समय को ही सजा मानने का फैसला अदालत ने सुनाया। दोनों करीब पांच साल से अंबाला जेल में बंद हैं।
बरी होने वालों में डॉ. अमित का भाई जीवन, ड्राइवर जगदीश, डॉ. सरज, नर्स लिंडा और डॉ. केके अग्रवाल शामिल हैं। एक आरोपी यशपाल शर्मा की केस के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
सीबीआई ने कुल 11 आरोपी बनाए थे। 120 लोगों को गवाह बनाया गया था। सजा सुनाने के दौरान सीबीआई के विशेष जज नाजर सिंह ने कहा कि दोषियों ने मेडिकल जैसे पवित्र पेशे को बदनाम किया है।
ट्रायल के दौरान 12 लोगों ने विशेष अदालत में गवाही दी थी कि उनकी किडनी डा. अमित और उनके साथियों ने ही ट्रांसप्लांट की। डॉ. अमित और उसकी टीम गिरफ्तारी से पहले नौ साल तक इस धंधे को अंजाम देती रही।