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चिंता : चार गायों ने तोड़ा दम, 143 बीमार, राहत : वैक्सीन की 64,500 डोज आईं
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फतेहाबाद की गोशाला में गायों की जांच करते पशु चिकित्सक।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। लंपी पॉक्स बचाव को लेकर पशुपालन विभाग को बुधवार को लंपी की 64,500 डोज मिल गई हैं। अभी 21 हजार 500 डोज और आना बाकी हैं। वैक्सीनेशन का कार्य वीरवार से ही आरंभ कर दिया जाएगा। वहीं जिले में बुधवार को लंपी के 143 केस मिले हैं और चार गायों की मौत हुई है।
फतेहाबाद में अहमदाबाद से लंपी से बचाव के लिए वैक्सीन की दूसरी खेप फतेहाबाद पहुंच गई है। फतेहाबाद में 64,500 डोज आई हैं, जिससे टीकाकरण के कार्य को तेजी मिलेगी। पशुपालन विभाग फतेहाबाद, रतिया व टोहाना तीना उपमंडलों में बराबर डोज भेजेगा और गोवंश को यह डोज लगाई जाएगी। वीरवार से वैक्सीनेशन का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए पशुपालन विभाग की टीमें भी गठित की गई हैं। पशुपालन विभाग का टारगेट पहले चरण में केवल सीमा क्षेत्र की ओर था, अब पूरे जिले में गायों को वैक्सीन लगाई जाएगी। ज्ञात रहे कि इससे पहले प्रथम चरण में 22 हजार 200 गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
संक्रमित गायों को नहीं लगेगी डोज
पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी पॉक्स से संक्रमित गायों व संक्रमण में ठीक हो चुकी गायों को यह डोज नहीं लगाई जाएगी। विभाग के अनुसार, इलाज के दौरान उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले ही बढ़ जाती है, ऐसे में संक्रमण से ठीक हुई गायों को डोज लगाने की आवश्यकता नहीं।
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जिले में 687 गायों का चल रहा उपचार
फतेहाबाद में बुधवार को लंपी पॉक्स से चार गायों की मौत हो गई। इनमें एक गाय भूना, एक मेहूंवाला, एक मानावाली व एक टोहाना की शामिल हैं। जिले में लंपी पॉक्स से अब तक 54 गायों की जान जा चुकी है। वहीं लंपी पॉक्स के 143 नए मामले सामने आए हैं। जिससे जिले में लंपी संक्रमण के केसों की संख्या बढ़कर 1867 हो गई है। राहत की बात यह है कि 1180 गाय इस संक्रमण से ठीक भी हो गई हैं। वहीं 687 गायों का उपचार चल रहा है।
ये हैं इस बीमारी के लक्षण
1. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाता है।
ये हैं बीमारी के फैलाव के कारण
1. मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है।
2. संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
ये पशुओं को इस बीमारी से बचाव के तरीके
1. पशुओं के बाड़े को सूखा व साफ सुथरा रखें, नियमित रूप से मक्सी व मच्छर रोधी दवाओं का प्रयोग करें
2. बीमार पशु के घावों की नियमित रूप से लाल दवाई व फिटकरी से सफाई करें।
3. बीमार पशु के दूध का सेवन केवल उबाल कर ही करें।
4. बीमार पशु के संपर्क में आने पर अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोयें।
5. संक्रमण को रोकने के लिए पशुओं का आवागमन बंद करें जैसे जोहड़, हौदी, मेलों आदि में न लेकर जाएं।
6. मृत पशु को खुले में न फेंके बल्कि आठ से 10 फीट गहरे गड्ढे में दबाएं।
7. बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
8. पशु में लंपी स्किन बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीकी पशु अस्पताल में लेकर जाए और उसका उपचार करवाएं।
इस प्रकार करें पशुओं का प्राथमिक उपचार
-पशुपालन विभाग के अनुसार यदि किसी पशु में लंपी पॉक्स बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो पशुपालक पशु को नीम के पतों से उबाले हुए गुनगुने पानी में थोड़ी से लाल दवाई डालकर उसको नहलाएं, जिससे पशु को आराम मिलेगा।
-इसी प्रकार घाव वाली जगह पर डिटोल या फिनाइल लगाएं, ताकि जख्म और ज्यादा ना फैले।
-पशु चिकित्सकों के अनुसार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पशु को उचित दवा/टॉनिक दें। इसमें लीवर टॉनिक भी दिया जा सकता है।
-बीमार पशु का निकटवर्ती पशु अस्पताल में जाकर प्राथमिक उपचार जरूर करवाएं।
-विभाग के अनुसार यदि किसी के पास अधिक संख्या में पशु है और उनमें से एक या दो पशु लंपी स्किन बीमारी से ग्रस्त है, तो बीमार पशु का दूध सबसे आखिर में निकालें।
-विभाग के अनुसार लंपी स्किन बीमारी इतनी जानलेवा नहीं है, इसकी मृत्यु दर महज एक प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में एहतियात बरतकर पशुओं को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
कोट
फतेहाबाद में लंपी पॉक्स से बचाव के लिए वैक्सीन की दूसरी खेप पशुपालन विभाग के पास पहुंच गई है। यह खेप अहमदाबाद से आई है। इस बार विभाग को 64,500 वैक्सीन मिली हैं और 21,500 वैक्सीन अभी आनी बाकी हैं। जिला में एक लाख आठ हजार गायों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें पहले चरण में 22 हजार 200 गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
डॉ. सुखविंद्र गिल, निदेशक पशु पालन विभाग, फतेहाबाद
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फतेहाबाद में अहमदाबाद से लंपी से बचाव के लिए वैक्सीन की दूसरी खेप फतेहाबाद पहुंच गई है। फतेहाबाद में 64,500 डोज आई हैं, जिससे टीकाकरण के कार्य को तेजी मिलेगी। पशुपालन विभाग फतेहाबाद, रतिया व टोहाना तीना उपमंडलों में बराबर डोज भेजेगा और गोवंश को यह डोज लगाई जाएगी। वीरवार से वैक्सीनेशन का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए पशुपालन विभाग की टीमें भी गठित की गई हैं। पशुपालन विभाग का टारगेट पहले चरण में केवल सीमा क्षेत्र की ओर था, अब पूरे जिले में गायों को वैक्सीन लगाई जाएगी। ज्ञात रहे कि इससे पहले प्रथम चरण में 22 हजार 200 गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
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संक्रमित गायों को नहीं लगेगी डोज
पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी पॉक्स से संक्रमित गायों व संक्रमण में ठीक हो चुकी गायों को यह डोज नहीं लगाई जाएगी। विभाग के अनुसार, इलाज के दौरान उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले ही बढ़ जाती है, ऐसे में संक्रमण से ठीक हुई गायों को डोज लगाने की आवश्यकता नहीं।
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जिले में 687 गायों का चल रहा उपचार
फतेहाबाद में बुधवार को लंपी पॉक्स से चार गायों की मौत हो गई। इनमें एक गाय भूना, एक मेहूंवाला, एक मानावाली व एक टोहाना की शामिल हैं। जिले में लंपी पॉक्स से अब तक 54 गायों की जान जा चुकी है। वहीं लंपी पॉक्स के 143 नए मामले सामने आए हैं। जिससे जिले में लंपी संक्रमण के केसों की संख्या बढ़कर 1867 हो गई है। राहत की बात यह है कि 1180 गाय इस संक्रमण से ठीक भी हो गई हैं। वहीं 687 गायों का उपचार चल रहा है।
ये हैं इस बीमारी के लक्षण
1. इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाता है।
ये हैं बीमारी के फैलाव के कारण
1. मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है।
2. संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
ये पशुओं को इस बीमारी से बचाव के तरीके
1. पशुओं के बाड़े को सूखा व साफ सुथरा रखें, नियमित रूप से मक्सी व मच्छर रोधी दवाओं का प्रयोग करें
2. बीमार पशु के घावों की नियमित रूप से लाल दवाई व फिटकरी से सफाई करें।
3. बीमार पशु के दूध का सेवन केवल उबाल कर ही करें।
4. बीमार पशु के संपर्क में आने पर अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोयें।
5. संक्रमण को रोकने के लिए पशुओं का आवागमन बंद करें जैसे जोहड़, हौदी, मेलों आदि में न लेकर जाएं।
6. मृत पशु को खुले में न फेंके बल्कि आठ से 10 फीट गहरे गड्ढे में दबाएं।
7. बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
8. पशु में लंपी स्किन बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीकी पशु अस्पताल में लेकर जाए और उसका उपचार करवाएं।
इस प्रकार करें पशुओं का प्राथमिक उपचार
-पशुपालन विभाग के अनुसार यदि किसी पशु में लंपी पॉक्स बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो पशुपालक पशु को नीम के पतों से उबाले हुए गुनगुने पानी में थोड़ी से लाल दवाई डालकर उसको नहलाएं, जिससे पशु को आराम मिलेगा।
-इसी प्रकार घाव वाली जगह पर डिटोल या फिनाइल लगाएं, ताकि जख्म और ज्यादा ना फैले।
-पशु चिकित्सकों के अनुसार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पशु को उचित दवा/टॉनिक दें। इसमें लीवर टॉनिक भी दिया जा सकता है।
-बीमार पशु का निकटवर्ती पशु अस्पताल में जाकर प्राथमिक उपचार जरूर करवाएं।
-विभाग के अनुसार यदि किसी के पास अधिक संख्या में पशु है और उनमें से एक या दो पशु लंपी स्किन बीमारी से ग्रस्त है, तो बीमार पशु का दूध सबसे आखिर में निकालें।
-विभाग के अनुसार लंपी स्किन बीमारी इतनी जानलेवा नहीं है, इसकी मृत्यु दर महज एक प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में एहतियात बरतकर पशुओं को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
कोट
फतेहाबाद में लंपी पॉक्स से बचाव के लिए वैक्सीन की दूसरी खेप पशुपालन विभाग के पास पहुंच गई है। यह खेप अहमदाबाद से आई है। इस बार विभाग को 64,500 वैक्सीन मिली हैं और 21,500 वैक्सीन अभी आनी बाकी हैं। जिला में एक लाख आठ हजार गायों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें पहले चरण में 22 हजार 200 गायों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
डॉ. सुखविंद्र गिल, निदेशक पशु पालन विभाग, फतेहाबाद