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रोडवेज का एक ही मंत्र, जहां सवारियां, वहीं बसें
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फतेहाबाद। कोरोना काल के बाद बिगड़ी परिवहन व्यवस्था अभी तक सुधर नहीं सकी है। खासकर, ग्रामीण रूटों के यात्री 21 महीनों से पहले जैसी सुविधा पाने का इंतजार कर रहे हैं। अब तो हालात ऐसे हैं कि शाम 5 बजे के बाद सिर्फ नेशनल हाईवे पर बसे शहरों या गांवों के लिए ही बसें मिल पाती हैं। अधिकांश ग्रामीण रूटों की आखिरी बसें 5 बजे तक ही जा रही हैं। इसके बाद घरों को जाने वाले नागरिक निजी वाहनों के सहारे ही रहते हैं।
गौरतलब है कि 22 मार्च 2020 को देश में पहली बार लॉकडाऊन लगाया गया था। उस समय बंद हुई परिवहन व्यवस्था दोबारा शुरू तो हुई, लेकिन सुविधा पहले जैसी नहीं रही। कोरोना काल के बाद रोडवेज प्रशासन ने जहां सवारियां, वहीं बसें भेजने का एक ही मंत्र अपना लिया है। पहले रोडवेज में यह व्यवस्था थी कि जिन रूटों पर प्राइवेट बसें नहीं जाती हैं, उन सभी रूटों के गांवों में रोडवेज प्रशासन अपनी बसें भेजता था। मगर अब जहां सवारियां ज्यादा है, सिर्फ उन्हीं रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
20 रूट किए कम, 25 से ज्यादा रूटों पर घटे चक्कर
रोडवेज प्रशासन द्वारा इसी साल दोबारा लगाए गए लॉकडाउन के बाद से 20 रूट कम कर दिए गए हैं। इन रूटों पर पहले रोजाना तीन से चार चक्कर रोडवेज बसें लगाती थी। इसके अलावा 25 से ज्यादा रूट ऐसे हैं, जहां पहले चार समय बसें लग रही थी, लेकिन अब एक या दो फेरे ही रोडवेज बसें लगा रही है। यही कारण है कि बसों पर लटक कर भी सवारियां जाती हैं। खासकर, विद्यार्थियों को तो खिड़कियों पर लटक कर या फिर छत पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती है।
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इन गांवों में कम हो गए चक्कर
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार भूथन, हसंगा, दादुपुर, गोरखपुर, कुम्हारिया, भिरडाना, बीघड़, जांडवाला गांवों के ऐसे प्रमुख रूट हैं, जहां बसों के फेरों में कटौती की गई है। पहले इन गांवों में तीन से चार चक्कर रोडवेज बसें लगाती थी। मगर अब यह एक या दो चक्कर ही लगाए जा रहे हैं।
20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेला रोडवेज ने
कोरोना काल के बाद से रोडवेज विभाग ने करोड़ों रुपये का नुकसान झेला है। अधिकारियों के मुताबिक फतेहाबाद जिले में रोडवेज बसों से हर रोज 10 लाख रुपये तक की आमदनी होती है। ऐसे में साल 2020 व इस साल में लॉकडाउन के कारण फतेहाबाद डिपो को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
जिले में ऑन रूट रोडवेज बसें : 144
जिले में कुल चालक : 330
जिले में कुल परिचालक : 190
कोट
अब दो टाइम कर दिए गए बंद
हमारे गांव में पहले तीन से चार टाइम रोडवेज बसों के चक्कर लगते थे। मगर अब दो टाइम बंद कर दिए गए हैं। इस कारण समस्या आ रही है।
सुंदर सिंह, निवासी, गांव भूथन
पहली वाली सुविधा अब नहीं रही
पहली बार लॉकडाउन लगने के बाद से ही परिवहन व्यवस्था बिगड़ी हुई है। जो सुविधा पहले रोडवेज प्रशासन दे रहा था, वह अब नहीं मिल रही है।
विजय कुमार, निवासी, गांव भिरडाना
कोट
जिले में परिवहन व्यवस्था सुधारने में लगातार लगे हुए हैं। जिन रूटों पर ज्यादा जरूरत हैं, वहां बसों का परिचालन करवाया जा रहा है। कुछ परिचालकों की कमी होने से दिक्कत आ गई है।
आरएस पूनिया, महाप्रबंधक, फतेहाबाद डिपो
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गौरतलब है कि 22 मार्च 2020 को देश में पहली बार लॉकडाऊन लगाया गया था। उस समय बंद हुई परिवहन व्यवस्था दोबारा शुरू तो हुई, लेकिन सुविधा पहले जैसी नहीं रही। कोरोना काल के बाद रोडवेज प्रशासन ने जहां सवारियां, वहीं बसें भेजने का एक ही मंत्र अपना लिया है। पहले रोडवेज में यह व्यवस्था थी कि जिन रूटों पर प्राइवेट बसें नहीं जाती हैं, उन सभी रूटों के गांवों में रोडवेज प्रशासन अपनी बसें भेजता था। मगर अब जहां सवारियां ज्यादा है, सिर्फ उन्हीं रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
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20 रूट किए कम, 25 से ज्यादा रूटों पर घटे चक्कर
रोडवेज प्रशासन द्वारा इसी साल दोबारा लगाए गए लॉकडाउन के बाद से 20 रूट कम कर दिए गए हैं। इन रूटों पर पहले रोजाना तीन से चार चक्कर रोडवेज बसें लगाती थी। इसके अलावा 25 से ज्यादा रूट ऐसे हैं, जहां पहले चार समय बसें लग रही थी, लेकिन अब एक या दो फेरे ही रोडवेज बसें लगा रही है। यही कारण है कि बसों पर लटक कर भी सवारियां जाती हैं। खासकर, विद्यार्थियों को तो खिड़कियों पर लटक कर या फिर छत पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती है।
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इन गांवों में कम हो गए चक्कर
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार भूथन, हसंगा, दादुपुर, गोरखपुर, कुम्हारिया, भिरडाना, बीघड़, जांडवाला गांवों के ऐसे प्रमुख रूट हैं, जहां बसों के फेरों में कटौती की गई है। पहले इन गांवों में तीन से चार चक्कर रोडवेज बसें लगाती थी। मगर अब यह एक या दो चक्कर ही लगाए जा रहे हैं।
20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेला रोडवेज ने
कोरोना काल के बाद से रोडवेज विभाग ने करोड़ों रुपये का नुकसान झेला है। अधिकारियों के मुताबिक फतेहाबाद जिले में रोडवेज बसों से हर रोज 10 लाख रुपये तक की आमदनी होती है। ऐसे में साल 2020 व इस साल में लॉकडाउन के कारण फतेहाबाद डिपो को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
जिले में ऑन रूट रोडवेज बसें : 144
जिले में कुल चालक : 330
जिले में कुल परिचालक : 190
कोट
अब दो टाइम कर दिए गए बंद
हमारे गांव में पहले तीन से चार टाइम रोडवेज बसों के चक्कर लगते थे। मगर अब दो टाइम बंद कर दिए गए हैं। इस कारण समस्या आ रही है।
सुंदर सिंह, निवासी, गांव भूथन
पहली वाली सुविधा अब नहीं रही
पहली बार लॉकडाउन लगने के बाद से ही परिवहन व्यवस्था बिगड़ी हुई है। जो सुविधा पहले रोडवेज प्रशासन दे रहा था, वह अब नहीं मिल रही है।
विजय कुमार, निवासी, गांव भिरडाना
कोट
जिले में परिवहन व्यवस्था सुधारने में लगातार लगे हुए हैं। जिन रूटों पर ज्यादा जरूरत हैं, वहां बसों का परिचालन करवाया जा रहा है। कुछ परिचालकों की कमी होने से दिक्कत आ गई है।
आरएस पूनिया, महाप्रबंधक, फतेहाबाद डिपो