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प्रशासनिक लापरवाही के चलते बढ़े शहर में लावारिस पशु, व्यापक स्तर पर नियमित रूप से चले अभियान

Mon, 05 Oct 2020 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2020 11:24 PM IST
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the number of unclaimed animals is negligibly
शहर में लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर अब लोग और शहर की समाजसेवी संस्थाएं मुखर होने लगी हैं। शहर की समाजसेवी संस्थाएं अब इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और नगर परिषद प्रशासन पर दबाव बनाने के मूड में नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब कागजों में जिला आवारा पशु मुक्त है तो धरातल पर इतनी बदहाल स्थिति क्यों है। समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी इस बात पर एकमत हैं कि शहर में आवारा पशुओं के एकाएक बढ़ने का कारण प्रशासनिक तौर पर लापरवाही है। इसके लिए व्यापक स्तर पर और नियमित रूप से अभियान चलाए जाने की जरूरत है।
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‘आवारा पशु पहले जीटी रोड व पुराने मोहल्लों की समस्या हुआ करते थे, लेकिन अब ये समस्या शहर के प्रत्येक बाजार तक फैल गई है। आए दिन दिन ढलते ही आवारा सांड हंस मार्केट और फव्वारा चौक के पास पसर जाते हैं और आते-जाते लोगों के लिए खतरे का सबब बनते हैं।। प्रशासन को इस दिशा में लगातार अभियान चलाने की जरूरत है।’
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दलीप सचदेवा, हंस मार्केट एसोसिएशन फतेहाबाद ।
‘आवारा पशुओं के कारण पिछले कुछ दिनों में हादसों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। सड़क पर दो पहिया वाहन छोड़िये, चार पहिया वाहन लेकर जाने में भी डर लगता है कि कहीं अंधेरे में कोई काला सांड़ सामने नहीं आ जाए। अंधेरा होने के चलते ये आवारा पशु सड़कों पर दिखते ही नहीं। एकदम से आगे आने पर वाहन चालक का संतुलन बिगड़ जाता है और वो दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है।’
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-विनय शर्मा एडवोकेट, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन फतेहाबाद ।
‘लावारिस पशुओं की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है लेकिन फिलहाल अभी तक इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये बहुत गंभीर मामला है क्योंकि ये सीधा लोगों की जान से जुड़ा हुआ मसला है। आवारा पशुओं को पकड़ने और बाद में उन्हें संभालने का कोई ठोस ब्लू प्रिंट तैयार किया जाना चाहिए।’

-डॉ. रणजीत ओड, प्रदेशाध्यक्ष, ओड सभा।
‘लावारिस सांड़ या किसी अन्य पशु के टक्कर मारने के केस पिछले एक माह में तकरीबन 7-8 आ चुके हैं। ज्यादातर मामलों में लावारिस पशुओं की मार से मरीजों की हड्डी या तो टूट गई है या फ्रैक्चर हुई है। इसका सीधा सा मतलब है कि कम से कम 15 दिन से 20 दिन तक वो मरीज कोई और काम नहीं कर सकेगा और लगभग उसे बिस्तर पर ही रहना होगा।’
-डॉ. पंकुश अरोड़ा, प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं संचालक लाइफ केयर अस्पताल।
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