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Fatehabad News: सुनीता ने बंजर भूमि पर ड्रैगन फ्रूट उगाकर कायम की मिसाल

Wed, 30 Sep 2026 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Wed, 30 Sep 2026 11:49 PM IST
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Sunita set an example by growing dragon fruit on barren land.
गांव दैयड़ में ड्रैगन फ्रूट को दिखातीं सुनीता।
फतेहाबाद। गांव दैयड़ निवासी प्रगतिशील किसान सुनीता पत्नी सुनील बरड़वाल ने कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। उन्होंने दो एकड़ रेतीली और बंजर भूमि पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की है। पारंपरिक फसलों के बजाय आधुनिक बागवानी को अपनाकर उन्होंने बंजर जमीन को फलदार बाग में बदल दिया। एक अक्तूबर को हिसार में आयोजित होने वाले प्रगतिशील किसान मेले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सुनीता को सम्मानित किया जाएगा।
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उनका फार्म हिसार, सिरसा और फतेहाबाद सहित आसपास के किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी काम कर रहा है। सुनीता के पति सुनील बरड़वाल को कोरोना काल के दौरान ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार आया था। उन्होंने ऑनलाइन सेमिनार के माध्यम से इसकी जानकारी हासिल की। खेती की तकनीक सीखने के लिए उन्होंने केरल जाकर विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लिया। इसमें सिंचाई और रखरखाव की विधियां शामिल थीं।
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खेती की शुरुआत और उत्पादन
सुनीता ने वर्ष 2023 में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। पहले वर्ष में करीब 30 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। अगले वर्ष यह उत्पादन बढ़कर करीब 50 क्विंटल तक पहुंच गया। बरड़वाल ड्रैगन फ्रूट फार्म पर कई किस्मों की खेती की जा रही है। इनमें अमेरिकन ब्यूटी, वियतनाम व्हाइट, वियतनाम रेड, एस-8 रेड और स्याम सी रेड जैसी किस्में शामिल हैं।
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प्रति एकड़ करीब तीन से चार लाख रुपये का निवेश
ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत में प्रति एकड़ करीब तीन से चार लाख रुपये का निवेश होता है। इस निवेश में सीमेंट पोल, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और पौधों की लागत शामिल है। एक बार पौधे लगाने के बाद उनसे करीब 15 से 20 वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है। फार्म पर जुलाई से नवंबर तक फल उपलब्ध रहते हैं।

विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिल चुका
सुनीता के इस नवाचार को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिल चुका है। उनकी यह पहल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। बंजर भूमि का उपयोग कर उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र में आधुनिक कृषि का एक सफल उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उनका फार्म अब नए किसानों को प्रशिक्षित करने में भी सहायक है।
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