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Fatehabad News: दवा के लिए मरीजों में धक्का-मुक्की पर्ची गुम हुई तो किसी को आधी मिली
Mon, 19 Jan 2026 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 19 Jan 2026 11:55 PM IST
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में दवाई के लिए हो रही धक्का-मुक्की संवाद
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में एक दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को ओपीडी खुलते ही मरीजों की भीड़ बढ़ गई। इससे दवा वितरण में गंभीर समस्याएं सामने आईं। डिस्पेंसरी पर दवा लेने के लिए मरीजों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई मरीज डेढ़ से दो घंटे तक दवा के लिए लाइन में खड़े रहे। कुछ मरीजों की पर्चियां गुम हो गईं, जबकि कई को आधी-अधूरी दवा मिली।
अस्पताल में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक अफरातफरी का माहौल रहा। डिस्पेंसरी में केवल एक फार्मेसी ऑफिसर तैनात था, जबकि दो प्रशिक्षु उसकी मदद कर रहे थे। मरीजों ने आरोप लगाया कि दवा देने में अत्यधिक समय लिया गया और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि कौन सी दवा दी गई और कौन सी बाकी रही। इसके अलावा दवा लेने के सही तरीके के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई।
रतिया से आई महिला मरीज ने कहा कि उसकी पर्ची गुम हो गई और डेढ़ घंटे लाइन में खड़े रहने के बावजूद दवा नहीं मिली। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की कि दवा वितरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि भीड़ और अफरातफरी से बचा जा सके।
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प्रशिक्षुओं के सहारे व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में रोजाना एक हजार से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। लेकिन सोमवार को एक ही फार्मेसी ऑफिसर की ड्यूटी रही। ऐसे में मरीजों का डाटा कंप्यूटर में दर्ज करने में अव्यवस्था बिगड़ गई। जानकारी के अभाव में प्रशिुक्ष डिस्पेंसरी में दवा ढूंढते रह गए।
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जिले में फार्मेसी ऑफिसर के 65 फीसदी पद खाली
जिले में फार्मेसी ऑफिसर के 60 पद स्वीकृत है। लेकिन जिले के अस्पतालों में 21 ही नियुक्त है। जिला नागरिक अस्पताल में 10 पद स्वीक़त है और इसमें चार ही नियुक्त है। इसमें एक की डयूटी स्टोर, एक की मेडिकल क्लेम बिल, एक को नागरिक अस्पताल की डिस्पेंसरी और एक की कोर्ट की डिस्पेंसरी में नियुक्ति की गई है। हालात ये है कि जिले में 65 फीसदी पद खाली पड़े है।
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नागरिक अस्पताल में दवाई लेने के लिए रतिया से आई थी, डेढ़ घंटे तक लाइन में खड़ी रही लेकिन नहीं मिली है। इस दौरान काफी धक्का-मुक्की रही। बहुत परेशान होना पड़ा।
-शशिबाला, मरीज
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दवा लेने के लिए अस्पताल में आई थी लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं है। महिलाओं के लिए अलग से लाइन भी नहीं है। दवा तो मिली लेकिन ये नहीं बताया गया कि कैसे लेनी है।
-मनजीत, मरीज
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बच्चे की दवाई लेने के लिए आए थे, पहले डॉक्टर के पास डेढ़ घंटा इंतजार किया फिर यहां पर खड़े हुए तो धक्का-मुक्की होती रही। कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है।
- अनीता, तीमारदार
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स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसी ऑफिसर का सबसे अहम पद है लेकिन जिले में 65 फीसदी पद खाली है। कई बार एसोसिएशन की तरफ से मांग भी की जा चुकी है। दवा वितरण के दौरान मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
-कृष्ण कुमार, जिला प्रधान, फार्मेसी ऑफिसर एसोसिएशन
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अस्पताल में फार्मेसी ऑफिसर के पद खाली हैं। हर माह मुख्यालय को डिमांड भी भेजी जा रही है। अगर नागरिक अस्पताल में कोई समस्या आ रही है तो उसका समाधान करवाया जाएगा।
- डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन
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अस्पताल में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक अफरातफरी का माहौल रहा। डिस्पेंसरी में केवल एक फार्मेसी ऑफिसर तैनात था, जबकि दो प्रशिक्षु उसकी मदद कर रहे थे। मरीजों ने आरोप लगाया कि दवा देने में अत्यधिक समय लिया गया और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि कौन सी दवा दी गई और कौन सी बाकी रही। इसके अलावा दवा लेने के सही तरीके के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई।
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रतिया से आई महिला मरीज ने कहा कि उसकी पर्ची गुम हो गई और डेढ़ घंटे लाइन में खड़े रहने के बावजूद दवा नहीं मिली। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की कि दवा वितरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि भीड़ और अफरातफरी से बचा जा सके।
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प्रशिक्षुओं के सहारे व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में रोजाना एक हजार से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। लेकिन सोमवार को एक ही फार्मेसी ऑफिसर की ड्यूटी रही। ऐसे में मरीजों का डाटा कंप्यूटर में दर्ज करने में अव्यवस्था बिगड़ गई। जानकारी के अभाव में प्रशिुक्ष डिस्पेंसरी में दवा ढूंढते रह गए।
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जिले में फार्मेसी ऑफिसर के 65 फीसदी पद खाली
जिले में फार्मेसी ऑफिसर के 60 पद स्वीकृत है। लेकिन जिले के अस्पतालों में 21 ही नियुक्त है। जिला नागरिक अस्पताल में 10 पद स्वीक़त है और इसमें चार ही नियुक्त है। इसमें एक की डयूटी स्टोर, एक की मेडिकल क्लेम बिल, एक को नागरिक अस्पताल की डिस्पेंसरी और एक की कोर्ट की डिस्पेंसरी में नियुक्ति की गई है। हालात ये है कि जिले में 65 फीसदी पद खाली पड़े है।
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नागरिक अस्पताल में दवाई लेने के लिए रतिया से आई थी, डेढ़ घंटे तक लाइन में खड़ी रही लेकिन नहीं मिली है। इस दौरान काफी धक्का-मुक्की रही। बहुत परेशान होना पड़ा।
-शशिबाला, मरीज
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दवा लेने के लिए अस्पताल में आई थी लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं है। महिलाओं के लिए अलग से लाइन भी नहीं है। दवा तो मिली लेकिन ये नहीं बताया गया कि कैसे लेनी है।
-मनजीत, मरीज
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बच्चे की दवाई लेने के लिए आए थे, पहले डॉक्टर के पास डेढ़ घंटा इंतजार किया फिर यहां पर खड़े हुए तो धक्का-मुक्की होती रही। कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है।
- अनीता, तीमारदार
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स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसी ऑफिसर का सबसे अहम पद है लेकिन जिले में 65 फीसदी पद खाली है। कई बार एसोसिएशन की तरफ से मांग भी की जा चुकी है। दवा वितरण के दौरान मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
-कृष्ण कुमार, जिला प्रधान, फार्मेसी ऑफिसर एसोसिएशन
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अस्पताल में फार्मेसी ऑफिसर के पद खाली हैं। हर माह मुख्यालय को डिमांड भी भेजी जा रही है। अगर नागरिक अस्पताल में कोई समस्या आ रही है तो उसका समाधान करवाया जाएगा।
- डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन