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Haryana: दस साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी, कहासुनी में गलत फहमी हुई, जज के प्रयास से हुए एक
Sun, 15 Sep 2024 07:27 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 15 Sep 2024 07:27 PM IST
सार
कहासुनी व गलत फहमी की वजह से 10 साल से अलग रह रहे बैंक मैनेजर पति-पत्नी फिर से एक हो गए हैं। दोनों के बीच तलाक का केस चल रहा था। इस मौके पर कोर्ट में ही उनके बेटे का जन्मदिन मनाया गया।
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बच्चे का जन्मदिन मनाते हुए।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हारियाणा के फतेहाबाद में न्यायिक परिसर में हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिखा, पारिवारिक न्यायालय प्रधान न्यायाधीश नताशा शर्मा, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजीव व न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी जोगेंद्र जांगड़ा की कोर्ट में लोक अदालतें आयोजित हुई। राष्ट्रीय लोक अदालत में 22797 मामलों का निपटारा किया।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गायत्री ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय में एक विशेष मामला सन्नी राजपाल बनाम दीप्ति राजपाल का रहा जिसमें तलाक, खर्च व बच्चे की कस्टडी लेने बारे तीन मामले न्यायालय में विचाराधीन थे। सन्नी राजपाल व दीप्ति राजपाल दोनों बैंक में मैनेजर कार्यरत हैं।
दोनों पति-पत्नी की आपस में मामूली कहासुनी व गलत फहमी की वजह से 10 साल से अलग-अलग रह रहे थे। प्रधान न्यायाधीश नताशा शर्मा के अथक प्रयास से राष्ट्रीय लोक अदालत में इस मामले में दोनों पति-पत्नी साथ रहने पर सहमत हुए व न्यायालय में ही लड़के के जन्मदिन की खुशी में केक काटकर दोहरी खुशी मनाई गई।
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इन मामलेां का हुआ निपटारा
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक जटिल मामलों, एनआईएक्ट 138, एमएसीटी जिसमें एआईआर तथा ट्रांसपोर्ट केस, वैवाहिक, श्रम, भूमि अधिग्रहण, किराया, बैंक रिकवरी, राजस्व, मनरेगा, बिजली व पानी बिल, वन अधिनियम, आपदा मुआवजा आदि अन्य मामलों का निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 29113 मामलों में से 22797 मामलों का निपटारा किया गया और 2 करोड़ 45 लाख 7467 रुपये की राशि का जुर्माना अवॉर्ड के रूप में पास की गई।
जिसमें प्री लिटिगेशन के 20216 में से 17142 मामलों का निपटान करते हुए 43 लाख 74 हजार 635 रुपये की राशि का अवॉर्ड पास किया गया तथा कोर्ट में लंबित 8897 मामलों में से 5655 मामलों का निपटारा करते हुए 2 करोड़ 1 लाख 32 हजार 832 रुपये की राशि अवॉर्ड व जुर्माना के रूप में पास की गई। प्रीलिफिकेशन के 20216 मामलों में से 670 मामलों में बैंक रिकवरी संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए 670 में से 12 मामलों का निपटान व 27 लाख 87 हजार 500 रुपये का जुर्माना अवॉर्ड पास किया गया।
इसी प्रकार राजस्व सहित अन्य मामलों जिसमें वैवाहिक के 11 हजार 956 मामलों में से 10 हजार 40 मामले सहित श्रम, बिजली संबंधी मामलों की सुनवाई की गई। कोर्ट में लंबित 8897 मामलों में से 5655 मामलों में आपराधिक के 373 में से 148 व 2 लाख 41 हजार 678 रुपये का जुर्माना हुआ है। एनआई एक्ट के 1294 मामलों में से 148 तथा 6 लाख 46 हजार रुपये का अवार्ड, एमएसीटी के 306 मामलों में से 30 व एक करोड़ 26 लाख 5 हजार रुपये का अवार्ड व बैंक रिकवरी के 142 में से 17, वैवाहिक मामलों के 299 में से 111 व समरी चालान के 591 में से 320 और 58 हजार 100 रुपये का जुर्माना व अवॉर्ड पास किया।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गायत्री ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय में एक विशेष मामला सन्नी राजपाल बनाम दीप्ति राजपाल का रहा जिसमें तलाक, खर्च व बच्चे की कस्टडी लेने बारे तीन मामले न्यायालय में विचाराधीन थे। सन्नी राजपाल व दीप्ति राजपाल दोनों बैंक में मैनेजर कार्यरत हैं।
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दोनों पति-पत्नी की आपस में मामूली कहासुनी व गलत फहमी की वजह से 10 साल से अलग-अलग रह रहे थे। प्रधान न्यायाधीश नताशा शर्मा के अथक प्रयास से राष्ट्रीय लोक अदालत में इस मामले में दोनों पति-पत्नी साथ रहने पर सहमत हुए व न्यायालय में ही लड़के के जन्मदिन की खुशी में केक काटकर दोहरी खुशी मनाई गई।
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इन मामलेां का हुआ निपटारा
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक जटिल मामलों, एनआईएक्ट 138, एमएसीटी जिसमें एआईआर तथा ट्रांसपोर्ट केस, वैवाहिक, श्रम, भूमि अधिग्रहण, किराया, बैंक रिकवरी, राजस्व, मनरेगा, बिजली व पानी बिल, वन अधिनियम, आपदा मुआवजा आदि अन्य मामलों का निपटारा आपसी सहमति के आधार पर किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 29113 मामलों में से 22797 मामलों का निपटारा किया गया और 2 करोड़ 45 लाख 7467 रुपये की राशि का जुर्माना अवॉर्ड के रूप में पास की गई।
जिसमें प्री लिटिगेशन के 20216 में से 17142 मामलों का निपटान करते हुए 43 लाख 74 हजार 635 रुपये की राशि का अवॉर्ड पास किया गया तथा कोर्ट में लंबित 8897 मामलों में से 5655 मामलों का निपटारा करते हुए 2 करोड़ 1 लाख 32 हजार 832 रुपये की राशि अवॉर्ड व जुर्माना के रूप में पास की गई। प्रीलिफिकेशन के 20216 मामलों में से 670 मामलों में बैंक रिकवरी संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए 670 में से 12 मामलों का निपटान व 27 लाख 87 हजार 500 रुपये का जुर्माना अवॉर्ड पास किया गया।
इसी प्रकार राजस्व सहित अन्य मामलों जिसमें वैवाहिक के 11 हजार 956 मामलों में से 10 हजार 40 मामले सहित श्रम, बिजली संबंधी मामलों की सुनवाई की गई। कोर्ट में लंबित 8897 मामलों में से 5655 मामलों में आपराधिक के 373 में से 148 व 2 लाख 41 हजार 678 रुपये का जुर्माना हुआ है। एनआई एक्ट के 1294 मामलों में से 148 तथा 6 लाख 46 हजार रुपये का अवार्ड, एमएसीटी के 306 मामलों में से 30 व एक करोड़ 26 लाख 5 हजार रुपये का अवार्ड व बैंक रिकवरी के 142 में से 17, वैवाहिक मामलों के 299 में से 111 व समरी चालान के 591 में से 320 और 58 हजार 100 रुपये का जुर्माना व अवॉर्ड पास किया।