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Fatehabad News: प्रदेश भर की गोशालाओं को मिलेंगी 800 ई रिक्शा, 330 में सोलर प्लांट लगाने का काम हुआ पूरा
Sat, 23 Aug 2025 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 23 Aug 2025 11:35 PM IST
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फतेहाबाद में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जिला फतेहाबाद के गांव बड़ोपल में आयोजित गौशाल
फतेहाबाद। श्रीकृष्ण गोशाला बड़ोपल में शनिवार को गोशालाओं को चारा अनुदान राशि वितरित करने को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजेंद्रानंद महाराज को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। सीएम न उनके जीवन को प्रेरणास्रोत बताते हुए नागरिकों से आह्वान किया कि वे उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने जिले की 67 गोशालाओं को प्रबंधकों को 7 करोड़ 2 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि के चेक सौंपे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश की 605 गोशालाओं के लिए कुल 88 करोड़ 50 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांव बड़ोपल के विकास के लिए 21 लाख रुपये देने तथा बड़ोपल में वन्य जीव उपचार केंद्र का नाम राजेंद्रानंद महाराज के नाम पर रखने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचगव्य उत्पादन के लिए 101 गोशालाओं को 6 करोड़ 50 लाख रुपये की मशीन खरीदने के लिए अनुदान राशि दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बीते साढ़े 10 वर्षों में चारे के लिए कुल 358 करोड़ 50 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जा चुकी है। अब तक 330 गोशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाए जा चुके हैं और शेष में यह कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में केवल 215 पंजीकृत गोशालाएं थीं, जिनमें एक लाख 75 हजार गोवंश का पालन-पोषण होता था। प्रदेश सरकार ने बीते दस वर्षों में इस संख्या में वृद्धि करते हुए इसे 686 पंजीकृत गोशालाओं तक पहुंचाया है, जहां वर्तमान में 4 लाख बेसहारा गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में गोसेवा आयोग के लिए मात्र 2 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 595 करोड़ रुपये कर दिया है। गोवंश के पुनर्वास के लिए 200 गोशालाओं को शेड निर्माण के लिए प्रति गोशाला 10 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई है। इनमें से 51 गोशालाओं में शेड बनकर तैयार हो चुके हैं।
गोशालाओं को 800 ई-रिक्शा उपलब्ध करवाई जाएंगी, जिसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। समारोह में कृषि, किसान कल्याण एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि गाय हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई है। गाय का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। देसी गाय के दूध में औषधीय गुण होते हैं और गाय में पंचतत्व समाहित हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में गोसेवा के प्रति जन-जागरण और जागरूकता पैदा करना है।
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मुख्यमंत्री ने जिले की 67 गोशालाओं को प्रबंधकों को 7 करोड़ 2 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि के चेक सौंपे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश की 605 गोशालाओं के लिए कुल 88 करोड़ 50 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांव बड़ोपल के विकास के लिए 21 लाख रुपये देने तथा बड़ोपल में वन्य जीव उपचार केंद्र का नाम राजेंद्रानंद महाराज के नाम पर रखने की घोषणा की।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचगव्य उत्पादन के लिए 101 गोशालाओं को 6 करोड़ 50 लाख रुपये की मशीन खरीदने के लिए अनुदान राशि दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बीते साढ़े 10 वर्षों में चारे के लिए कुल 358 करोड़ 50 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जा चुकी है। अब तक 330 गोशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाए जा चुके हैं और शेष में यह कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में केवल 215 पंजीकृत गोशालाएं थीं, जिनमें एक लाख 75 हजार गोवंश का पालन-पोषण होता था। प्रदेश सरकार ने बीते दस वर्षों में इस संख्या में वृद्धि करते हुए इसे 686 पंजीकृत गोशालाओं तक पहुंचाया है, जहां वर्तमान में 4 लाख बेसहारा गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में गोसेवा आयोग के लिए मात्र 2 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 595 करोड़ रुपये कर दिया है। गोवंश के पुनर्वास के लिए 200 गोशालाओं को शेड निर्माण के लिए प्रति गोशाला 10 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई है। इनमें से 51 गोशालाओं में शेड बनकर तैयार हो चुके हैं।
गोशालाओं को 800 ई-रिक्शा उपलब्ध करवाई जाएंगी, जिसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। समारोह में कृषि, किसान कल्याण एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि गाय हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई है। गाय का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। देसी गाय के दूध में औषधीय गुण होते हैं और गाय में पंचतत्व समाहित हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में गोसेवा के प्रति जन-जागरण और जागरूकता पैदा करना है।