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एमटीपी किट बेचते स्टोर संचालक रंगे हाथों दबोचा

Sat, 11 Jun 2016 12:16 AM IST
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fatehabad Updated Sat, 11 Jun 2016 12:16 AM IST
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मेडिकल स्टोर संचालक एमटीपी किट बेचते रंगे हाथों दबोचा - फोटो : amar ujala

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 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार शाम को गांव बीघड़ के मेडिकल हॉल पर बोगस ग्राहक बनाकर भेजा। यहां मेडिकल संचालक को एमटीपी किट (गर्भपात किट) बेचते हुए काबू कर लिया। टीम में शामिल डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. गिरीश, ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. रमन श्योराण, नरेंद्र खरब ने मेडिकल स्टोरा की जांच की। इस दौरान टीम को प्रतिबंधित दवाओं के खाली रैपर भी मिले। टीम ने दुकान को सील कर पुलिस को लिखित शिकायत दे दी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली कि गांव बीघड़ में श्री गणेश मेडिकल स्टोर का संचालक अवैध रूप से एमटीपी किट बेच रहा है। टीम ने फ्लीट मैनेजर कुलदीप को एक हजार रुपये का नोट देकर मेडिकल स्टोर पर भेजा। कुलदीप ने स्टोर पर एमटीपी किट मांगी। स्टोर संचालक मोहन कुमार ने उसे एमटीपी किट दे दी और एक हजार रुपये लेकर किट के 300 रुपये वापस दे दिए। इसी दौरान टीम ने स्टोर पर छापा मारकर एक हजार रुपये का नोट और एमटीपी किट बरामद कर ली। टीम को मौके पर फार्मासिस्ट भी नहीं मिला। इसके अलावा फ्रिज भी बंद था। टीम के अनुसार, मौके से प्रतिबंधित दवाइयों के खाली पत्तों के अलावा लूज गोलियां भी मिली हैं। टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए मेडिकल स्टोर को सील कर पुलिस को लिखित शिकायत दे दी है।
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एमआरपी से भी ज्यादा में बेची किट
बोगस ग्राहक बनाकर मेडिकल स्टोर पर भेजा था। संचालक ने अधिकतम खुदरा मूल्य से सौ रुपये अधिक में किट दे दी। मौके पर दिया हुआ एक हजार रुपये का नोट और किट को बरामद कर लिया है। मेडिकल स्टोर पर कई अनियमितताएं पाई गईं हैं। स्टोर को सील कर पुलिस को लिखित शिकायत दे दी है।
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डॉ. गिरीश, डिप्टी सिविल सर्जन

एक्सपर्ट राय
एमटीपी किट (मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी) किसी गर्भवती महिला को किसी कारण वंश यानी गर्भ में बच्चा खराब हो रहा है, मां की तबीयत बिगड़ रही है या बच्चे में किसी प्रकार की कमी है, ऐसी स्थिति में शर्तों को पूरा करने के बाद एमबीबीएस की राय पर प्रयोग की जाती है। इसके लिए जगह भी चयनित की जाती है। आम मेडिकल संचालक एमटीपी किट नहीं रख सकता। इसके लिए उसे अलग से लाइसेंस लेना पड़ता है। एमटीपी किट के लिए पूरी कागजी कार्रवाई होती है और पूरा रिकार्ड रखना होता है।
डॉ. मनीष बंसल, एसएमओ भट्टूकलां
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