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मंडियों में बासमती धान को नहीं मिल रहे खरीदार

Sat, 10 Oct 2020 09:18 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 09:18 PM IST
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basmati rice
निर्यात होने वाले चावल के बंदरगाहों में फंसने के चलते इस बार बासमती चावलों की डिमांड काफी कम हो गई है। जिसके चलते मंडियों में एक सप्ताह के दौरान बासमती धान की कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। कीमत के मामले में बासमती अब परमल धान से भी नीचे रह गए हैं।
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जानकारी के अनुसार फतेहाबाद में 1.19 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई की गई थी। सीजन में सबसे पहले 1509 किस्म की बासमती की फसल मंडी में आई और उसके बाद परमल। जानकारों का कहना है कि 1509 बासमती धान की खरीद कारोबारी करते हैं। बाद इसका विदेशों में निर्यात किया जाता हैं जबकि परमल की खरीद सरकारी होती है। परमल धान का एमएसपी प्रदेश सरकार ने इस बार 1888 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले वर्ष 1509 बासमती 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकी थी। इस बार इसके दाम 1800 से 2000 के बीच घूम रहे हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में जब मंडियों में बासमती 2150 रुपये प्रति क्विंटल के करीब थे। इस सप्ताह यह 200 रुपये गिर गए हैं। शनिवार को इसके दाम 1850 के करीब बोले गए। इतने कम दाम मिलने से धान उत्पादक किसानों में खासी निराशा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अधिकांश भूमि पर 1509 किस्म की वैरायटी की बिजाई की थी। परमल धान का उत्पादन 80 मन प्रति क्विंटल निकलता जबकि 1509 का 50 मन निकलता है। अब बासमती के दाम न मिलने से बासमती के जमींदारों को परमल से भी कम दाम मिल रहे हैं। मुख्य कारण है कोरोना काल में यहां के निर्यातकों का खाड़ी देशों में जाने वाला चावल का फंसना। इसके अलावा अनेक कंडेला इत्यादि बंदरगाहों पर चावल फंसा हुआ है। खाड़ी देशों में पहले जैसी डिमांड नहीं रही। दूसरा यहां उत्पादन अधिक होना।
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उत्पादन अधिक होने से धान की बेकद्री हो रही है। निर्यातक अजय जिंदल के अनुसार, पिछले साल का स्टॉक काफी पेंडिंग है। इसके अलावा उनके द्वारा भेजा गया माल अभी रास्ते पर अटका हुआ है। उत्पादन ज्यादा होने से माल की खरीद नहीं हो रही। यह बता दें कि परमल की खरीद सरकार करती है, जबकि बासमती की निजी खरीददार। मार्केट कमेटी संजीव सचदेवा के अनुसार, मिलों में पुराना चावल अभी लगा हुआ है। जब मिलो से पुराना चावल निकलेगा तब ही वह नया चावल खरीदने के लिए मंडियों में आएंगे। बासमती के मामले में मार्केट कमेटी कुछ नहीं कर सकती।
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