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धान की खरीद न होने पर सड़कों पर उतरे किसान
कैथ्ाल
Updated Wed, 02 Oct 2013 12:41 AM IST
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एक अक्तूबर से शुरू होने वाली धान की सरकारी खरीद मिलर्स की हड़ताल के कारण शुरू नहीं हो पाई। इस कारण किसानों को पहले ही दिन अपनी फसल को बेचने के लिए आंदोलन करना पड़ा। कैथल सहित गुहला में किसानों ने जाम लगाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया।
दूसरी ओर जिले भर में मिलर्स अपने बकाया भुगतान को लेकर हड़ताल पर रहे। दिनभर प्रशासन की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रहीं। मिलर्स का कहना है कि भुगतान न होने तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
मिलर्स ने सरकार द्वारा लेवी चावल के भुगतान में दी गई एक प्रतिशत की छूट की करोड़ों रुपये की राशि के भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल की हुई है।
मिलर्स का कहना है कि इस भुगतान को रोक कर सरकार उनसे वर्ष 2007-08 में दिए गए बोनस के कागजात मांग रही है, जबकि ये पहले ही दिए जा चुके हैं।
मंडी में पूरा दिन रहा कशमकश
मंगलवार सुबह बोली शुरू न होने के कारण किसान एकत्रित होकर मार्केट कमेटी सचिव से मिले और उनसे धान की सरकारी खरीद शुरू करवाए जाने का आग्रह किया, लेकिन सचिव ने उन्हें साफ-सफाई युक्त धान लाकर सरकारी खरीद शुरू न होने तक निजी व्यापारियों को बेचने की सलाह दी। दूसरी ओर अग्रवाल धर्मशाला में कैथल में मिलर्स एसोसिएशन के दोनों गुटों के सदस्य राज्य प्रधान राजेंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में एकत्रित हुए। जहां मिलर्स ने इस मुद्दे सरकार को जमकर कोसा। प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी ने एकजुट होकर फैसला लिया कि जब तक उनके बकाए का भुगतान नहीं हो जाता, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। इसके बाद मिलर्स का प्रतिनिधिमंडल डीसी एन के सोलंकी से मिला। डीसी न बुधवार तक आला अधिकारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। एसोसिएशन गुटों के प्रधान मांगें राम खुरानिया, संजय गर्ग ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे धान की खरीद नहीं करेंगे। इस अवसर पर लाला कश्मीरी लाल, जगदीश गोयल, अश्वनी शोरेवाला, नरेंद्र जिप्पी शोरेवाला, बाबू राम, मांगें राम किठानिया सहित जिले भर से आए हुए मिलर्स मौजूद रहे।
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किसानों ने रेलवे ओवरब्रिज पर लगाया जाम
शाम तक भी धान की खरीद न होने पर किसानों के सब्र का बांध टूट गया और किसानों ने एकत्रित होकर रेलवे ओवरब्रिज पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना मिलते ही थाना शहर प्रभारी अश्वनी कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। किसानों ने कहा कि सुबह से धान की खरीद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक खरीद नहीं हुई है। यदि सुबह खरीद नहीं हुई तो वे बुधवार को फिर से जाम लगा देंगे। शाम के समय करीब आधे घंटे तक लगे जाम से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं, सचिव ने कहा कि मिलर्स की हड़ताल के कारण सरकारी खरीद नहीं हो पाई। मंडी में इस समय 30 से 35 हजार क्विंटल धान की आवक हो रही है। किसानों को निजी व्यापारियों द्वारा उचित कीमत दी जा रही है।
बजरंग दास के खिलाफ उठे बगावत के सुर
धर्मशाला में आयोजित बैठक में कई मिलर्स में इस बात का रोष दिखाई दिया कि मिलर्स तो अपने भुगतान के लिए हड़ताल कर रहे हैं, वहीं कान्फेड के चैयरमेन बजरंग दास गर्ग 7 अक्तूबर को मिलर्स को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार जताने के लिए जा रहे हैं। उन्हें इसके बजाय मिलर्स की समस्याओं के समाधान के लिए उनके साथ आना चाहिए, लेकिन व्यापारी नेता कहलाने वाले बजरंग दास मिलर्स की समस्या के समाधान के बजाय न जाने किस तरह से सीएम का आभार करने के लिए जा रहे हैं।
ढांड की मंडियों में लगे धान के ढेर, किसान मायूस
ढांड। अनाज मंडियों में धान की आवक ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है और मंडी में हर तरफ धान के ढेर लगे हैं। मंगलवार को मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा धान की सरकारी खरीद आरंभ करनी थी, परंतु खरीद न होने के कारण किसानों में मायूसी का माहौल बना था और किसानों में रोष पनप रहा था। मंगलवार को प्राइवेट खरीदार बहुत कम धान की खरीद कर रहे हैं, जबकि मशीनों से कटी फसलों में गीलापन होने के कारण किसानों को फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान राम सिंह, जिले सिहं, जितेंद्र कुमार, शेर सिंह, मोहन लाल, रामप्रताप, भीम सिंह सहित कई किसानों ने आरोप लगाया कि धान की खरीद न होने के कारण किसानों के सामने बड़ी विकराल समस्या पैदा हो गई है। सरकार को चाहिए कि तत्काल प्रभाव से धान की खरीद को शुरू करवाएं, ताकि मंडी में फसलें लेकर आ रहे किसानों को कोई परेशानी न हो।
चीका में किसानों ने पांच घंटे लगाया जाम
गुहला-चीका। अनाजमंडी चीका में धान की खरीद न होने से गुस्साए किसानों ने चीका-कैथल स्टेट हाईवे पर जाम लगा दिया। किसानों ने कहा कि एक अक्तूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होनी थी, लेकिन पहले ही दिन उनकी धान को नहीं खरीदा गया। खरीद न होता देख गुस्साए एकत्रित हुए तथा कैथल-पटियाला मार्ग पर जाम लगा दिया। किसानों ने लगातार पांच घंटे जाम लगाकर रखा। इस कारण सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार नवदीप नैन, थाना प्रभारी कश्मीर सिंह व खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों को जाम खोलने के लिए मनाने लगे, लेकिन किसानों ने अधिकारियों की एक न सुनी और जाम खोलने से मना कर दिया। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी धान की खरीद शुरू नहीं होती तब तक जाम नहीं खोलेंगे। काफी मशक्कत के बाद किसानों को प्रशासन समझाने में कामयाब हो गया। तहसीलदार नवदीप नैन ने कहा कि किसानों को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन और राइस मिलरों की चल रही बैठक में कोई हल निकलते ही धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी। जाम खुलने के बाद राहगीरों ने चैन की सांस ली। प्रदर्शनकारियाें का नेतृत्व भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष पाला राम गौड़ कर रहे थे। जाम के दौरान किसी भी वाहन को इधर से उधर नहीं जाने दिया। समाचार लिखे जाने तक बाजार में कोई भी एजेंसी खरीद के लिए नहीं आई थी। खरीद कार्य शुरू नहीं हो पाया था। किसानों की मांग है कि यदि सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है तो निजी व्यापारियों द्वारा खरीद का प्रबंध किया जाना चाहिए। उधर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह व नायब तहसीलदार नवदीप नैन ने कहा कि जिला स्तर पर व्यापारियाें और उच्चाधिकारियाें की धान खरीद को लेकर बैठक चली है। जैसे ही कोई फैसला प्रशासन व व्यापारियाें के बीच होता है उसी वक्त धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी। गुहला के विधायक फूल सिंह खेड़ी ने कहा कि सरकार शुरू से ही व्यापारी और किसान विरोधी नीतियां अपना रही है। अगर जल्द ही व्यापारियाें और किसानाें की समस्या का समाधान न हुआ तो इनेलो सड़क पर उतरने में जरा भी देर नहीं लगाएगी।
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दूसरी ओर जिले भर में मिलर्स अपने बकाया भुगतान को लेकर हड़ताल पर रहे। दिनभर प्रशासन की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रहीं। मिलर्स का कहना है कि भुगतान न होने तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
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मिलर्स ने सरकार द्वारा लेवी चावल के भुगतान में दी गई एक प्रतिशत की छूट की करोड़ों रुपये की राशि के भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल की हुई है।
मिलर्स का कहना है कि इस भुगतान को रोक कर सरकार उनसे वर्ष 2007-08 में दिए गए बोनस के कागजात मांग रही है, जबकि ये पहले ही दिए जा चुके हैं।
मंडी में पूरा दिन रहा कशमकश
मंगलवार सुबह बोली शुरू न होने के कारण किसान एकत्रित होकर मार्केट कमेटी सचिव से मिले और उनसे धान की सरकारी खरीद शुरू करवाए जाने का आग्रह किया, लेकिन सचिव ने उन्हें साफ-सफाई युक्त धान लाकर सरकारी खरीद शुरू न होने तक निजी व्यापारियों को बेचने की सलाह दी। दूसरी ओर अग्रवाल धर्मशाला में कैथल में मिलर्स एसोसिएशन के दोनों गुटों के सदस्य राज्य प्रधान राजेंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में एकत्रित हुए। जहां मिलर्स ने इस मुद्दे सरकार को जमकर कोसा। प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी ने एकजुट होकर फैसला लिया कि जब तक उनके बकाए का भुगतान नहीं हो जाता, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। इसके बाद मिलर्स का प्रतिनिधिमंडल डीसी एन के सोलंकी से मिला। डीसी न बुधवार तक आला अधिकारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। एसोसिएशन गुटों के प्रधान मांगें राम खुरानिया, संजय गर्ग ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे धान की खरीद नहीं करेंगे। इस अवसर पर लाला कश्मीरी लाल, जगदीश गोयल, अश्वनी शोरेवाला, नरेंद्र जिप्पी शोरेवाला, बाबू राम, मांगें राम किठानिया सहित जिले भर से आए हुए मिलर्स मौजूद रहे।
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किसानों ने रेलवे ओवरब्रिज पर लगाया जाम
शाम तक भी धान की खरीद न होने पर किसानों के सब्र का बांध टूट गया और किसानों ने एकत्रित होकर रेलवे ओवरब्रिज पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना मिलते ही थाना शहर प्रभारी अश्वनी कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। किसानों ने कहा कि सुबह से धान की खरीद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक खरीद नहीं हुई है। यदि सुबह खरीद नहीं हुई तो वे बुधवार को फिर से जाम लगा देंगे। शाम के समय करीब आधे घंटे तक लगे जाम से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं, सचिव ने कहा कि मिलर्स की हड़ताल के कारण सरकारी खरीद नहीं हो पाई। मंडी में इस समय 30 से 35 हजार क्विंटल धान की आवक हो रही है। किसानों को निजी व्यापारियों द्वारा उचित कीमत दी जा रही है।
बजरंग दास के खिलाफ उठे बगावत के सुर
धर्मशाला में आयोजित बैठक में कई मिलर्स में इस बात का रोष दिखाई दिया कि मिलर्स तो अपने भुगतान के लिए हड़ताल कर रहे हैं, वहीं कान्फेड के चैयरमेन बजरंग दास गर्ग 7 अक्तूबर को मिलर्स को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आभार जताने के लिए जा रहे हैं। उन्हें इसके बजाय मिलर्स की समस्याओं के समाधान के लिए उनके साथ आना चाहिए, लेकिन व्यापारी नेता कहलाने वाले बजरंग दास मिलर्स की समस्या के समाधान के बजाय न जाने किस तरह से सीएम का आभार करने के लिए जा रहे हैं।
ढांड की मंडियों में लगे धान के ढेर, किसान मायूस
ढांड। अनाज मंडियों में धान की आवक ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है और मंडी में हर तरफ धान के ढेर लगे हैं। मंगलवार को मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा धान की सरकारी खरीद आरंभ करनी थी, परंतु खरीद न होने के कारण किसानों में मायूसी का माहौल बना था और किसानों में रोष पनप रहा था। मंगलवार को प्राइवेट खरीदार बहुत कम धान की खरीद कर रहे हैं, जबकि मशीनों से कटी फसलों में गीलापन होने के कारण किसानों को फसल बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान राम सिंह, जिले सिहं, जितेंद्र कुमार, शेर सिंह, मोहन लाल, रामप्रताप, भीम सिंह सहित कई किसानों ने आरोप लगाया कि धान की खरीद न होने के कारण किसानों के सामने बड़ी विकराल समस्या पैदा हो गई है। सरकार को चाहिए कि तत्काल प्रभाव से धान की खरीद को शुरू करवाएं, ताकि मंडी में फसलें लेकर आ रहे किसानों को कोई परेशानी न हो।
चीका में किसानों ने पांच घंटे लगाया जाम
गुहला-चीका। अनाजमंडी चीका में धान की खरीद न होने से गुस्साए किसानों ने चीका-कैथल स्टेट हाईवे पर जाम लगा दिया। किसानों ने कहा कि एक अक्तूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होनी थी, लेकिन पहले ही दिन उनकी धान को नहीं खरीदा गया। खरीद न होता देख गुस्साए एकत्रित हुए तथा कैथल-पटियाला मार्ग पर जाम लगा दिया। किसानों ने लगातार पांच घंटे जाम लगाकर रखा। इस कारण सड़क के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार नवदीप नैन, थाना प्रभारी कश्मीर सिंह व खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों को जाम खोलने के लिए मनाने लगे, लेकिन किसानों ने अधिकारियों की एक न सुनी और जाम खोलने से मना कर दिया। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी धान की खरीद शुरू नहीं होती तब तक जाम नहीं खोलेंगे। काफी मशक्कत के बाद किसानों को प्रशासन समझाने में कामयाब हो गया। तहसीलदार नवदीप नैन ने कहा कि किसानों को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन और राइस मिलरों की चल रही बैठक में कोई हल निकलते ही धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी। जाम खुलने के बाद राहगीरों ने चैन की सांस ली। प्रदर्शनकारियाें का नेतृत्व भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष पाला राम गौड़ कर रहे थे। जाम के दौरान किसी भी वाहन को इधर से उधर नहीं जाने दिया। समाचार लिखे जाने तक बाजार में कोई भी एजेंसी खरीद के लिए नहीं आई थी। खरीद कार्य शुरू नहीं हो पाया था। किसानों की मांग है कि यदि सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है तो निजी व्यापारियों द्वारा खरीद का प्रबंध किया जाना चाहिए। उधर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह व नायब तहसीलदार नवदीप नैन ने कहा कि जिला स्तर पर व्यापारियाें और उच्चाधिकारियाें की धान खरीद को लेकर बैठक चली है। जैसे ही कोई फैसला प्रशासन व व्यापारियाें के बीच होता है उसी वक्त धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी। गुहला के विधायक फूल सिंह खेड़ी ने कहा कि सरकार शुरू से ही व्यापारी और किसान विरोधी नीतियां अपना रही है। अगर जल्द ही व्यापारियाें और किसानाें की समस्या का समाधान न हुआ तो इनेलो सड़क पर उतरने में जरा भी देर नहीं लगाएगी।