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गंभीर रोगों का इलाज है ‘रेफर’
अमर उजाला फरीदाबाद
Updated Sun, 20 Oct 2013 07:53 PM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने का स्वास्थ्य विभाग का दावा अनंगपुर पीएचसी में आकर फेल हो जाता है। डेंगू का कहर मंडरा रहा है। लेकिन हैरानी की बात है कि इस केंद्र पर डेंगू जांच का इंतजाम नहीं है, जबकि इस गांव के दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
करीब 60 हजार की आबादी पर बने इस स्वास्थ्य केंद्र में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टरनहीं हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां इलाज कैसे होता होगा। यहां जरा सा गंभीर मरीज आया नहीं कि उसे बीके अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। मानो यहां के सबसे बड़े इलाज का नाम ‘रेफर’ है। कम सुविधाओं के साथ अस्पताल का स्टाफ एवं स्थानीय लोग कैसे गुजारा कर रहे हैं इसका हमने जायजा लिया। यहां दवा की कोई किल्लत नहीं है लेकिन कई सुविधाओं की कमी है।
केंद्र चल रहा है गांव की जमीन पर
-जो पीएचसी लगभग चार एकड़ जमीन पर बना होना चाहिए। वह केवल 5000 वर्ग फीट में चल रहा है। केंद्र के एक कर्मचारी ने बताया कि जगह कम होने के कारण कई जांच सुविधाएं यहां नहीं हैं। क्योंकि जांच करने के लिए मशीन चाहिए और मशीन के लिए जगह। यहां इलाज के लिए आई एक मरीज आशा ने बताया कि केंद्र पर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड की कई जांच नहीं होती। जिस कारण लोगों को जांच के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों एवं पैथालोजी का सहारा लेना पड़ता है।
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केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डेंगू की चपेट में
-इस केंद्र पर केवल चार डॉक्टर हैं, जिनमें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक मेडिकल ऑफि सर, एक दंत चिकित्सक, एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। मेडिकल ऑफिसर खुद डेंगू से पीड़ित हैं। केंद्र की स्थिति के बारे में जब उनसे फोन पर संपर्क किया गया तो उन्हाेंने बताया कि वह इलाज करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर कई सुविधाओं की कमी है, जिन्हें शुरू करने के लिए वह प्रयास कर रही हैं।
एंबुलेंस तक नहीं
-केंद्र पर एंबुलेंस नहीं है। गांव निवासी मनोहरी ने बताया कि गंभीर हालत होने पर गांव वाले खुद ही या फिर डॉक्टर अपनी गाड़ियाें से मरीज को बीके अस्पताल पहुंचवा देते हैं। स्थानीय निवासी शांति ने बताया कि साधारण प्रसव के लिए केंद्र पर 24 घंटे सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन सिजेयरियन के लिए केंद्र पर सुविधा नहीं है।
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करीब 60 हजार की आबादी पर बने इस स्वास्थ्य केंद्र में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टरनहीं हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां इलाज कैसे होता होगा। यहां जरा सा गंभीर मरीज आया नहीं कि उसे बीके अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। मानो यहां के सबसे बड़े इलाज का नाम ‘रेफर’ है। कम सुविधाओं के साथ अस्पताल का स्टाफ एवं स्थानीय लोग कैसे गुजारा कर रहे हैं इसका हमने जायजा लिया। यहां दवा की कोई किल्लत नहीं है लेकिन कई सुविधाओं की कमी है।
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केंद्र चल रहा है गांव की जमीन पर
-जो पीएचसी लगभग चार एकड़ जमीन पर बना होना चाहिए। वह केवल 5000 वर्ग फीट में चल रहा है। केंद्र के एक कर्मचारी ने बताया कि जगह कम होने के कारण कई जांच सुविधाएं यहां नहीं हैं। क्योंकि जांच करने के लिए मशीन चाहिए और मशीन के लिए जगह। यहां इलाज के लिए आई एक मरीज आशा ने बताया कि केंद्र पर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड की कई जांच नहीं होती। जिस कारण लोगों को जांच के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों एवं पैथालोजी का सहारा लेना पड़ता है।
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केंद्र की मेडिकल ऑफिसर डेंगू की चपेट में
-इस केंद्र पर केवल चार डॉक्टर हैं, जिनमें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक मेडिकल ऑफि सर, एक दंत चिकित्सक, एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। मेडिकल ऑफिसर खुद डेंगू से पीड़ित हैं। केंद्र की स्थिति के बारे में जब उनसे फोन पर संपर्क किया गया तो उन्हाेंने बताया कि वह इलाज करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर कई सुविधाओं की कमी है, जिन्हें शुरू करने के लिए वह प्रयास कर रही हैं।
एंबुलेंस तक नहीं
-केंद्र पर एंबुलेंस नहीं है। गांव निवासी मनोहरी ने बताया कि गंभीर हालत होने पर गांव वाले खुद ही या फिर डॉक्टर अपनी गाड़ियाें से मरीज को बीके अस्पताल पहुंचवा देते हैं। स्थानीय निवासी शांति ने बताया कि साधारण प्रसव के लिए केंद्र पर 24 घंटे सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन सिजेयरियन के लिए केंद्र पर सुविधा नहीं है।