फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   no room for improve of traffic

सड़कों पर नहीं है ट्रैफिक सुधार की जगह

Sun, 10 Nov 2013 10:29 PM IST
अमर उजाला फरीदाबाद
अमर उजाला फरीदाबाद Updated Sun, 10 Nov 2013 10:29 PM IST
विज्ञापन
no room for improve of traffic

फरवरी-2011 में फिल्म अभिनेत्री पूनम ढिल्लों शहर आई थीं। खस्ताहाल सड़कों व बेलगाम ट्रैफिक से परेशान ढिल्लों ने कहा था कि हैरानी होती है कि यहां की सड़कें व ट्रैफिक इतना खराब है।

विज्ञापन


रास्ता देखकर डर-डर के आई हूं कि कहीं कमर में लचक न आ जाए। पिछले माह पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम शहर में आए। उन्होंने थोड़ी देरी से कार्यक्रम में आने का ठीकरा यहां की खस्ताहाल सड़कों पर फोड़ा। जबकि आम आदमी शहर में इस परेशानी से हर रोज दो-चार हो रहा है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बहुत कम हैं।
विज्ञापन


साइकिल वालों के लिए इंतजाम ही नहीं है। सरपट दौड़ते वाहनों के बीच साइकिल चलाने में लोग घबराते हैं। सड़कों में इतने गड्ढे हैं कि दोपहिया चालकों की कमर दुखती है। अब हाईकोर्ट ने प्रशासन से शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने एवं साइकिल ट्रैक बनाने के लिए कहा है। ऐसे में ‘अमर उजाला’ ने नगर निगम मुख्यालय के साथ लगती वीआईपी सड़क के हाल का जायजा लिया कि क्या यहां यह सब कर पाना संभव है। पेश है संवाददाता ओम प्रकाश एवं फोटोग्राफर गौरव चौधरी की रिपोर्ट।
विज्ञापन
विज्ञापन


...और ट्रैफिक पुलिस निगल गई फुटपाथ
-नीलम चौक से बीके चौक तक की सड़क पर नगर निगम खास ख्याल रखता है। ट्रैफिक पुलिस इन दो चौकों के बीच की सड़क को अक्सर प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल करती है। इसके बावजूद इस सड़क पर नगर निगम एवं ट्रैफिक पुलिस की मेहरबानी से कई बीमारियां पैदा हो गईं हैं।

यहां के फुटपाथ को कुछ दूर तक ट्रैफिक पुलिस खुद निगल गई है। बड़ी गाड़ियों के लिए एक तरफ काटकर इसे आधा कर दिया गया है, जबकि यह समय फुटपाथ को बढ़ावा देने का है। जो शेष फुटपाथ है उस पर निगम प्रशासन की मेहरबानी से अतिक्रमणकारियों ने घेर रखा है। इसलिए पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं है। कहीं इस पर ऑटो खड़ा है तो कहीं कार। कहीं पपीता बिक रहा है तो कहीं कपड़े...। फुटपाथ का जो हिस्सा खाली है वह टूटा हुआ है। यह हाल सबसे अच्छी मानी जाने वाली सड़क का है। शेष शहर का गुणा-भाग खुद लगा लीजिए।

फुटपाथ पर ही है निगमायुक्त का साइन बोर्ड
सड़क के दूसरी ओर भी पपीते वालों का कब्जा है। पैदल चलना है तो सड़क पर आना पड़ेगा। यहां आए तो आप दुर्घटना को आमंत्रण देंगे। नीलम चौक से थोड़ा आगे बढ़ेंगे तो फुटपाथ पर नगर निगम के दो साइन बोर्ड पैदल चलने वालों को मुंह चिढ़ाते हुए खड़े हैं। यह साइन बोर्ड किसी आम आदमी के नहीं हैं। इसलिए फुटपाथ से इन्हें कौन हटाए। एक निगमायुक्त कार्यालय का रास्ता बताने के लिए है और दूसरा उनके घर का। पैदल वालों का रास्ता रुके तो क्या फर्क पड़ता है।


-शहर की अंदरूनी सड़कों की हालत इससे भी खराब है। चाहे वह ओल्ड फरीदाबाद की बात हो, एनआईटी की हो या फिर बल्लभगढ़ की। सड़क तक फैली दुकानों ने लोगों का आना-जाना कठिन कर रखा है। लेकिन न तो नगर निगम कार्रवाई करता और न ही पुलिस प्रशासन। बीके से हार्डवेयर रोड का मुआयना करिए पता चलेगा कि आपका रास्ते में किसने बाधा डाल रखी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed