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ये कैसी कष्ट निवारण समिति
अमर उजाला फरीदाबाद
Updated Tue, 22 Oct 2013 07:30 PM IST
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जो समिति जनता के कष्टों के निवारण के लिए बनाई गई है, वह समाधान करने की बजाए अगली बैठक के लिए टाल देती है। टालने की प्रक्रिया काफी पुरानी है।
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बुधवार, 23 अक्तूबर को कष्ट निवारण समिति की बैठक का आयोजन होना है। इसके एजेंडे में 15 मद रखे गए हैं। इसमें आठ मद ऐसे हैं जो पहले भी बैठक में रखे जा चुके हैं। पिछली दो बैठकों में समस्या का समाधान न होने के कारण इन्हें लंबित रखने के आदेश दिए गए थे। समस्याओं का निपटारा न होेने के कारण लोगाें का भी कष्ट निवारण समिति की बैठक से विश्वास उठता जा रहा है।
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इसी वजह से 17 लाख आबादी वाले इस शहर की कष्ट निवारण समिति की बैठक में अमूमन 20 के अंदर ही समस्याएं दी गईं होती हैं। सेक्टर-चार आरडब्ल्यूए के प्रधान हरवीर सिंह ने बताया कि सेक्टर के साथ झुग्गियां सटी हुई हैं। सेक्टर व झुग्गियों के बीच में दीवार का निर्माण किया जाना है। लेकिन हुडा द्वारा दीवार निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है।
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इस समस्या को कष्ट निवारण समिति में कई बार रखा जा चुका है। लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय उसे हर बार लंबित कर दिया जाता है। इसलिए इस बार उन्हाेंने समस्या को एजेंडे में शामिल ही नहीं करवाया।
जीवन नगर में रहने वाले अरविंद कौशिक ने बताया कि जीवन नगर से वजीरपुर गांव की रोड काफी समय से खराब पड़ी है। इस समस्या को पिछले तीन बैठकों में उठाया जा चुका है। लेकिन ठोस समाधान करने की बजाय हर बार लंबित कर दिया जाता है। ऐसे ही कई और मामले भी हैं जो पिछली कई बैठकाें से लंबित चले आ रहे हैं।
‘कई बार समस्याओं के निपटारे में देरी हो जाती है। लेकिन दो से तीन बैठकों में समस्या का समाधान कर देना चाहिए। समिति के सदस्यों को भी प्रशासन का समस्याओं के निपटारे में पूरा सहयोग करना चाहिए’।
-अनीस पाल, सक्रिय सदस्य, कष्ट निवारण समिति
‘सभी समस्याओं की गहराई से जांच की जाती है। इसलिए कई मामले अधूरे छोड़ दिए जाते हैं। बिना किसी ठोस निष्कर्ष के एजेंडे से समस्या को नहीं हटाया जा सकता’।
-बलराज सिंह मोर, जिला उपायुक्त।