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घर में गर्भवती महिला है तो ये खबर जरूर देखें
प्रवीण पाण्डेय
Updated Thu, 02 Jan 2014 10:46 AM IST
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हरियाणा में झोलाछाप डॉक्टर प्रसूता को आक्सीटोसिन का इंजेक्शन देकर प्रसूति करवा रहे हैं। जिसके चलते महिलाओं को जान से हाथ भी धोना पड़ रहा है।
रोहतक पीजीआई की एक शोध में यह खुलासा हुआ है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप पर गाज गिरानी शुरू की है।
झोलाछाप डाक्टर प्रसव पीड़ा बढ़ाकर जल्दी बच्चा पैदा करवाने के लिए आक्सीटोसिन इंजेक्शन दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं।
यह इंजेक्शन पोस्ट पार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद खून बहना) को रोकने के लिए दिया जाता है। जिसकी एक निर्धारित मात्रा मरीज के मुताबिक होती है, लेकिन अनाड़ी यह इंजेक्शन प्रसूति करवाने के लिए पहले ही दे रहे हैं। ऐसा कर जच्चा और बच्चा दोनों की जानों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
शोध के दौरान रोहतक पीजीआई की टीम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और गांव के सरपंचों से मिलकर ऐसी प्रसूताओं के बारे में जानकारी हासिल की है। जो झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर में पड़ कर अपना जीवन बर्बाद कर रही हैं।
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ऐसे करीब पचास फीसदी मामलों में आक्सीटोसिन का प्रयोग पाया गया है। लिहाजा अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह दवाएं कहां से आ रही हैं और झोलाछाप द्वारा दी जाने वाली दवाओं में साल्ट क्या हैं।
कोट:
कुछ मामलों में हमने देखा है कि लेबर पेन के दौरान यह लोग आक्सीटोसिन देते हैं, जिससे बच्चे का दम घुटने का खतरा होता है। जबकि यह लोग यह इंजेक्शन लगाने के लिए मान्य नहीं है। लिहाजा इनसे बचना बहुत जरूरी है।
डा. राकेश गुप्ता एमडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा।
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रोहतक पीजीआई की एक शोध में यह खुलासा हुआ है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप पर गाज गिरानी शुरू की है।
झोलाछाप डाक्टर प्रसव पीड़ा बढ़ाकर जल्दी बच्चा पैदा करवाने के लिए आक्सीटोसिन इंजेक्शन दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं।
यह इंजेक्शन पोस्ट पार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद खून बहना) को रोकने के लिए दिया जाता है। जिसकी एक निर्धारित मात्रा मरीज के मुताबिक होती है, लेकिन अनाड़ी यह इंजेक्शन प्रसूति करवाने के लिए पहले ही दे रहे हैं। ऐसा कर जच्चा और बच्चा दोनों की जानों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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शोध के दौरान रोहतक पीजीआई की टीम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और गांव के सरपंचों से मिलकर ऐसी प्रसूताओं के बारे में जानकारी हासिल की है। जो झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर में पड़ कर अपना जीवन बर्बाद कर रही हैं।
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ऐसे करीब पचास फीसदी मामलों में आक्सीटोसिन का प्रयोग पाया गया है। लिहाजा अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह दवाएं कहां से आ रही हैं और झोलाछाप द्वारा दी जाने वाली दवाओं में साल्ट क्या हैं।
कोट:
कुछ मामलों में हमने देखा है कि लेबर पेन के दौरान यह लोग आक्सीटोसिन देते हैं, जिससे बच्चे का दम घुटने का खतरा होता है। जबकि यह लोग यह इंजेक्शन लगाने के लिए मान्य नहीं है। लिहाजा इनसे बचना बहुत जरूरी है।
डा. राकेश गुप्ता एमडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा।