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नहीं बढ़ेंगे बिजली के रेट
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Mon, 06 Jan 2014 11:37 PM IST
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घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। अब वर्ष 2014-15 के दौरान दरों में किसी प्रकार का इजाफा नहीं होगा। घरेलू बिजली की मौजूदा दरों को संशोधित कर पुरानी टेलिस्कोपिक प्रणाली को एक बार फिर से अपना कर उपभोक्ताओं को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।
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इससे 1,600 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वालों को हर दो माह में 200 रुपये की बचत होगी। इस बात की जानकारी सोमवार को बिजली विभाग के प्रधान सचिव व हरियाणा बिजली निगमों के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने मीडिया को दी।
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सिंह ने आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर समझाने का प्रयास किया कि हरियाणा में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले अभी भी बिजली सस्ती है। देवेंद्र सिंह ने इस बात का भी जिक्र किया कि हरियाणा में उपभोक्ताओं को जो राहत दी जा रही है, उसका दिल्ली सरकार के निर्णय से कोई लेना देना नहीं है।
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प्रधान सचिव देेवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2013-14 की अवधि के दौरान हरियाणा की बिजली दरों में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में 25, आंध्र प्रदेश में 23, महाराष्ट्र में 20 और हिमाचल प्रदेश में 16 प्रतिशत का इजाफा किया गया था।
गत तीन वर्षों की अवधि के दौरान हरियाणा की बिजली दरों में औसतन वार्षिक वृद्धि मात्र 10.1 प्रतिशत रही है। इसके मुकाबले राजस्थान में 18, दिल्ली में 17, उत्तर प्रदेश में 16.5, हिमाचल प्रदेश में 12.7, बिहार, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में यह औसत वृद्धि 12-12 प्रतिशत रही।
हरियाणा में वसूली दर सबसे कम
देवेंद्र सिंह ने बताया कि हरियाणा में फ्यूल सरचार्ज असेसमेंट (एफएसए) मिलाकर कुल वसूली दर न्यूनतम 3.85 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि दिल्ली में यह दर 4.41 रुपये (सब्सिडी से पहले) है। पंजाब में यह 5.15 रुपये प्रति यूनिट है। हरियाणा में घरेलू दरों का सबसे ऊंचा स्लैब 7.35 रुपये प्रति यूनिट है। दिल्ली में यह 7.19 और पंजाब में 7.28 रुपये प्रति यूनिट है। हरियाणा में गैर-घरेलू और औद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरें दिल्ली के मुकाबले प्रति यूनिट लगभग एक रुपये कम है।
लाइन लॉस घटाने का चल रहा प्रयास
बिजली निगमों के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर हरियाणा में लॉस के बाद दरें अपेक्षाकृत अन्य पड़ोसी राज्यों से काफी कम है। हरियाणा में वर्ष 2013-14 के दौरान लाइन लॉस 25 प्रतिशत है। दिल्ली और पंजाब में 15 प्रतिशत है। हरियाणा के मुकाबले 10 प्रतिशत लॉस के बाद भी पंजाब और दिल्ली की बिजली दरें हरियाणा के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक हैं। लॉस घटाने के लिए फीडर पिलर बॉक्स योजना चलाई जा रही है। पिलर बॉक्स सिस्टम को अपनाने वाले उपभोक्ताओं को छूट दी जा रही है। इससे लॉस में कमी आ रही है। बिजली विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि हरियाणा के बिजली वितरण निगम सरकारी निगम है। यहां सीएजी ने वर्ष 2011 तक का बिजली वितरण निगमों का पंचवर्षीय ऑडिट भी किया है।