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Charkhi Dadri News: 40 साल से नहीं बढ़ी 25 गांवों की पेयजल भंडारण क्षमता
Sat, 07 Sep 2024 06:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 07 Sep 2024 06:10 AM IST
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राजनीति पेज का मुद्दा
- 12 दिन के अंदर टैंक हो जाते हैं खाली, आबादी दोगुनी होने पर भी भंडारण क्षमता वही की वही
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जनस्वास्थ्य विभाग शहर में तो पेयजल आपूर्ति में विस्तार एवं सुधार की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन गांवों में आबादी बढ़ने पर पेयजल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 25 गांव ऐसे हैं, जिनकी आबादी 10 हजार से ज्यादा है। इन गांवों में बने जलघर परिसर में एक ही भंडारण टैंक है। आबादी के अनुसार भंडारण क्षमता कम है। टैंक 12 से 14 दिन में ही खाली हो जाते हैं। इस समय गांवों में दो से तीन दिन में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, विभाग जल जीवन मिशन योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत पुराने जलघरों की पेयजल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर काम नहीं किया जा रहा है। जिले में पांच नए जलघर जरूर बनाए गए हैं और करीब 65 जलघर हैं, जिनमें से 50 तो 45 साल पुराने हैं, जिनकी भंडारण क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी है।
बता दें कि हर साल आवासीय दायरा बढ़ता जा रहा है। इन अधिकतर जलघरों में एक ही भंडारण टैंक बना हुआ है। अब दो टैंक बनाए जाने की जरूरत है तभी आने वाले समय में पेयजल की किल्लत से निपटा जा सकता है। इन जलघरों में पानी उठान की मोटरें भी कंडम हो चुकी हैं। इनको भी आधुनिक तकनीक की लगाए जाने की जरूरत है। ताकि पानी का प्रेशर बना रहे।
- इन गांवों में कम है पेयजल भंडारण क्षमता
गांव इमलोटा, सांवड़, बौंदकलां, मिसरी, अचीना, पैंतावास कलां, ढाणी फौगाट, झोझूकलां, कादमा, भागवी व बाढड़ा सहित करीब 25 गांव ऐसे हैं, जिनमें पानी भंडारण क्षमता बढ़ाए जाने की जरूरत है। ये बड़े गांव हैं। इनकी आबादी 10 हजार या इससे ज्यादा है।
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- सीमित गांवों में ही हैं बोरिंग ट्यूबवेल
विभाग ने सीमित गांवों में इन जलघरों के समीप बोरिंग ट्यूबवेल लगा रखे हैं। जलघर खाली होने पर टयूबवेल से पेयजल आपूर्ति की जाती है। जिले के 20 से ज्यादा जलघरों में नहरी पानी का विकल्प नहीं होने से पेयजल संकट बना रहता है। इन जलघर परिसरों में ट्यूबवेल बोरिंग करने की जरूरत है। जलघरों में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है जबकि नहरों में गर्मियों में 24 दिन और आम मौसम में 16 दिन में पानी छोड़ा जाता है।
- जल जीवन मिशन योजना के काम की गति धीमी
विभाग ने जिले में जल जीवन मिशन योजना पर कार्य शुरू करवा रखा है। यह काम इस समय धीमी गति से चल रहा है। कई बार पाइप समय पर नहीं पहुंचते तो कभी अन्य बाधाएं आ जाती हैं। लोगों को 70 लीटर प्रति व्यक्ति पानी नहीं मिल पा रहा है।
वर्सन:
गांवों में समय-समय पर जरूरत के अनुसार नए जलघर बनाए जा रहे हैं। जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी डालने के लिए नहरों से अलग से पाइप लाइनें बिछाई गई हैं। जल जीवन मिशन योजना के तहत भी काम हो रहा है।
-सोहनलाल, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो-08
जलघर का पानी भंडारण टैंक। संवाद
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- 12 दिन के अंदर टैंक हो जाते हैं खाली, आबादी दोगुनी होने पर भी भंडारण क्षमता वही की वही
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जनस्वास्थ्य विभाग शहर में तो पेयजल आपूर्ति में विस्तार एवं सुधार की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन गांवों में आबादी बढ़ने पर पेयजल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 25 गांव ऐसे हैं, जिनकी आबादी 10 हजार से ज्यादा है। इन गांवों में बने जलघर परिसर में एक ही भंडारण टैंक है। आबादी के अनुसार भंडारण क्षमता कम है। टैंक 12 से 14 दिन में ही खाली हो जाते हैं। इस समय गांवों में दो से तीन दिन में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, विभाग जल जीवन मिशन योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत पुराने जलघरों की पेयजल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर काम नहीं किया जा रहा है। जिले में पांच नए जलघर जरूर बनाए गए हैं और करीब 65 जलघर हैं, जिनमें से 50 तो 45 साल पुराने हैं, जिनकी भंडारण क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी है।
बता दें कि हर साल आवासीय दायरा बढ़ता जा रहा है। इन अधिकतर जलघरों में एक ही भंडारण टैंक बना हुआ है। अब दो टैंक बनाए जाने की जरूरत है तभी आने वाले समय में पेयजल की किल्लत से निपटा जा सकता है। इन जलघरों में पानी उठान की मोटरें भी कंडम हो चुकी हैं। इनको भी आधुनिक तकनीक की लगाए जाने की जरूरत है। ताकि पानी का प्रेशर बना रहे।
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- इन गांवों में कम है पेयजल भंडारण क्षमता
गांव इमलोटा, सांवड़, बौंदकलां, मिसरी, अचीना, पैंतावास कलां, ढाणी फौगाट, झोझूकलां, कादमा, भागवी व बाढड़ा सहित करीब 25 गांव ऐसे हैं, जिनमें पानी भंडारण क्षमता बढ़ाए जाने की जरूरत है। ये बड़े गांव हैं। इनकी आबादी 10 हजार या इससे ज्यादा है।
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- सीमित गांवों में ही हैं बोरिंग ट्यूबवेल
विभाग ने सीमित गांवों में इन जलघरों के समीप बोरिंग ट्यूबवेल लगा रखे हैं। जलघर खाली होने पर टयूबवेल से पेयजल आपूर्ति की जाती है। जिले के 20 से ज्यादा जलघरों में नहरी पानी का विकल्प नहीं होने से पेयजल संकट बना रहता है। इन जलघर परिसरों में ट्यूबवेल बोरिंग करने की जरूरत है। जलघरों में पानी 10 दिन में ही खत्म हो जाता है जबकि नहरों में गर्मियों में 24 दिन और आम मौसम में 16 दिन में पानी छोड़ा जाता है।
- जल जीवन मिशन योजना के काम की गति धीमी
विभाग ने जिले में जल जीवन मिशन योजना पर कार्य शुरू करवा रखा है। यह काम इस समय धीमी गति से चल रहा है। कई बार पाइप समय पर नहीं पहुंचते तो कभी अन्य बाधाएं आ जाती हैं। लोगों को 70 लीटर प्रति व्यक्ति पानी नहीं मिल पा रहा है।
वर्सन:
गांवों में समय-समय पर जरूरत के अनुसार नए जलघर बनाए जा रहे हैं। जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी डालने के लिए नहरों से अलग से पाइप लाइनें बिछाई गई हैं। जल जीवन मिशन योजना के तहत भी काम हो रहा है।
-सोहनलाल, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो-08
जलघर का पानी भंडारण टैंक। संवाद