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शहर के छोटे पार्क बड़ी उपेक्षा का शिकार...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2022 10:48 PM IST
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The city's small parks are victims of great neglect...
सरस्वती पार्क में टूटा पड़ा झूला। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। शहर में विभिन्न क्षेत्रों में करीब चार से पांच दशक पहले बनाए गए मिनी पार्क लंबे समय से नगर परिषद की उपेक्षा का शिकार हैं। आलम यह है कि किसी पार्क की दो तो किसी की चार साल से सुध नहीं ली गई है। इसके चलते यहां घास सूख चुकी है और हरियाली भी गायब है।
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इतना ही नहीं नगर परिषद अधिकारियों की नजरअंदाजी के चलते इन पार्कों में लगाए झूले व बेंच भी टूटे हुए हैं जबकि घूमने के लिए बनाए गए फुटपाथ भी कंडम हैं। बुधवार को संवाददाता ने चार मिनी पार्कों का जायजा लिया तो ये चौंकाने वाले हालात सामने आए। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी नगर परिषद अधिकारियों से इन पार्कों की दशा सुधारने की मांग की है। शहर के बदहाल मिनी पार्कों पर अमर उजाला की एक विशेष रिपोर्ट...
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जानिये...किस पार्क का क्या है हाल
1- तिकोना पार्क में नही है मुख्य गेट, शराबी छलकाते हैं जाम
ढाणी फाटक आरओबी के पास बना तिकोना पार्क बदहाल है। इस पार्क का गेट नहीं है जबकि घास भी सूख चुकी है। सुविधा के नाम पर यहां लगाए गए बेंच टूटे पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि पार्क में शराब की खाली बोतलें पड़ी हैं और इससे स्पष्ट है कि यहां शराबी बेरोकटोक जाम छलकाते हैं।
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2- सरस्वती पार्क में टूटा पड़े झूले और ट्रैक
पुरानी सब्जी मंडी रोड स्थित सरस्वती पार्क भी बदहाल है। इस पार्क की लंबे समय से सुध नहीं ली गई है। आलम यह है कि पार्क का ट्रैक और झूले टूटे हुए हैं जबकि घास भी सूख चुकी है। इस पार्क से हरियाली गायब है जिसके चलते स्थानीय लोग पांच दशक पहले मिली सौगात का लाभ नहीं उठा पा रहे।
3- मटका पार्क में फैला है कचरा
पुराना बस स्टैंड के पास बने मटका पार्क की हालात देखकर शायद ही कोई इसके पास से गुजरना चाहे। पार्क के चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। वहीं, पार्क के अंदर के हालात तो और भी बुरे हैं। इस पार्क की लंबे समय से सुध नहीं ली गई है। स्थानीय दुकानदारों ने पार्क की दशा सुधारने की मांग की है।
4- मंगल पार्क में नहीं है घास, झूले का पतरा ही गायब
मंगल मार्केट में बने मंगल पार्क देखभाल के अभाव में अपनी आभा खो चुका है। पार्क से हरियाली नदारद है और इसकी दीवारें व ट्रैक भी कंडम है। आलम यह है कि कई साल पहले लगाए गए बेंच भी कंडम हैं। यहां से झूला भी गायब है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि पार्क की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है।
लोग बोले: शराबियों का अड्डा बने हैं मिनी पार्क
- तिकोना पार्क में शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। इनको यहां शराब पीने से रोकने वाला कोई नहीं है। नगर परिषद ने लंबे समय से इस पार्क की सुध नहीं ली है।
-कैलाश जांगड़ा, दुकानदार
- सरस्वती पार्क में झूले लंबे समय से कंडम है। यहां सफाई तो होती है, लेकिन अन्य अव्यवस्थाओं की ओर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। इनके चलते लोग यहां आने से कतराते हैं।
-बिजेंद्र सैनी, रेहड़ी संचालक
- मटका पार्क में सफाई कर्मचारी एक माह में एक बार आकर खानापूर्ति कर चला जाता है। इस पार्क के चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे होने से माहौल दुर्गंधमय बना है और लोग परेशान हैं।

-रविंद्र कुमार, स्थानीय दुकानदार
- मंगल पार्क नगर परिषद की उपेक्षा का शिकार है। यहां से हरियाली गायब है जबकि ट्रैक भी जर्जर है। स्थानीय लोग पहले यहां सैर करने आते थे, लेकिन बदहाली के चलते अब लोग यहां आने से किनारा कर रहे हैं
राजेश, दुकानदार
अपनी टीम के साथ जाकर इन सभी मिनी पार्कों का जायजा लूंगा। यहां जो भी खामियां हैं, उन्हें जल्द दूर करवाने का प्रयास किया जाएगा।
-प्रवीन कुमार, सचिव, नगर परिषद
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