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Charkhi Dadri News: चकबंदी कार्य में कुछ लोगों की ओर विरोध जताने पर किया रोष प्रकट
Tue, 14 Jul 2026 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 14 Jul 2026 11:40 PM IST
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चकबंदी कार्य के सिलसिले में एकत्रित गांव काकड़ौली हठ्ठी के ग्रामीण।
- फोटो : 1
बाढड़ा। गांव काकड़ौली हठ्ठी में चकबंदी कार्य में कुछ लोगों की ओर विरोध जताने पर ग्रामीणों ने रोष प्रकट किया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चकबंदी न होने से रास्ते नहीं रहे। ग्रामीणों ने सीएम नायब सिंह सैनी से मिलकर समस्या का समाधान करवाने की बात कही है।
पूर्व सरपंच अजीत सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राममेहर सिंह, रामकिशन पंच, पृथ्वी सिंह, बलबीर सनसनवाल, रमेश कुमार, सत्यपाल आर्य आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 70 फीसदी जमीन की निशानदेही का कार्य भी पूरा हो गया है। गांव के कुछ लोग जानबूझ कर शामलात या छोटे किसानों की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं और उसका खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। चकबंदी न होने की वजह से गांव से दूसरे गांवों को जाने वाले रास्ते व खेतों के कच्चे रास्ते की सही पहचान व तस्दीक न होने से ग्रामीण आए दिन एक दूसरे से झगड़ा करने पर उतारू रहते हैं जिससे गांव का आपसी भाईचारा बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गत तीन साल से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है जिससे उनको भूमि की खरीद फरोख्त, किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य योजनाओं की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कुछ लोग विरोध कर चकबंदी को सिरे चढ़ने से रोक रहे हैं। ग्रामीणों ने पिछले सप्ताह जिला उपायुक्त मंदीप कौर से भी मुलाकात की थी।
ग्रामीण विजयपाल, शक्ति पहलवान, ओमप्रकाश, संदीप श्योराण ने बताया कि कुछ लोग बेवजह चकबंदी के विरोध में उतर आए हैं। इन लोगों ने ही सरकारी भूमि और अपने हिस्से से अधिक रकबे पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। चकबंदी पूरी होने की स्थिति में उनके कब्जे छूटने की आशंका के कारण वे कार्य को प्रभावित करना चाहते हैं।
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पूर्व सरपंच अजीत सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राममेहर सिंह, रामकिशन पंच, पृथ्वी सिंह, बलबीर सनसनवाल, रमेश कुमार, सत्यपाल आर्य आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 70 फीसदी जमीन की निशानदेही का कार्य भी पूरा हो गया है। गांव के कुछ लोग जानबूझ कर शामलात या छोटे किसानों की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं और उसका खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। चकबंदी न होने की वजह से गांव से दूसरे गांवों को जाने वाले रास्ते व खेतों के कच्चे रास्ते की सही पहचान व तस्दीक न होने से ग्रामीण आए दिन एक दूसरे से झगड़ा करने पर उतारू रहते हैं जिससे गांव का आपसी भाईचारा बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गत तीन साल से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है जिससे उनको भूमि की खरीद फरोख्त, किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य योजनाओं की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कुछ लोग विरोध कर चकबंदी को सिरे चढ़ने से रोक रहे हैं। ग्रामीणों ने पिछले सप्ताह जिला उपायुक्त मंदीप कौर से भी मुलाकात की थी।
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ग्रामीण विजयपाल, शक्ति पहलवान, ओमप्रकाश, संदीप श्योराण ने बताया कि कुछ लोग बेवजह चकबंदी के विरोध में उतर आए हैं। इन लोगों ने ही सरकारी भूमि और अपने हिस्से से अधिक रकबे पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। चकबंदी पूरी होने की स्थिति में उनके कब्जे छूटने की आशंका के कारण वे कार्य को प्रभावित करना चाहते हैं।
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