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Charkhi Dadri News: बूंदाबांदी से नहीं मिली राहत, उमस ने बढ़ाई परेशानी
Thu, 27 Aug 2026 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:07 AM IST
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बूंदाबांदी के बीच घर जाते हुए स्कूली बच्चों व परिजन।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले में बुधवार को दोपहर करीब तीन बजे मौसम ने अचानक करवट ली और करीब आधे घंटे तक बूंदाबांदी हुई। हालांकि बूंदाबांदी इतनी कम रही कि लोगों को गर्मी से कोई खास राहत नहीं मिल सकी। बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से उमस और अधिक परेशान करने लगी।
दिनभर लोग गर्मी और उमस से बेहाल नजर आए। बुधवार को जिले में दिन का अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि रात का न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। दोपहर बाद आसमान में बादल छाने और बूंदाबांदी से लोगों को बारिश तेज होने की उम्मीद जगी थी लेकिन कुछ ही देर में बूंदाबांदी बंद हो गई।
इसके बाद तेज धूप भले ही कुछ समय के लिए कम रही लेकिन उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शहर के बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रही।
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बारिश न होने का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों को इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत है लेकिन जिले में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में किसानों को भूमिगत जल और नहरी पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है। जिन क्षेत्रों में नहरी पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है।
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दिनभर लोग गर्मी और उमस से बेहाल नजर आए। बुधवार को जिले में दिन का अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि रात का न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। दोपहर बाद आसमान में बादल छाने और बूंदाबांदी से लोगों को बारिश तेज होने की उम्मीद जगी थी लेकिन कुछ ही देर में बूंदाबांदी बंद हो गई।
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इसके बाद तेज धूप भले ही कुछ समय के लिए कम रही लेकिन उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शहर के बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रही।
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बारिश न होने का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों को इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत है लेकिन जिले में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में किसानों को भूमिगत जल और नहरी पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है। जिन क्षेत्रों में नहरी पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है।