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पड़ताल: रात 10 बजे के बाद आएं तो नहीं खुलेगा रैन बसेरा का गेट, चरखी दादरी स्टेशन पर ही काटनी पड़ेगी सर्द रात
Sun, 01 Dec 2024 07:39 PM IST
अंकेश ठाकुर
जगदीप सिंह, संवाद, चरखी दादरी
जगदीप सिंह, संवाद, चरखी दादरी
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 01 Dec 2024 07:39 PM IST
सार
हरियाणा के चरखी दादरी में बनाए गए अस्थायी रैन बसेरों में रात 10 बजे के बाद एंट्री नहीं मिलेगी। क्योंकि रात 10 बजे के बाद रैन बसेरे के कर्मचारी जरूरतमंदों को आने से रोक रहे हैं।
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अस्थायी रैन बसेरा में लोगों को रात 10 बजे के बाद शरण नहीं मिल पा रही।
- फोटो : संवाद
विस्तार
रातें सर्द होने लगी हैं और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे चल रहा है। दूसरी ओर शहर में शुरू किए गए अस्थायी रैन बसेरा में लोगों को रात 10 बजे के बाद शरण नहीं मिल पा रही है। इसकी बानगी शनिवार रात संवाददाता की ओर से की गई पड़ताल में देखने को मिली।
रोजगार्डन रैन बसेरा का गेट साढ़े 10 बजे कर्मचारी ने नहीं खोला। खटखटाने पर कर्मचारी बाहर जरूर आया, लेकिन प्रवेश के लिए गेट खोलने से इनकार कर दिया। कर्मचारी से जब इसका कारण पूछा तो उसने तपाक से कहा कि 10 बजे चुके है और इसके बाद गेट नहीं खोलना है। इस नियम तो लेकर जब सवाल किया गया तो कर्मचारी ने कहा कि ऊपर से ही यह आदेश हैं। हालांकि बाद में बातचीत करने पर ईओ राजेश वर्मा ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है और कोई भी नागरिक रात को किसी भी समय रैन बसेरा में शरण ले सकता है।
बता दें कि दादरी शहर में कोई स्थायी रैन बसेरा नहीं है। हर साल रोजगार्डन के एक 10 गुना 10 आकार के कमरे में अस्थायी रैन बसेरा नगर परिषद की ओर से बनाया जाता है। इस बार भी ऐसा ही किया गया है। रैन बसेरा में किए गए प्रबंधों का जायजा लेने के लिए संवाददाता शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे रोजगार्डन पहुंचा।
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तीन मिनट बाद बाहर आया कर्मचारी
रोजगार्डन में पहुंचकर गेट खटखटाया गया तो तीन मिनट बाद कर्मचारी रैन बसेरा से बाहर निकलकर गेट तक पहुंचा। रात बिताने के लिए गेट खोलने की बात कहने पर कर्मचारी ने इंकार कर दिया। उसने कहा कि 10 बजे तक प्रवेश का समय है और इसके बाद गेट न खोलने का आदेश है। इसके बाद आए तो रात रेलवे स्टेशन पर काटनी पड़ेगी। संवाददाता के पास बाकयदा कर्मचारी की ओर से कही गई बातों की वीडियो भी है।
रैन बसेरा में रात को किसी भी समय आकर शरण ली जा सकती है। कर्मचारी ने अगर मना किया है तो गलत है। -राजेश वर्मा, ईओ, नगर परिषद
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रोजगार्डन रैन बसेरा का गेट साढ़े 10 बजे कर्मचारी ने नहीं खोला। खटखटाने पर कर्मचारी बाहर जरूर आया, लेकिन प्रवेश के लिए गेट खोलने से इनकार कर दिया। कर्मचारी से जब इसका कारण पूछा तो उसने तपाक से कहा कि 10 बजे चुके है और इसके बाद गेट नहीं खोलना है। इस नियम तो लेकर जब सवाल किया गया तो कर्मचारी ने कहा कि ऊपर से ही यह आदेश हैं। हालांकि बाद में बातचीत करने पर ईओ राजेश वर्मा ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है और कोई भी नागरिक रात को किसी भी समय रैन बसेरा में शरण ले सकता है।
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बता दें कि दादरी शहर में कोई स्थायी रैन बसेरा नहीं है। हर साल रोजगार्डन के एक 10 गुना 10 आकार के कमरे में अस्थायी रैन बसेरा नगर परिषद की ओर से बनाया जाता है। इस बार भी ऐसा ही किया गया है। रैन बसेरा में किए गए प्रबंधों का जायजा लेने के लिए संवाददाता शनिवार रात करीब साढ़े 10 बजे रोजगार्डन पहुंचा।
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तीन मिनट बाद बाहर आया कर्मचारी
रोजगार्डन में पहुंचकर गेट खटखटाया गया तो तीन मिनट बाद कर्मचारी रैन बसेरा से बाहर निकलकर गेट तक पहुंचा। रात बिताने के लिए गेट खोलने की बात कहने पर कर्मचारी ने इंकार कर दिया। उसने कहा कि 10 बजे तक प्रवेश का समय है और इसके बाद गेट न खोलने का आदेश है। इसके बाद आए तो रात रेलवे स्टेशन पर काटनी पड़ेगी। संवाददाता के पास बाकयदा कर्मचारी की ओर से कही गई बातों की वीडियो भी है।
रैन बसेरा में रात को किसी भी समय आकर शरण ली जा सकती है। कर्मचारी ने अगर मना किया है तो गलत है। -राजेश वर्मा, ईओ, नगर परिषद