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Charkhi Dadri News: राजस्व विभाग तैयार करेगा रोग से सरसों में हुए नुकसान की रिपोर्ट
Thu, 08 Feb 2024 02:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 08 Feb 2024 02:57 AM IST
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चरखी दादरी। पिछले करीब सवा माह से धुंध का प्रकोप बने रहने और धूप न खिलने की वजह से सरसों की फसल में श्वेत रोग से न्यूनतम 25 से अधिकतम 40 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। राजस्व विभाग इसकी सही रिपोर्ट तैयार करेगा।
जिले में सरसों का बीजित रकबा 1.60 लाख एकड़ से ज्यादा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सरसोंं की फसल में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। इस समय सरसों पकाव अवस्था में है। प्रथम चरण में ही इस रोग का उपचार कारगर माना गया है। दूसरे और तीसरे चरण में तो रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर इसे मिट्टी में ही दबाना पड़ता है।
किसानों ने अक्तूबर-नवंबर 23 में सरसों की अगेती बिजाई कर दी थी। अब सरसों के पौधे पर फूल-फल आए हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम एवं तापमान असंतुलित बने रहने पर सरसों की फसल में रोग लगने की आशंका रहती है।
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सरसों में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा रोग बढ़ जाता है। इस रोग में प्रथम स्टेज के दौरान अगर पत्तियों पर सफेद रंग का चूर्ण बना दिखाई देता है तो कीटनाशक दवा का स्प्रे कर देना चाहिए इससे इसका बचाव संभव है।
दूसरी स्टेज मेंं यह रोग तना तक पहुंच जाता है और तीसरी स्टेज में तो पौधे का पूरी तरह से विकास एवं वृद्धि रुक जाती है ऐसी स्थिति में रोगग्रस्त ऐसे पौधों को खेत से जड़ से उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
प्रथम स्टेज में दवा के तौर पर कॉरबिंडाजिम, एंडोफिल कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। 200 एमएल दवा 400 लीटर पानी मेंं मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसी प्रकार इस मौसम में एफिड यानी चेपा की शिकायत भी सरसों में बढ़ जाती है। इसमें हरे रंग का जीव पौधे के पत्तों एवं फलियों पर बैठकर नुकसान पहुंचाता है। पत्तों में छेद कर देता है और पत्तियोंं के रस को खत्म कर देता है।
इसके लिए रोगोर दवा का छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकोंं की किसानों के लिए सलाह है कि बादल छाने पर फसलों में स्प्रे आदि न करें। पछेती फसलों में यह रोग ज्यादा लगने की आशंका होती है।
राय: पत्तियों, फलियों, टहनी की परख करें किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि किसान सरसों की पत्तियां, फलियां, टहनी आदि की अच्छी तरह से परख करें। रोग की शिकायत मिलने पर विशेषज्ञों की सलाह से दवा का छिड़काव करें। सरसों में इस समय न्यूनतम 25, 35 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। किसी क्षेत्र में नुकसान 40 प्रतिशत तक हो सकता है। इसकी रिपोर्ट राजस्व विभाग ही तैयार करेगा।
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जिले में सरसों का बीजित रकबा 1.60 लाख एकड़ से ज्यादा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सरसोंं की फसल में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। इस समय सरसों पकाव अवस्था में है। प्रथम चरण में ही इस रोग का उपचार कारगर माना गया है। दूसरे और तीसरे चरण में तो रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़कर इसे मिट्टी में ही दबाना पड़ता है।
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किसानों ने अक्तूबर-नवंबर 23 में सरसों की अगेती बिजाई कर दी थी। अब सरसों के पौधे पर फूल-फल आए हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम एवं तापमान असंतुलित बने रहने पर सरसों की फसल में रोग लगने की आशंका रहती है।
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सरसों में व्हाइट ट्रस्ट यानी सफेद रतवा रोग बढ़ जाता है। इस रोग में प्रथम स्टेज के दौरान अगर पत्तियों पर सफेद रंग का चूर्ण बना दिखाई देता है तो कीटनाशक दवा का स्प्रे कर देना चाहिए इससे इसका बचाव संभव है।
दूसरी स्टेज मेंं यह रोग तना तक पहुंच जाता है और तीसरी स्टेज में तो पौधे का पूरी तरह से विकास एवं वृद्धि रुक जाती है ऐसी स्थिति में रोगग्रस्त ऐसे पौधों को खेत से जड़ से उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
प्रथम स्टेज में दवा के तौर पर कॉरबिंडाजिम, एंडोफिल कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। 200 एमएल दवा 400 लीटर पानी मेंं मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसी प्रकार इस मौसम में एफिड यानी चेपा की शिकायत भी सरसों में बढ़ जाती है। इसमें हरे रंग का जीव पौधे के पत्तों एवं फलियों पर बैठकर नुकसान पहुंचाता है। पत्तों में छेद कर देता है और पत्तियोंं के रस को खत्म कर देता है।
इसके लिए रोगोर दवा का छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकोंं की किसानों के लिए सलाह है कि बादल छाने पर फसलों में स्प्रे आदि न करें। पछेती फसलों में यह रोग ज्यादा लगने की आशंका होती है।
राय: पत्तियों, फलियों, टहनी की परख करें किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि किसान सरसों की पत्तियां, फलियां, टहनी आदि की अच्छी तरह से परख करें। रोग की शिकायत मिलने पर विशेषज्ञों की सलाह से दवा का छिड़काव करें। सरसों में इस समय न्यूनतम 25, 35 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। किसी क्षेत्र में नुकसान 40 प्रतिशत तक हो सकता है। इसकी रिपोर्ट राजस्व विभाग ही तैयार करेगा।