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नौतपा में जारी है गर्मी का प्रकोप, अधिकतम तापमान रहा 41.9 डिग्री
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नौतपा के चलते जिले में तापमान में बढ़ोतरी हुई है। पांच दिन में अधिकतम तापमान में 4.8 डिग्री का बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 41.9 और न्यूनतम 27.3 डिग्री दर्ज किया गया।
जिले में शनिवार को मौसम में तपिश बनी रही। दिनभर पूर्वी हवाएं चलीं। मौसम में उमस भरी गर्मी बनी रही, जिसका जन जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 30 मई रात से मौमस में बदलाव आने का अनुमान है। दो जून तक गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी होने का अनुमान है। कृषि वैज्ञानिक बलवान सिंह का कहना है कि मई में तापमान इतना नहीं बढ़ा है। ज्येष्ठ मास तपने से धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। गर्मी में खेत की जुताई करके कुछ दिन खाली छोड़ने पर अधिक तापमान से अपशिष्ट पदार्थ निकल जाते हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जीवाणु मर जाते हैं। धरती का पीएच मान भी संतुलित बना रहता है।
पश्चिमी विक्षोभ का दिखा असर : हालांकि इस बार नौतपा में तापमान इतना नहीं बढ़ा है। इस बार अप्रैल मई में तकरीबन हर सप्ताह पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिले। इससे बीच-बीच में बूंदाबांदी व बारिश होती रही। यही वजह रही कि मई इस बार ठंडा रहा। 20- 21 मई को तो ठंड का एहसास होने लगा था। लोगों को पंखे, कूलर व एसी आदि बंद करने पड़े थे। बारिश से काफी नीचे चला गया था।
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जिले में शनिवार को मौसम में तपिश बनी रही। दिनभर पूर्वी हवाएं चलीं। मौसम में उमस भरी गर्मी बनी रही, जिसका जन जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 30 मई रात से मौमस में बदलाव आने का अनुमान है। दो जून तक गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी होने का अनुमान है। कृषि वैज्ञानिक बलवान सिंह का कहना है कि मई में तापमान इतना नहीं बढ़ा है। ज्येष्ठ मास तपने से धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। गर्मी में खेत की जुताई करके कुछ दिन खाली छोड़ने पर अधिक तापमान से अपशिष्ट पदार्थ निकल जाते हैं। फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जीवाणु मर जाते हैं। धरती का पीएच मान भी संतुलित बना रहता है।
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पश्चिमी विक्षोभ का दिखा असर : हालांकि इस बार नौतपा में तापमान इतना नहीं बढ़ा है। इस बार अप्रैल मई में तकरीबन हर सप्ताह पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिले। इससे बीच-बीच में बूंदाबांदी व बारिश होती रही। यही वजह रही कि मई इस बार ठंडा रहा। 20- 21 मई को तो ठंड का एहसास होने लगा था। लोगों को पंखे, कूलर व एसी आदि बंद करने पड़े थे। बारिश से काफी नीचे चला गया था।
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