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लंपी वायरस: गोशाला संचालकों ने उठाई कीड़े मारने की दवा और बीटाडिन मुहैया कराने की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 10:48 PM IST
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Lumpy virus: Gaushala operators raised the demand for providing pesticides
चरखी दादरी। जिले की गोशालाओं में किसी गोवंश के औचक चोटिल या जख्मी हो जाने पर मरहम पट्टी तक का प्रबंध नहीं है। क्षेत्र के गोशाला प्रबंधकों ने सरकार व पशुपालन विभाग से गोशालाओं में बीटाडीन, कीडों की दवा और पट्टी उपलब्ध करवाने की मांग की है। गोशाला संचालकों का कहना है कि पशुपालन विभाग की ओर से उन्हें ये मूलभूत दवाएं भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। वहीं, पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. जसवंत जून का कहना है कि जल्द ही इन दवाओं की खरीद कर गोशाला संचालकों को मुहैया करवा दी जाएंगी।
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क्षेत्र के गोशाला प्रबंधकों की शिकायत है कि गोशालाओं में प्राथमिक उपचार के लिए लाल दवाई, बीटाडीन व कीड़े मारने की दवा सरकार को उपलब्ध करवानी चाहिए। गांव रानीला स्थित श्री बाबा हरिदास गोशाला के प्रधान प्रदीप रानीला ने संवाददाता को बताया कि गोशाला में पशुपालन विभाग की ओर से टीकाकरण तो किया गया है, लेकिन यह सुनियोजित तरीके से नहीं हुआ। पशुपालन विभाग की टीमों ने वैक्सीनेशन के बाद पशु पर कोई निशान नहीं लगाया और न ही वैक्सीन लगाने के बाद पशु को अलग किया गया। ऐसे में गायों के वैक्सीन से वंचित रहने और किसी गोवंश को डबल डोज लगने का भी अंदेशा है। अगर गोवंश की टैगिंग होती या निशान लगाया जाता तो आसानी से ये पता चल जाता कि किन-किन गोवंश को टीका लग चुका है और किनका बाकी है।
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दूसरी ओर जिला में मंगलवार को भी पशु पालन विभाग की टीमों ने गोवंश की निगरानी की। चिकित्सक, एसडीओ व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जसवंत जून स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं ताकि बीमारी का प्रकोप न बढ़ने पाए। जिले की सभी 15 गोशालाओं में विभाग की ओर से फॉगिग का कार्य पूरा करवाया जा चुका है। अबअधिकारियों की मंशा है कि शहर में स्थित दोनो बड़ी गोशालाओं में दोबारा से फॉगिंग करवाई जाए क्योंकि शहर व गांव की जलवायु व वातावरण में थोड़ी भिन्नता होती है। इस पर विभाग विचार कर रहा है लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
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- शुक्रवार तक वैक्सीन की खेप पहुंचने की उम्मीद
अब तक जिले में 4932 वैक्सीन लगाई जा चुकी है लेकिन उसके बाद से टीकाकरण बंद है क्योंकि वैक्सीन खत्म हो चुकी है। विभाग अगले दो- तीन दिन में वैक्सीन पहुंचने की बात कह रहा है। जिला में 38 हजार गोवंश हैं और करीब 40 हजार वैक्सीन की जरूरत है।
गोशाला में प्राथमिक उपचार के लिए दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने गोवंश को टीकाकरण करते समय पहचान के लिए निशान लगाने चाहिए थे। बीटाडीन और कीड़े मारने की दवाओं की हमें अपने स्तर पर खरीद करनी पड़ रही है।

प्रदीप रानीला, प्रधान, श्री बाबा हरिदास गोशाला
जल्द ही गोशालाओं के लिए विभाग द्वारा लाल दवाई व बीटाडीन खरीदी जाएगी। टीकाकरण के दौरान जिस भी गाय को वैक्सीन लगाई गई है उसकी पहचान के लिए टैगिंग की गई है। वैक्सीन का विभाग को पूरा रिकॉर्ड रखना होता है। किसी गाय को डबल डोज नहीं दी गई है। विभाग की पूरी टीम तत्परता से गोवंश को बीमारी मुक्त करने में जुटी है। जल्द ही वैक्सीन आने पर सभी गोवंश को टीकाकरण कर दिया जाएगा।
डॉ. जसवंत जून, डिप्टी डायरेक्टर
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