{"_id":"65ac004c7389e4f114077334","slug":"father-took-out-daughters-banwaara-charkhidadri-news-c-126-1-cdr1001-12421-2024-01-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: दिल की ख्वाहिश पूरी करने के लिए पिता ने घोड़ी पर निकाला बेटी का बनवारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: दिल की ख्वाहिश पूरी करने के लिए पिता ने घोड़ी पर निकाला बेटी का बनवारा
Sat, 20 Jan 2024 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 20 Jan 2024 10:48 PM IST
विज्ञापन
मनुकांत रोहिल्ला
झोझूकलां। गोकल निवासी प्रदीप सैन ने बेटी अजंलि सैन का घोड़ी पर बनवारा निकाला है। प्रदीप के परिवार की यह पहल चर्चा का विषय बनी है। शनिवार को लड़के वालों ने एक रुपये के शगुन से बिना दहेज शादी संपन्न करवाई।
प्रदीप सैन ने बताया कि उनका झोझूकलां में सैलून है। उसके दो बच्चे बेटा-बेटी हैं। उन्होंने बताया कि छोटी बेटी अंजलि बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसका रिश्ता उन्होंने झज्जर जिले के बेरी गांव में तय किया था। प्रदीप ने बताया कि जब वे रिश्ता करके घर लौट रहे थे, उसी दौरान उसने मन में ठान लिया था कि बेटी अंजलि का घोड़ी पर बनवारा निकालेंगे। घर आकर जब अपने दिल की इच्छा पत्नी सिलोचना व बेटी अंजलि के समक्ष रखी तो उन्होंने भी हामीं भर दी। प्रदीप सैन ने बताया कि शुक्रवार रात बेटी का घोड़ी पर बनवारा निकाला गया जबकि शनिवार को गांव में ही एक रुपये के शगुन के साथ शादी संपन्न की गई। प्रदीप ने बताया कि उनका दामाद एक निजी कंपनी में लेखाकार है।
बेटा-बेटी में अंतर न रखने का संदेश देना रहा मकसद
प्रदीप और सिलोचना ने बताया कि उन्होंने कभी बेटा व बेटी में फर्क नहीं किया। अपनी हैसियत के हिसाब से जो सुविधाएं बेटा को दीं, वही सुविधाएं बेटी को भी मुहैया करवाई। उनकी इस पहल का मकसद समाज में बेटा व बेटी के बीच कोई फर्क न करने का संदेश देना रहा। ग्रामीण राजबाला, कविता, सरोज, पूजा, संजय, राहुल, सावन व प्रवीन ने इस पहल को सराहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
झोझूकलां। गोकल निवासी प्रदीप सैन ने बेटी अजंलि सैन का घोड़ी पर बनवारा निकाला है। प्रदीप के परिवार की यह पहल चर्चा का विषय बनी है। शनिवार को लड़के वालों ने एक रुपये के शगुन से बिना दहेज शादी संपन्न करवाई।
प्रदीप सैन ने बताया कि उनका झोझूकलां में सैलून है। उसके दो बच्चे बेटा-बेटी हैं। उन्होंने बताया कि छोटी बेटी अंजलि बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसका रिश्ता उन्होंने झज्जर जिले के बेरी गांव में तय किया था। प्रदीप ने बताया कि जब वे रिश्ता करके घर लौट रहे थे, उसी दौरान उसने मन में ठान लिया था कि बेटी अंजलि का घोड़ी पर बनवारा निकालेंगे। घर आकर जब अपने दिल की इच्छा पत्नी सिलोचना व बेटी अंजलि के समक्ष रखी तो उन्होंने भी हामीं भर दी। प्रदीप सैन ने बताया कि शुक्रवार रात बेटी का घोड़ी पर बनवारा निकाला गया जबकि शनिवार को गांव में ही एक रुपये के शगुन के साथ शादी संपन्न की गई। प्रदीप ने बताया कि उनका दामाद एक निजी कंपनी में लेखाकार है।
विज्ञापन
बेटा-बेटी में अंतर न रखने का संदेश देना रहा मकसद
प्रदीप और सिलोचना ने बताया कि उन्होंने कभी बेटा व बेटी में फर्क नहीं किया। अपनी हैसियत के हिसाब से जो सुविधाएं बेटा को दीं, वही सुविधाएं बेटी को भी मुहैया करवाई। उनकी इस पहल का मकसद समाज में बेटा व बेटी के बीच कोई फर्क न करने का संदेश देना रहा। ग्रामीण राजबाला, कविता, सरोज, पूजा, संजय, राहुल, सावन व प्रवीन ने इस पहल को सराहा है।
विज्ञापन