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ईएनटी न फिजिशियन, कैसे लड़ेंगे कोरोना की चौथी लहर से जंग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2022 11:12 PM IST
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ENT nor Physician, how will fight against the fourth wave of Corona
चरखी दादरी सिविल अस्पताल। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। पिछले कुछ दिनों से देश व प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना के मामला के चलते चौथी लहर की आशंका भी बढ़ गई है। इसके बावजूद जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ी हुई हैं। जिले में न तो ईएनटी है और न ही फिजिशियन। यहां तक की बाल रोग और चर्म विशेषज्ञ का पद तक खाली है। जिला अस्पताल की बात करें तो डॉक्टरों के 50 फीसदी पद खाली हैं।
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जिले में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर शुरू की गई कोरोना जांच लैब पिछले 21 दिनों से बंद है। यहां तैनात 36 कर्मचारियों की विभाग ने एक अप्रैल को छुट्टी कर दी थी और इनमें छह एलटी थी थे। एलटी की कमी के चलते यहां सैंपलों की जांच नहीं हो पा रही है और प्रतिदिन सैंपल रोहतक पीजीआई भेजने पड़ रहे हैं। इसके अलावा अब सैंपलों की संख्या में भी काफी कमी आई है। दूसरी ओर चिकित्सकों व स्टाफ कमी को लेकर डीसी प्रदीप गोदारा का कहना है कि इस संबंध में सरकार को डिमांड भेजी जा चुकी है। जिले में विशेषज्ञों की तैनाती करवाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। इसके अलावा सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी चालू है। सभी बेड पर इंटिग्रेटिड ऑक्सीजन पाइपलाइन सुविधा की व्यवस्था की जा रही है और यह काम अंतिम चरण में हैं। उनका कहना है कि कोरोना की तीन लहर झेल चुके जिले में कई स्वास्थ्य संसाधनों की कमी दूर की जा चुकी है और जो संसाधन नहीं हैं, उनकी व्यवस्था भी जल्द कर दी जाएगी।
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30 साल से नहीं ईएनटी, प्रतिदिन 30 मरीज किए जा रहे रेफर
सिविल अस्पताल में पिछले करीब 30 सालों से ईएनटी नहीं है। गले और कान की बीमारियों के उपचार के लिए प्रतिदिन करीब 120 मरीज सिविल अस्पताल आते हैं। सामान्य बीमारियों का उपचार तो मेडिकल ऑफिसर कर देते हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सिविल अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है। प्रतिदिन करीब 30 मरीज भिवानी सिविल अस्पताल या रोहतक पीजीआई रेफर किए जाते हैं।
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एक लाख बच्चों के लिए नहीं एक भी पीडिट्रिशियन
जिले में एक से 17 साल तक की आयु की आबादी करीब एक लाख है। इनके इलाज के लिए जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। कोरोना की तीन लहरों में 500 से अधिक बच्चे चपेट में आए हैं और इसके बावजूद अब तक विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों की कमी की डिमांड स्वास्थ्य विभाग की मार्फत सरकार को भिजवाई जा चुकी है। चिकित्सीय संसाधनों की कमी को काफी हद तक दूर किया जा चुका है और यह प्रयास अभी भी जारी है। मेरी जिलावासियों से अपील है कि कोरोना से बचाव के लिए सतर्कता बरतें। - प्रदीप गोदारा, डीसी, चरखी दादरी

विशेषज्ञों की कमी के चलते कुछ सेवाएं प्रभावित हैं और हम इस कमी को दूर करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। कोरोना की चौथी लहर को लेकर फिलहाल हमारे पास कोई गाइडलाइन नहीं आई है, लेकिन फिर भी हम तैयारियां कर रहे हैं।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ
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