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Charkhi Dadri News: तीन जिलों की मिट्टी से बने दीयों से दिवाली पर जगमग होगा जिला
Tue, 15 Oct 2024 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 15 Oct 2024 01:10 AM IST
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- दिवाली की तैयारियों में जुटे कुंभकार समाज के लोग, पर्व पर 50 लाख तक का कारोबार होने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दिवाली पर दादरी तीन जिलों की मिट्टी से बने दीयों से जगमग होगा। कुंभकार समाज के लोग दिवाली की तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार उन्हें 50 लाख तक का कारोबार होने की उम्मीद है। फिलहाल, जिले में 300 लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सोमवार को कुंभकार समाज के लोगों से दिवाली की तैयारियों को लेकर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि दीये, कमोई, गुल्लक आदि बनाने की दो माह पहले से ही तैयारियां चल रही हैं। इनमें उनका पूरा परिवार जुटा हुआ है। अब छोटे दुकानदार उनसे थोक में सामान खरीदेंगे। जगह की कमी कारण शहर में केवल चार ही कुंभकार मिट्टी के बर्तन बनाते हैं। अन्य उनसे व रोहतक, झज्जर से खरीदकर लाते हैं। इस बार दादरी के अलावा रोहतक व झज्जर जिला की मिट्टी से करीब पांच लाख दीये तैयार किए जाएंगे।
- दादरी शहर के अलावा यहां बनते हैं दीये
दादरी शहर के अलावा बौंदकलां, कलियाणा, चरखी, घसोला व मंदोला आदि गांव में दीयों के थोक विक्रेता हैं। इसके लिए वे मिट्टी झज्जर, रोहतक के महम व दादरी जिले के कलियाणा गांव से लाते हैं। शहर में जगह न होने के कारण कई लोग प्रस्थान कर चुके हैं। कुछ लोग बाहर से बना हुआ सामान लाकर बेच रहे हैं।
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कुंभकार बोले : पर्व के कारोबार की तैयारियों में जुटा पूरा परिवार
- हर साल दिवाली में 50 हजार दीये बनाते हैं। सारे दीये दादरी शहर में ही बिक जाते हैं। दिवाली पर करीब 60 हजार रुपये का कारोबार होता है। पूरा परिवार इसमें सहयोग करता है।
-रामकुमार, कुंभकार
- दिवाली पर झज्जर से दीये व अन्य सामान लेकर आते हैं। इस बार दिवाली से पांच दिन पहले सामान लाएंगे। बने-बनाए दीये महंगे पड़ते हैं। इसके चलते हमें भी रेट बढ़ाकर बेचने पड़ते हैं।
-रामफल, कुंभकार
- एक माह पहले मूर्ति, दीये, गुल्लक व कमोई का ऑर्डर दे दिया था। अब दो दिन बाद सभी सामान लेकर आएंगे। इस बार एक लाख दीये व अन्य सामान लाया जाएगा। हम दीये कलानौर से लाते हैं।
-लक्ष्मी देवी, कुंभकार
- झज्जर से डेढ़ लाख दीये लेकर आएंगे। फिलहाल, दादरी में मिट्टी के बर्तनों की 25 से 30 दुकानें हैं। मिट्टी की जिले में उचित व्यवस्था नहीं है। फिलहाल दीयों के जिले में 300 विक्रेता हैं।
-उमेद प्रजापत, कुंभकार एवं प्रजापत समाज-21 गांव प्रधान
फोटो- 04
शहर में मिट्टी के दीये बनाते कुंभकार रामकुमार। संवाद
फोटो- 05
छत पर सूखने के लिए रखे गए दीये। संवाद
फोटो-06
दिवाली के लिए घर के बाहर रखे गए दीये। संवाद
फोटो-07
उमेद प्रजापत।
फोटो- 08
रामकुमार।
फोटो 09
रामफल।
फोटो-10
लक्ष्मी देवी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दिवाली पर दादरी तीन जिलों की मिट्टी से बने दीयों से जगमग होगा। कुंभकार समाज के लोग दिवाली की तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार उन्हें 50 लाख तक का कारोबार होने की उम्मीद है। फिलहाल, जिले में 300 लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सोमवार को कुंभकार समाज के लोगों से दिवाली की तैयारियों को लेकर बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि दीये, कमोई, गुल्लक आदि बनाने की दो माह पहले से ही तैयारियां चल रही हैं। इनमें उनका पूरा परिवार जुटा हुआ है। अब छोटे दुकानदार उनसे थोक में सामान खरीदेंगे। जगह की कमी कारण शहर में केवल चार ही कुंभकार मिट्टी के बर्तन बनाते हैं। अन्य उनसे व रोहतक, झज्जर से खरीदकर लाते हैं। इस बार दादरी के अलावा रोहतक व झज्जर जिला की मिट्टी से करीब पांच लाख दीये तैयार किए जाएंगे।
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- दादरी शहर के अलावा यहां बनते हैं दीये
दादरी शहर के अलावा बौंदकलां, कलियाणा, चरखी, घसोला व मंदोला आदि गांव में दीयों के थोक विक्रेता हैं। इसके लिए वे मिट्टी झज्जर, रोहतक के महम व दादरी जिले के कलियाणा गांव से लाते हैं। शहर में जगह न होने के कारण कई लोग प्रस्थान कर चुके हैं। कुछ लोग बाहर से बना हुआ सामान लाकर बेच रहे हैं।
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कुंभकार बोले : पर्व के कारोबार की तैयारियों में जुटा पूरा परिवार
- हर साल दिवाली में 50 हजार दीये बनाते हैं। सारे दीये दादरी शहर में ही बिक जाते हैं। दिवाली पर करीब 60 हजार रुपये का कारोबार होता है। पूरा परिवार इसमें सहयोग करता है।
-रामकुमार, कुंभकार
- दिवाली पर झज्जर से दीये व अन्य सामान लेकर आते हैं। इस बार दिवाली से पांच दिन पहले सामान लाएंगे। बने-बनाए दीये महंगे पड़ते हैं। इसके चलते हमें भी रेट बढ़ाकर बेचने पड़ते हैं।
-रामफल, कुंभकार
- एक माह पहले मूर्ति, दीये, गुल्लक व कमोई का ऑर्डर दे दिया था। अब दो दिन बाद सभी सामान लेकर आएंगे। इस बार एक लाख दीये व अन्य सामान लाया जाएगा। हम दीये कलानौर से लाते हैं।
-लक्ष्मी देवी, कुंभकार
- झज्जर से डेढ़ लाख दीये लेकर आएंगे। फिलहाल, दादरी में मिट्टी के बर्तनों की 25 से 30 दुकानें हैं। मिट्टी की जिले में उचित व्यवस्था नहीं है। फिलहाल दीयों के जिले में 300 विक्रेता हैं।
-उमेद प्रजापत, कुंभकार एवं प्रजापत समाज-21 गांव प्रधान
फोटो- 04
शहर में मिट्टी के दीये बनाते कुंभकार रामकुमार। संवाद
फोटो- 05
छत पर सूखने के लिए रखे गए दीये। संवाद
फोटो-06
दिवाली के लिए घर के बाहर रखे गए दीये। संवाद
फोटो-07
उमेद प्रजापत।
फोटो- 08
रामकुमार।
फोटो 09
रामफल।
फोटो-10
लक्ष्मी देवी।