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Charkhi Dadri News: बीपीएचयू का निर्माण अटका, स्वास्थ्य ने वन विभाग का भेजा रिमाइंडर
Mon, 24 Feb 2025 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:02 AM IST
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झोझूकलां का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
चरखी दादरी। पेड़ काटने की मंजूरी न मिलने से झोझूकलां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) परियोजना लंबित है। सीएचसी में इसके निर्माण पर 50 लाख रुपये का बजट खर्च होना है। यह काम शुरू कराने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग को वन विभाग की स्वीकृति का इंतजार है। यह परियोजना लटकने से करीब 20,000 की आबादी इस सुविधा से वंचित है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने वन विभाग को अनुस्मारक (रिमाइंडर) भेजा है।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो सीएचसी में बीपीएचयू बनाने की योजना तैयार की थी। दोनों सीएचसी में बीपीएचयू के निर्माण पर एक करोड़ रुपये लागत आएगी। इससे करीब 40,000 की आबादी को फायदा होगा। वहीं, बौंदकलां के सीएचसी में बीपीएचयू का निर्माण जारी है जबकि झोझूकलां के सीएचसी में काम शुरू नहीं हो पाया है। इसका कारण सीएचसी में बीपीएचयू निर्माण के लिए चिह्नित जगह पर दो पेड़ खड़े होना है। उनके कटने के बाद ही निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो सकेगा।
पेड़ों को काटने की मंजूरी वन विभाग से लेने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने करीब चार माह पहले पत्राचार किया था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजा गया है। इसके बावजूद पेड़ काटने की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अनुमति मिलने के बाद ही यह निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
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- रोजाना 200 रहती है दोनों केंद्रों की ओपीडी
झोझूकलां और बौंदकलां के सीएचसी पर रोजाना 200 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। पीएचसी स्तर से ऊपर की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए मरीजों को सीएचसी तक आना पड़ता है। दोनों सीएचसी में बीपीएचयू बनने का लाभ करीब 30 से अधिक गांवों के मरीजों को मिलेगा।
- अतिरिक्त लैब और स्टाफ की तैनाती का मिलेगा लाभ
सीएचसी में खुलने वाली बीपीएचयू में बाकायदा लैब भी बनेगी। यहां सीएचसी के अलावा अन्य स्टाफ भी तैनात किया जाएगा। लैब में मरीज सभी प्रकार की जांच करवा सकेंगे। सीएचसी में इलाज या जांच कराने के लिए पहुंचने वाले लोगों को बारी आने तक लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। मरीज न होने पर आपातकालीन केस में भी सीएचसी स्टाफ का बीपीएचयू स्टाफ सहयोग करेगा।
झोझूकलां के सीएचसी में बीपीएचयू निर्माण के लिए चयनित स्थल पर खड़े पेड़ों को काटने की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। हाल ही में हमने वन विभाग को रिमाइंडर भेजा है। इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिलते ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। - डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग, चरखी दादरी।
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ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो सीएचसी में बीपीएचयू बनाने की योजना तैयार की थी। दोनों सीएचसी में बीपीएचयू के निर्माण पर एक करोड़ रुपये लागत आएगी। इससे करीब 40,000 की आबादी को फायदा होगा। वहीं, बौंदकलां के सीएचसी में बीपीएचयू का निर्माण जारी है जबकि झोझूकलां के सीएचसी में काम शुरू नहीं हो पाया है। इसका कारण सीएचसी में बीपीएचयू निर्माण के लिए चिह्नित जगह पर दो पेड़ खड़े होना है। उनके कटने के बाद ही निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो सकेगा।
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पेड़ों को काटने की मंजूरी वन विभाग से लेने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने करीब चार माह पहले पत्राचार किया था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजा गया है। इसके बावजूद पेड़ काटने की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अनुमति मिलने के बाद ही यह निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
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- रोजाना 200 रहती है दोनों केंद्रों की ओपीडी
झोझूकलां और बौंदकलां के सीएचसी पर रोजाना 200 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। पीएचसी स्तर से ऊपर की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए मरीजों को सीएचसी तक आना पड़ता है। दोनों सीएचसी में बीपीएचयू बनने का लाभ करीब 30 से अधिक गांवों के मरीजों को मिलेगा।
- अतिरिक्त लैब और स्टाफ की तैनाती का मिलेगा लाभ
सीएचसी में खुलने वाली बीपीएचयू में बाकायदा लैब भी बनेगी। यहां सीएचसी के अलावा अन्य स्टाफ भी तैनात किया जाएगा। लैब में मरीज सभी प्रकार की जांच करवा सकेंगे। सीएचसी में इलाज या जांच कराने के लिए पहुंचने वाले लोगों को बारी आने तक लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। मरीज न होने पर आपातकालीन केस में भी सीएचसी स्टाफ का बीपीएचयू स्टाफ सहयोग करेगा।
झोझूकलां के सीएचसी में बीपीएचयू निर्माण के लिए चयनित स्थल पर खड़े पेड़ों को काटने की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। हाल ही में हमने वन विभाग को रिमाइंडर भेजा है। इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिलते ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। - डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग, चरखी दादरी।