{"_id":"6a1738230526b0e31f048b98","slug":"cleaning-of-drains-begins-before-monsoon-target-to-complete-the-work-by-june-15-charkhi-dadri-news-c-126-1-shsr1012-155811-2026-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: मानसून से पहले ड्रेनों की सफाई शुरू 15 जून तक काम पूरा करने का लक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: मानसून से पहले ड्रेनों की सफाई शुरू 15 जून तक काम पूरा करने का लक्ष्य
Wed, 27 May 2026 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 27 May 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
: ड्रेन की मशीन से सफाई करते हुए। संवाद
आगामी मानसून सीजन को देखते हुए जिले में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बारिश के दौरान गांवों व खेतों में पानी जमा न हो, इसके लिए जिले की ड्रेनों की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। विभाग का लक्ष्य 15 जून तक सभी ड्रेनों की सफाई पूरी करने का है, ताकि मानसून आने से पहले पानी निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त हो सके।
मौसम विभाग की ओर से इस बार मानसून सीजन में सामान्य से करीब 96 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में प्रशासन और सिंचाई विभाग पहले से ही सतर्कता बरत रहे हैं। मानसून सीजन शुरू होने में अब लगभग एक माह का समय शेष है और इसी को ध्यान में रखते हुए जल निकासी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
जिले में कुल 16 ड्रेन हैं, जबकि पानी निकासी और सिंचाई व्यवस्था के लिए करीब 70 कैनाल, डिस्ट्रीब्यूट्री, माइनर और सब माइनर मौजूद हैं। इनमें मेन लोहारू कैनाल सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसकी पानी वहन क्षमता अन्य नहरों की तुलना में अधिक है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटरी से माइनर और सब माइनर निकाली गई हैं। विशेष रूप से रेतीले क्षेत्रों में अधिक माइनर बनाई गई हैं ताकि टेल तक पानी की आपूर्ति सुचारू रह सके।
विज्ञापन
ड्रेनों में समय के साथ मिट्टी जमने, घास उगने और झाड़ियां बनने से पानी का बहाव प्रभावित होने लगता है। इससे बारिश के दौरान पानी निकासी बाधित होती है और जलभराव की स्थिति बन जाती है। विभाग का कहना है कि सफाई होने के बाद ड्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और बारिश का पानी तेजी से निकाला जा सकेगा। मानसून सीजन के दौरान अतिरिक्त पानी को नहरों और माइनरों में छोड़ा जाता है।
-- -- -- -- -- --
4 हजार एकड़ में होता है जलभराव
कई बार लगातार बारिश होने पर नहरों में भी पानी का दबाव बढ़ जाता है और ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। जिले में हर वर्ष लगभग चार हजार एकड़ क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ जाता है, जिससे खरीफ फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है। संभावित बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए सिंचाई विभाग की मैकेनिकल शाखा ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
-- -- -- -- -- -- -
140 मोबाइल तो 19 डीजल पंप लगाए जाएंगे
विभाग की ओर से 140 मोबाइल पंप, 19 डीजल पंप और 125 वर्टिकल पंप सेट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी निकासी की जा सके। जिले में जलभराव की काफी पुरानी समस्या है। पिछले सीजन के दौरान भी कई जगहों पर जलभराव की समस्या सामने आई थी। ऐसे में विभाग की ओर से अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
-- -- -- -- -- -- -
15 जून तक ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली जाएगी। विभाग मानसून को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर रहा है और जलभराव की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
- सतेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
मौसम विभाग की ओर से इस बार मानसून सीजन में सामान्य से करीब 96 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में प्रशासन और सिंचाई विभाग पहले से ही सतर्कता बरत रहे हैं। मानसून सीजन शुरू होने में अब लगभग एक माह का समय शेष है और इसी को ध्यान में रखते हुए जल निकासी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में कुल 16 ड्रेन हैं, जबकि पानी निकासी और सिंचाई व्यवस्था के लिए करीब 70 कैनाल, डिस्ट्रीब्यूट्री, माइनर और सब माइनर मौजूद हैं। इनमें मेन लोहारू कैनाल सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसकी पानी वहन क्षमता अन्य नहरों की तुलना में अधिक है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटरी से माइनर और सब माइनर निकाली गई हैं। विशेष रूप से रेतीले क्षेत्रों में अधिक माइनर बनाई गई हैं ताकि टेल तक पानी की आपूर्ति सुचारू रह सके।
विज्ञापन
ड्रेनों में समय के साथ मिट्टी जमने, घास उगने और झाड़ियां बनने से पानी का बहाव प्रभावित होने लगता है। इससे बारिश के दौरान पानी निकासी बाधित होती है और जलभराव की स्थिति बन जाती है। विभाग का कहना है कि सफाई होने के बाद ड्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और बारिश का पानी तेजी से निकाला जा सकेगा। मानसून सीजन के दौरान अतिरिक्त पानी को नहरों और माइनरों में छोड़ा जाता है।
4 हजार एकड़ में होता है जलभराव
कई बार लगातार बारिश होने पर नहरों में भी पानी का दबाव बढ़ जाता है और ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। जिले में हर वर्ष लगभग चार हजार एकड़ क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ जाता है, जिससे खरीफ फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है। संभावित बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए सिंचाई विभाग की मैकेनिकल शाखा ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
140 मोबाइल तो 19 डीजल पंप लगाए जाएंगे
विभाग की ओर से 140 मोबाइल पंप, 19 डीजल पंप और 125 वर्टिकल पंप सेट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी निकासी की जा सके। जिले में जलभराव की काफी पुरानी समस्या है। पिछले सीजन के दौरान भी कई जगहों पर जलभराव की समस्या सामने आई थी। ऐसे में विभाग की ओर से अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
15 जून तक ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली जाएगी। विभाग मानसून को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर रहा है और जलभराव की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
- सतेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग