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नारी आध्यात्मिक क्रांति की अग्रदूत थीं मातेश्वरी जगदंबा : बीके प्रेमलता

Wed, 25 Jun 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 25 Jun 2025 01:01 AM IST
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Brahamkumari's in charkhidadri
ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में मातेश्वरी जगदंबा को नमन करते लोग।
चरखी दादरी। ब्रह्माकुमारीज संस्था की वैश्विक स्तर पर जो पहचान बनी है, उसकी नींव मातेश्वरी जगदंबा ने अपने त्याग, तपस्या और सेवा से रखी थी। यह उद्गार दादरी ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र प्रभारी बीके प्रेमलता ने व्यक्त किए। संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा के पुण्य स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अम्मा से जुड़े कई प्रसंग सुनाए।
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बीके वसुधा ने कहा कि मातेश्वरी जगदंबा ने नारी जागरण की आध्यात्मिक क्रांति दूत बनकर नारियों के लिए जीवन मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। सदियों से नारियों के मानसिक बंधनों की बेड़ियों को तोड़कर सशक्त और सुदृढ़ नारी जीवन का उदाहरण समाज के आगे प्रस्तुत किया।
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ब्रह्माकुमारी प्रियंका ने कहा कि बचपन में मातेश्वरी जगदंबा का नाम राधे था। बाद में वे अम्मा नाम से प्रसिद्ध हुईं। जब वे ओम की ध्वनि का उच्चारण करती थीं तो सभी ध्यान में मग्न हो जाते थे। इस मौके पर बीके पूजा भी मौजूद रहीं।
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अध्यात्म के बल पर अम्मा ने महिलाओं को बनाया सशक्त : बीके वसुधा
कादमा। मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती ने आध्यात्मिक मूल्यों से नशामुक्त दिव्य समाज का निर्माण कर वसुधैव कुटुंबकम का पाठ पढ़ाया। वास्तव में जगदंबा आधुनिक युग की चैतन्य देवी थीं। उन्हें ईश्वरीय ज्ञान, गुण और शक्तियों को धारण करके लोगों को अनुभव कराने का दिव्य वरदान प्राप्त था।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा में मंगलवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में सेवाकेंद्र प्रभारी बीके वसुधा ने यह उद्गार व्यक्त किए। यह कार्यक्रम मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती के 60वें स्मृति दिवस पर आयोजित किया गया।
इसमें बीके वसुधा ने कहा कि मातेश्वरी ने 24 जून 1965 को अपने नश्वर देह का त्याग करके संपूर्णता को प्राप्त किया। तभी से ब्रह्माकुमारी संस्थान इस दिवस को आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाता है।



मां जगदंबा का योगदान बताते हुए ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि अम्मा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम प्रशासिका थीं। वह बचपन से अनेक कलाओं से भरपूर थीं। अध्यात्म के बल पर उन्होंने कन्याओं और माताओं को सशक्त बनाया।

वसुधा ने कहा कि सभी लोग मातेश्वरी को प्यार से मम्मा कहते थे क्योंकि उनके चेहरे और चलन से मां की ममता स्वतः झलकती थी। मातेश्वरी ने पवित्रता और दिव्यता की मूर्ति बन समाज में आध्यात्मिक, मानवीय मूल्यों का पाठ पढ़ाया।




इस अवसर पर झोझूकलां सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति, रामबास सरपंच प्रतिनिधि अशोक शर्मा, पूर्व मुख्य अध्यापक विनोद सांगवान, ग्रामीण विकास मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र यादव, सचिव सुनील कुमार, रामकुमार, नाथूराम यादव, शुभराम और ईश्वर सिंह आदि मौजूद रहे।
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