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प्रशासन लाचार: खेतों में भरने वाले पानी को नहरों की बजाय ड्रेन में डालने का नहीं प्रबंध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 10:00 PM IST
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Administration helpless: There is no arrangement to put the water filled in the fields in drains instead of canals
गत मानसून सीजन में इमलोटा के खेतों में भरा पानी। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। प्रशासन की ओर से हर साल बारिश सीजन में खेतों में जलभराव के दूषित पानी का उठान कर नहरों में डाल दिया जाता है। मानसून सीजन तीन माह तक चलता है। खेतों का यह पानी नहरों के जरिये पहले जल घरों और फिर घरों तक पहुंचता है। इस साल ऐसा न हो इसके लिए किसान संगठनों और जिले के मौजिज लोगों ने इसे ड्रेन में डलवाने की मांग की है। क्योंकि खेतों में भरने वाला पानी खाद और कीटनाशक स्प्रे मिक्स होने से पीने लायक नहीं रहता।
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मानसून सीजन के दौरान जिले में तीन माह तक पेयजल संकट बना रहता है। क्षेत्र के विभिन्न संगठनों ने प्रशासन व सरकार से बारिश सीजन में खेतों के पानी की निकासी के लिए स्पेशल ड्रेनों का चयन करने की अपील की है ताकि खेतों का पानी इन स्पेशल ड्रेनों में ही डाला जाए और लोगों को शुद्ध नहरी पानी मिल सके।
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पिछले साल तीन माह तक खेतों से जलभराव के पानी का उठान कर नहरों में डाला गया था। नहरों से यह पानी जल घरों में पहुंचा, जिससे पेयजल की गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित हुई। मेन लोहारु कैनाल व बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में लगातार तीन माह तक खेतों से बरसाती पानी उठाकर डाला गया, जिसका किसान संगठनों ने पुरजोर विरोध किया। इतना ही नहीं, इस संबंध में डीसी समेत सरकार के पास शिकायत भी की गई थी।
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इन गांवों के खेतों में होता है जलभराव
लोहारु कैनाल पर पड़ने वाले गांव बिरहीं कलां, चरखी, पांडवान, साहुवास, घिकाड़ा, अचीना, झिंझर, खातीवास, जयश्री व रावलधी आदि में खेतों में जलभराव होता है। इस पानी का उठान कर नहरों में डाल दिया जाता है। इसी प्रकार बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी के तहत गांव भागवी, मोरवाला, कंहेटी, सरूपगढ़, समसपुर, इमलोटा आदि गांवों में भी जलभराव हर साल होता है। इस क्षेत्र के खेतों का पानी बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में डाला जाता है। खेतों में उस धान रोपाई से पानी का रंग भी पीला एवं हल्का काला हो जाता है। पानी में दुर्गंध बन जाती है। जलघरों में यह पानी पहुंचने से पेयजल की गुणवत्ता खत्म हो जाती है।
किसान बोले - खेतों का पानी नहरों में न डालें अधिकारी
किसान टेकराम, चंद्र सिंह व सत्ते का कहना है कि खेतों से पानी का उठान कर नहरों में नहीं डालना चाहिए। नहरों से यह पानी जलघरों में पहुंचता है जबकि खेतों में भरने वाला पानी पीने योग्य नहीं रहता। खेतों के पानी को डालने के लिए स्पेशल कुछ ड्रेनों का चयन करना चाहिए। नहरों में साफ पानी ही बहना चाहिए, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिले।
नियमों के खिलाफ है खेतों का पानी नहरों में डालना, कार्रवाई का भी प्रावधान : एडवोकेट संजीव
गत मानसून सीजन में इस लापरवाही को लेकर मैंने शिकायत भी की थी। जिसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से पत्र जारी कर नहरों में खेतों का या दूषित पानी न डालने के निर्देश दिए गए थे। खेतों में भरा बारिश का पानी नहरों में निकालना सिंचाई विभाग के अलावा एनजीटी के नियमों के खिलाफ है। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

- संजीव तक्षक, एडवोकेट।
कीटनाशक स्प्रे का पानी स्वास्थ्य के लिए घातक : डिप्टी सीएमओ
खेतों में खाद के अलावा कीटनाशक दवाओं का स्प्रे होता है। ऐसा पानी जहर के समान है और इसका प्रयोग पीने में कतई नहीं करना चाहिए। इससे पेट की बीमारियों समेत लीवर खराब होने व चर्म रोग का खतरा रहता है।
- डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ।
बारिश सीजन में खेतों से पानी का उठान कर इसे नहरों के बजाय अलग से विशेष सीवर ड्रेनों में डालना चाहिए। इसके लिए प्रदेश स्तर पर काम करने की जरूरत है।
- जगबीर घसोला, भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति।
अन्य जिलों में खेतों का बरसाती पानी ड्रेन में डालने की व्यवस्था है जबकि चरखी दादरी में ऐसी कोई स्पेशल ड्रेन का विकल्प नहीं है।
- सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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