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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Use of fuel made from stubble is mandatory in brick kilns in eight non NCR districts

Chandigarh-Haryana News: गैर एनसीआर के आठ जिलों के ईंट भट्ठों में पराली से बने ईंधन का इस्तेमाल अनिवार्य

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एक नवंबर से करना होगा इस्तेमाल, 15 दिन में जारी होगी एसओपी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में एनसीआर से बाहर के आठ जिलों के ईंट भट्ठों में ईंधन के लिए पराली आधारित बायोमास पेलेट का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें अंबाला, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, सिरसा और यमुनानगर शामिल हैं। इन जिलों में करीब 800 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं, जिनमें एक नवंबर से न्यूनतम 20 फीसदी सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। एनसीआर में शामिल 14 जिलों में पहले से पराली से बने ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बीते सप्ताह इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसके बाद वीरवार को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने निर्देश जारी कर दिया। बायोमास पेलेट एक प्रकार का ठोस ईंधन है, जो लकड़ी, कृषि अवशेषों और अन्य चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है।
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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने बताया कि गैर एनसीआर क्षेत्रों में सभी ईंट भट्ठों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के कुल 50 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी साल पहली नवंबर से न्यूनतम 20 प्रतिशत, एक नवंबर 2026 से 30 प्रतिशत, एक नवंबर 2027 से 40 प्रतिशत और एक नवंबर 2028 से न्यूनतम 50 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि कार्यान्वयन के लिए 15 दिनों में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी जाएगी।
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85.50 लाख मीट्रिक टन पराली होने की उम्मीद
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने वीरवार को हरियाणा में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पर्यावरण से जुड़े विभिन्न निर्देशों के कार्यान्वयन को लेकर बैठक की अध्यक्षता की। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि धान की खेती के तहत कुल 41.37 लाख एकड़ में से लगभग 85.50 लाख मीट्रिक टन पराली उत्पन्न होने की उम्मीद है। 22.63 लाख एकड़ में बासमती और 18.74 लाख एकड़ में गैर-बासमती की खेती की जा रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा-एनसीआर में सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल प्रदूषण को कम करने के लिए विस्तृत रणनीति की जानकारी दी गई।

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धूल से निपटने के लिए सड़कों के किनारे होंगे पक्के

मुख्य सचिव रस्तोगी ने कहा कि धूल से निपटने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में फुटपाथ के पुनर्विकास, बीच की पट्टियों और ट्रैफिक चौराहों को हरा-भरा करने, सड़क के किनारों को पक्का करने, निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) मलबे के उचित निपटान और प्रबंधन के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में ऑटो रिक्शा समेत सार्वजनिक परिवहन बेड़े को इलेक्ट्रिक या स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों में परिवर्तित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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