{"_id":"692a09c7b003182b67032924","slug":"those-who-have-got-the-paperless-registry-done-will-now-be-able-to-transfer-automatically-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1095-883085-2025-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेपरलेस रजिस्ट्री करवाने वालों के अब स्वत: हो सकेंगे इंतकाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेपरलेस रजिस्ट्री करवाने वालों के अब स्वत: हो सकेंगे इंतकाल
विज्ञापन
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश में पेपरलेस रजिस्ट्री के बेहतर परिणाम आने के बाद राजस्व विभाग ने अब आम लोगों को राहत देने के लिए इंतकाल के लंबित मामलों को निस्तारित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना पर दो चरणों में काम होगा। पहले चरण में सभी लंबित इंतकाल तुरंत किए जाएंगे। दूसरे चरण में पेपरलेस रजिस्ट्री कराने वालों के स्वत: (ऑटोमेटेड) इंतकाल होंगे। अभी तक प्रदेश में करीब 2.18 लाख इंतकाल लंबित चल रहे हैं।
राजस्व एवं आपदा विभाग के अनुसार प्रदेश के सभी 22 जिलों में कुल 7104 गांव हैं। फरीदाबाद में सर्वाधिक 33 हजार 922 इंतकाल के मामले लंबित हैं। पलवल में 25 हजार 837, अंबाला में 13 हजार 562, पानीपत में इंतकाल के 12 हजार 399 मामले अभी लंबित हैं। राजस्व विभाग ने इन लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए इनके निस्तारण की योजना तैयार की है। पहले चरण में जिनके इंतकाल (म्युटेशन) नहीं हुए हैं उन्हें नोटिस भेजकर तुरंत इंतकाल कराने के लिए कहा जाएगा। दरअसल इंतकाल न होने पर फर्जीवाड़ा करके अवैध तरीके से किसी संपत्ति या जमीन की बिक्री हो सकती है।
हरियाणा भूमि रिकाॅर्ड के महानिदेशक डाॅ. यशपाल का कहना है कि भविष्य में पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद स्वत: ही इंतकाल की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इंतकाल संपत्ति के मालिक के नाम एक सप्ताह के अंदर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना को मंजूरी मिलते ही पहले चरण पर काम शुरू करते हुए इंतकाल न कराने वालों को नोटिस भेजने की शुरुआत कर देंगे।
विज्ञापन
-- -- -- -
इंतकाल कराने में आता है 350 रुपये का खर्च
हरियाणा में इंतकाल कराने की प्रक्रिया को ऑटोमेटेड सिस्टम से जोड़ने के लिए काफी जटिल प्रक्रिया होगी। राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार फिलहाल रजिस्ट्री के 10 दिनों के बाद इंतकाल का नियम है। एक इंतकाल पर 350 रुपये का खर्चा आता है जिसमें 250 रुपये राजस्व विभाग का शुल्क है और 100 रुपये का शुल्क एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना केंद्र) का होता है।
इंतकाल होने से फर्जीवाड़ों पर लगती है रोक
कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनकी खरीद-फरोख्त के कारण रजिस्ट्री के बाद रजिस्ट्री होती रहीं हैं लेकिन लोग इंतकाल नहीं कराते। इंतकाल होने से किस खतरा नंबर से कितनी जमीन की बिक्री हुई यह दर्ज होता है। इंतकाल के बाद जमाबंदी पर पुराने संपत्ति मालिक के बजाय खरीदने वाले नए व्यक्ति का नाम राजस्व के ब्योरे में दर्ज हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद कोई भी व्यक्ति आपकी जमीन धोखे से या फर्जीवाड़ा करके नहीं बेच सकता।
विज्ञापन
चंडीगढ़। प्रदेश में पेपरलेस रजिस्ट्री के बेहतर परिणाम आने के बाद राजस्व विभाग ने अब आम लोगों को राहत देने के लिए इंतकाल के लंबित मामलों को निस्तारित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना पर दो चरणों में काम होगा। पहले चरण में सभी लंबित इंतकाल तुरंत किए जाएंगे। दूसरे चरण में पेपरलेस रजिस्ट्री कराने वालों के स्वत: (ऑटोमेटेड) इंतकाल होंगे। अभी तक प्रदेश में करीब 2.18 लाख इंतकाल लंबित चल रहे हैं।
राजस्व एवं आपदा विभाग के अनुसार प्रदेश के सभी 22 जिलों में कुल 7104 गांव हैं। फरीदाबाद में सर्वाधिक 33 हजार 922 इंतकाल के मामले लंबित हैं। पलवल में 25 हजार 837, अंबाला में 13 हजार 562, पानीपत में इंतकाल के 12 हजार 399 मामले अभी लंबित हैं। राजस्व विभाग ने इन लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए इनके निस्तारण की योजना तैयार की है। पहले चरण में जिनके इंतकाल (म्युटेशन) नहीं हुए हैं उन्हें नोटिस भेजकर तुरंत इंतकाल कराने के लिए कहा जाएगा। दरअसल इंतकाल न होने पर फर्जीवाड़ा करके अवैध तरीके से किसी संपत्ति या जमीन की बिक्री हो सकती है।
विज्ञापन
हरियाणा भूमि रिकाॅर्ड के महानिदेशक डाॅ. यशपाल का कहना है कि भविष्य में पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद स्वत: ही इंतकाल की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इंतकाल संपत्ति के मालिक के नाम एक सप्ताह के अंदर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना को मंजूरी मिलते ही पहले चरण पर काम शुरू करते हुए इंतकाल न कराने वालों को नोटिस भेजने की शुरुआत कर देंगे।
विज्ञापन
इंतकाल कराने में आता है 350 रुपये का खर्च
हरियाणा में इंतकाल कराने की प्रक्रिया को ऑटोमेटेड सिस्टम से जोड़ने के लिए काफी जटिल प्रक्रिया होगी। राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार फिलहाल रजिस्ट्री के 10 दिनों के बाद इंतकाल का नियम है। एक इंतकाल पर 350 रुपये का खर्चा आता है जिसमें 250 रुपये राजस्व विभाग का शुल्क है और 100 रुपये का शुल्क एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना केंद्र) का होता है।
इंतकाल होने से फर्जीवाड़ों पर लगती है रोक
कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनकी खरीद-फरोख्त के कारण रजिस्ट्री के बाद रजिस्ट्री होती रहीं हैं लेकिन लोग इंतकाल नहीं कराते। इंतकाल होने से किस खतरा नंबर से कितनी जमीन की बिक्री हुई यह दर्ज होता है। इंतकाल के बाद जमाबंदी पर पुराने संपत्ति मालिक के बजाय खरीदने वाले नए व्यक्ति का नाम राजस्व के ब्योरे में दर्ज हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद कोई भी व्यक्ति आपकी जमीन धोखे से या फर्जीवाड़ा करके नहीं बेच सकता।