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Chandigarh-Haryana News: एचएसवीपी में हुआ घोटाला 225 करोड़ तक पहुंचा
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खास लोगों के खातों में ट्रांसफर हुए 160 करोड़, पूर्व विधायक तक पहुंचता था पैसा
कई बिल्डर ईडी के रडार पर, जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
चंडीगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में हुए 72 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद 225 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। ईडी की ओर से पंचकूला कोर्ट में दायर रिमांड पत्र के अनुसार सुरजाखेड़ा को खुद के और पत्नी (मंजीत) सहित परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में घोटाले की रकम प्राप्त की। इसके अलावा सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल ने बलविंदर सिंह, हरिंदर पाल सिंह आदि से सीधे नकदी प्राप्त की। इस मामले में एचएसवीपी के पूर्व अधिकारी सुनील कुमार बंसल और पूर्व विधायक रामनिवास सुरजखेड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब कई बिल्डर भी ईडी के रडार पर हैं, जिनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
2015 से 2019 के बीच जब फर्जीवाड़ा हुआ, तब रामनिवास सुरजाखेड़ा 2017 तक और सुनील कुमार बंसल 2019 तक एचएसवीपी में क्रमश: अकाउंट असिस्टेंट और सीनियर अकाउंट ऑफिसर पद पर कार्यरत थे। ईडी ने लगभग 10 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इन्हीं बयानों से 72 करोड़ से बढ़कर 225 करोड़ रुपये तक के इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इन 10 लोगों के खातों में लगभग 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे और ये सभी लोग पूर्व विधायक के नजदीकी बताए जा रहे हैं।
सूत्रों से पता चला है कि न तो इन लोगों की जमीन अधिगृहीत हुई थी और न ही इन्हें कोई और लाभ मिलना था, इसके बावजूद इनके खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। बताया जा रहा है कि यह रकम पूर्व विधायक तक पहुंचाई जाती थी। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि कुछ बिल्डरों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर हुई थी। ईडी ने दो साल पहले हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी।
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रुपये भेजने से पहले और बाद में सुरजाखेड़ा करता था फोन
ईडी के अनुसार सुरजाखेड़ा ने माना है कि जिन लोगों के बैंक खातों में एचएसवीपी के खाते से रकम जाती थी उन्हें सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल रुपये भेजने से पहले और बाद में फोन करते थे। आईडीबीआई बैंक की लोहगढ़ शाखा ने सुरजाखेड़ा को खाते से बड़ी मात्रा में नकदी निकाले जाने की जानकारी दी थी।
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मुआवजा दिलाने के नाम पर ली खातों की जानकारी
ईडी के अनुसार साल 2014-15 में एचएसवीपी से धोखाधड़ी करके राशि लेने वालों ने स्वीकार किया है कि एचएसवीपी से अधिग्रहित भूमि के लिए अपने वास्तविक मुआवजे का दावा करने के दौरान वे रामनिवास सुरजाखेड़ा के संपर्क में आए। सुरजाखेड़ा ने उन्हें मुआवजा राशि प्राप्त करने में मदद करने का वादा किया था। इसके एवज में उसने उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर खोले गए बैंक खातों की जानकारी मांगी।
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और भी अधिकारी जांच के दायरे में
इस मामले में एचएसवीपी के और भी अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका है, जिसकी जांच की जा रही है। लंबे समय से एचएसवीपी में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ईडी ने लगभग 200 बैंक खातों की जांच की है। सूत्रों के अनुसार ईडी ने कई बिल्डरों को जांच में शामिल किया है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों और बिल्डरों ने मिलकर फर्जी कंपनियों को यह राशि रिफंड की थी।
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प्लॉट घोटाले का भी हो सकता है पर्दाफाश
सूत्रों ने बताया कि वैट रिफंड घोटाले की जांच के अलावा, फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में प्लॉट घोटाले का भी पर्दाफाश हो सकता है। इसमें एचएसवीपी में मुख्य पदों पर काम कर चुके अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ सकती है। सूत्रों ने बताया कि एचएसवीपी के अधिकारियों ने बिल्डरों की मिलीभगत से कई प्लॉट सस्ते दाम पर अपने जानकारों को दिलवाए थे। बाद में उन्हें मोटी कीमत पर बाजार में बेच दिया गया।
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कई बिल्डर ईडी के रडार पर, जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
चंडीगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में हुए 72 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद 225 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है। ईडी की ओर से पंचकूला कोर्ट में दायर रिमांड पत्र के अनुसार सुरजाखेड़ा को खुद के और पत्नी (मंजीत) सहित परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में घोटाले की रकम प्राप्त की। इसके अलावा सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल ने बलविंदर सिंह, हरिंदर पाल सिंह आदि से सीधे नकदी प्राप्त की। इस मामले में एचएसवीपी के पूर्व अधिकारी सुनील कुमार बंसल और पूर्व विधायक रामनिवास सुरजखेड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब कई बिल्डर भी ईडी के रडार पर हैं, जिनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
2015 से 2019 के बीच जब फर्जीवाड़ा हुआ, तब रामनिवास सुरजाखेड़ा 2017 तक और सुनील कुमार बंसल 2019 तक एचएसवीपी में क्रमश: अकाउंट असिस्टेंट और सीनियर अकाउंट ऑफिसर पद पर कार्यरत थे। ईडी ने लगभग 10 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इन्हीं बयानों से 72 करोड़ से बढ़कर 225 करोड़ रुपये तक के इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इन 10 लोगों के खातों में लगभग 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे और ये सभी लोग पूर्व विधायक के नजदीकी बताए जा रहे हैं।
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सूत्रों से पता चला है कि न तो इन लोगों की जमीन अधिगृहीत हुई थी और न ही इन्हें कोई और लाभ मिलना था, इसके बावजूद इनके खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। बताया जा रहा है कि यह रकम पूर्व विधायक तक पहुंचाई जाती थी। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि कुछ बिल्डरों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर हुई थी। ईडी ने दो साल पहले हरियाणा पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी।
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रुपये भेजने से पहले और बाद में सुरजाखेड़ा करता था फोन
ईडी के अनुसार सुरजाखेड़ा ने माना है कि जिन लोगों के बैंक खातों में एचएसवीपी के खाते से रकम जाती थी उन्हें सुरजाखेड़ा और सुनील कुमार बंसल रुपये भेजने से पहले और बाद में फोन करते थे। आईडीबीआई बैंक की लोहगढ़ शाखा ने सुरजाखेड़ा को खाते से बड़ी मात्रा में नकदी निकाले जाने की जानकारी दी थी।
मुआवजा दिलाने के नाम पर ली खातों की जानकारी
ईडी के अनुसार साल 2014-15 में एचएसवीपी से धोखाधड़ी करके राशि लेने वालों ने स्वीकार किया है कि एचएसवीपी से अधिग्रहित भूमि के लिए अपने वास्तविक मुआवजे का दावा करने के दौरान वे रामनिवास सुरजाखेड़ा के संपर्क में आए। सुरजाखेड़ा ने उन्हें मुआवजा राशि प्राप्त करने में मदद करने का वादा किया था। इसके एवज में उसने उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर खोले गए बैंक खातों की जानकारी मांगी।
और भी अधिकारी जांच के दायरे में
इस मामले में एचएसवीपी के और भी अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका है, जिसकी जांच की जा रही है। लंबे समय से एचएसवीपी में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ईडी ने लगभग 200 बैंक खातों की जांच की है। सूत्रों के अनुसार ईडी ने कई बिल्डरों को जांच में शामिल किया है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों और बिल्डरों ने मिलकर फर्जी कंपनियों को यह राशि रिफंड की थी।
प्लॉट घोटाले का भी हो सकता है पर्दाफाश
सूत्रों ने बताया कि वैट रिफंड घोटाले की जांच के अलावा, फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में प्लॉट घोटाले का भी पर्दाफाश हो सकता है। इसमें एचएसवीपी में मुख्य पदों पर काम कर चुके अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ सकती है। सूत्रों ने बताया कि एचएसवीपी के अधिकारियों ने बिल्डरों की मिलीभगत से कई प्लॉट सस्ते दाम पर अपने जानकारों को दिलवाए थे। बाद में उन्हें मोटी कीमत पर बाजार में बेच दिया गया।