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Chandigarh-Haryana News: नियमित रूप से काम कर रहे कर्मचारी को विभाग नहीं मान रहा जीवित
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कोविड-19 में गलती से मृतक घोषित कर्मचारी को नहीं दिया जा रहा वेतन
मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर विभाग से चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़ l लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में कार्यरत कर्मचारी विजय कुमार निवासी वाल्मीकि बस्ती रामलीला पड़ाव रोहतक को कोविड-19 के बाद के समय से वेतन से वंचित कर दिया गया है। दरअसल रिकाॅर्ड में गलती से उन्हें मृतक दर्ज कर दिया गया है। विजय नियमित रूप से विभाग में काम कर रहे हैं। लेकिन विभागीय चूक के कारण वेतन न मिलने से कर्मचारी को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इस प्रकरण में हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ललित बत्रा ने 12 अगस्त को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पंचकूला के मुख्य अभियंता, रोहतक सर्कल के अधीक्षण अभियंता से चार सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
आयोग के मुताबिक तथ्यों से स्पष्ट होता है कि विभाग ने प्रभावित कर्मचारी का रिकॉर्ड हरियाणा रोजगार कौशल निगम (एचकेआरएन) पोर्टल पर अपडेट नहीं किया जबकि यह तथ्य विभाग के संज्ञान में था कि कर्मचारी को मृतक गलत दर्शाया गया है। आयोग ने टिप्पणी में कहा कि प्रभावित कर्मचारी को लंबे समय तक वेतन न मिलने के कारण अनावश्यक आर्थिक कठिनाई और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी है। ऐसी स्थिति किसी व्यक्ति की गरिमा के साथ काम करने के अधिकार को कमजोर करती है। इस तरह की गलती किसी व्यक्ति की आजीविका, आत्मविश्वास और मानसिक शांति पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
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मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर विभाग से चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़ l लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में कार्यरत कर्मचारी विजय कुमार निवासी वाल्मीकि बस्ती रामलीला पड़ाव रोहतक को कोविड-19 के बाद के समय से वेतन से वंचित कर दिया गया है। दरअसल रिकाॅर्ड में गलती से उन्हें मृतक दर्ज कर दिया गया है। विजय नियमित रूप से विभाग में काम कर रहे हैं। लेकिन विभागीय चूक के कारण वेतन न मिलने से कर्मचारी को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इस प्रकरण में हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ललित बत्रा ने 12 अगस्त को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पंचकूला के मुख्य अभियंता, रोहतक सर्कल के अधीक्षण अभियंता से चार सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
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आयोग के मुताबिक तथ्यों से स्पष्ट होता है कि विभाग ने प्रभावित कर्मचारी का रिकॉर्ड हरियाणा रोजगार कौशल निगम (एचकेआरएन) पोर्टल पर अपडेट नहीं किया जबकि यह तथ्य विभाग के संज्ञान में था कि कर्मचारी को मृतक गलत दर्शाया गया है। आयोग ने टिप्पणी में कहा कि प्रभावित कर्मचारी को लंबे समय तक वेतन न मिलने के कारण अनावश्यक आर्थिक कठिनाई और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी है। ऐसी स्थिति किसी व्यक्ति की गरिमा के साथ काम करने के अधिकार को कमजोर करती है। इस तरह की गलती किसी व्यक्ति की आजीविका, आत्मविश्वास और मानसिक शांति पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
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