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High Court: एसपी को करना होगा गृह सचिव के आदेशों का पालन; डबवाली हिरासत हिंसा प्रकरण से जुड़ा मामला

Fri, 26 Sep 2025 02:36 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 26 Sep 2025 02:36 PM IST
सार

मामला 2001 के डबवाली (सिरसा) हिरासत हिंसा प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों पर बंदी को पीटने, अवैध रूप से हिरासत में रखने और झूठे दस्तावेज बनाने के आरोप लगे थे।

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SP will have to follow orders of Haryana Home Secretary say High Court
high court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि हरियाणा गृह विभाग के सचिव को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा अन्य अधीनस्थ अधिकारियों पर अनुशासनात्मक मामलों में सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) और अन्य अधिकारी गृह सचिव के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं और उन्हें अनदेखा या रद्द करने का कोई अधिकार नहीं है। यह फैसला जस्टिस जगमोहन बंसल ने यह आदेश जारी किया। 

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मामला 2001 के डबवाली (सिरसा) हिरासत हिंसा प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों पर बंदी को पीटने, अवैध रूप से हिरासत में रखने और झूठे दस्तावेज बनाने के आरोप लगे थे। वर्ष 2012 में निचली अदालत ने उन्हें मामूली धाराओं में दोषी ठहराया और तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि कुछ दोषियों की सजा को गृह विभाग ने बदलते हुए बर्खास्तगी की जगह अनिवार्य सेवानिवृत्ति कर दी थी।
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याचिकाकर्ता सेवा से बर्खास्त कृष्ण कुमार और बलवती ने तर्क दिया कि उनके साथ असमान व्यवहार हुआ, जबकि उनके सह-अभियुक्तों को राहत मिल चुकी थी। इस पर हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि डीजीपी के आदेशों की समीक्षा, संशोधन या निरस्तीकरण का अधिकार राज्य सरकार और गृह विभाग को ही है।
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अदालत में दाखिल हलफनामे में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) डा सुमिता मिश्रा ने भी कहा कि नियमों के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह पुलिस अधिकारियों को दी गई सजा की समीक्षा करे और उसे बढ़ाए घटाए या रद्द करे, यह व्यवस्था दशकों से चली आ रही है। जस्टिस बंसल ने टिप्पणी की, एसपी गृह सचिव के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। उन्हें दरकिनार करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही नियमों में लिखा है कि जेल की सजा पाए पुलिस अधिकारी बर्खास्त किए जाएंगे, परंतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले बताते हैं कि हर मामले में स्वचालित बर्खास्तगी जरूरी नहीं। अपराध की प्रकृति, परिस्थितियां और अनुपातिकता को देखते हुए कभी-कभी अधिकारियों को बर्खास्तगी की बजाय अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है। हाई कोर्ट ने अंतत याचिकाकर्ताओं कृष्ण कुमार और बलवती की बर्खास्तगी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदलने और सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है, हालांकि उनकी आपराधिक अपील लंबित है।

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