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Chandigarh-Haryana News: हजारों निवेशकों को ठगने वाली तीन कंपनियों के 103 करोड़ फ्रीज
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ईडी की नोएडा, लखनऊ, रोहतक व गुरुग्राम में कार्रवाई, मास्टरमाइंड दुबई फरार
चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) चंडीगढ़ के क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन मुखौटा कंपनियों के ठिकानों नोएडा, लखनऊ, रोहतक और गुरुग्राम में छापे मारे। इस दौरान ईडी ने इन संस्थाओं के कई बैंकों में मौजूद 116 खातों को फ्रीज कर दिया है। अब तक 16 बैंक खातों से 103 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय को फ्रीज किया गया है।
छापे की कार्रवाई नोएडा और लखनऊ में स्थित तीन संदिग्ध मुखौटा कंपनियों किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, रेनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर की गई है। ईडी के मुताबिक कंपनियों का संचालन डमी निदेशकों की ओर से किया जा रहा था। ये खुद को आईटी फर्म बताकर वॉलेट आधारित एपीआई, घरेलू धन हस्तांतरण, आधार आधारित भुगतान प्रणाली और बिल भुगतान समाधान की पेशकश कर रही थीं।
प्रबंधन यह प्रमाणित नहीं कर सका कि उनकी ओर से होने वाली गतिविधियां आरबीआई की ओर से विनियमित ढांचे के दायरे में हैं। जांच में पता चला कि ये कंपनियां वास्तव में करोड़ों रुपये के ऑनलाइन विदेशी मुद्रा और मल्टी लेवल मार्केटिंग घोटाले के माध्यम से उत्पन्न आय को सफेद करने के लिए सिर्फ एक मुखौटा थीं। इन कंपनियों ने भारत में हजारों निवेशकों को ठगा था। इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र सूद, विनीत कुमार और संतोष कुमार हजारों निवेशकों को ठगने के बाद दुबई फरार हो गए हैं।
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कंपनी के ग्राहक काल्पनिक थे और कागजों पर मौजूद थे
ईडी ने जांच में पाया कि कंपनी के प्रत्येक कार्यालय में 10 से 30 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से कई ने स्वीकार किया कि कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा था और वे अक्सर कंपनी की वास्तविक गतिविधियों से अनजान थे। फर्मों ने पूरे देश में ग्राहक आधार होने का दावा किया था, मगर ईडी को ऐसे सबूत मिले हैं, जो बताते हैं कि कई ग्राहक काल्पनिक थे और सिर्फ कागजों में मौजूद थे। क्यूएफएक्स, वाईएफएक्स, टीएलसी कॉइन व बॉटब्रो के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया जा रहा था।
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चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) चंडीगढ़ के क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन मुखौटा कंपनियों के ठिकानों नोएडा, लखनऊ, रोहतक और गुरुग्राम में छापे मारे। इस दौरान ईडी ने इन संस्थाओं के कई बैंकों में मौजूद 116 खातों को फ्रीज कर दिया है। अब तक 16 बैंक खातों से 103 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय को फ्रीज किया गया है।
छापे की कार्रवाई नोएडा और लखनऊ में स्थित तीन संदिग्ध मुखौटा कंपनियों किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, रेनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और मूल बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर की गई है। ईडी के मुताबिक कंपनियों का संचालन डमी निदेशकों की ओर से किया जा रहा था। ये खुद को आईटी फर्म बताकर वॉलेट आधारित एपीआई, घरेलू धन हस्तांतरण, आधार आधारित भुगतान प्रणाली और बिल भुगतान समाधान की पेशकश कर रही थीं।
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प्रबंधन यह प्रमाणित नहीं कर सका कि उनकी ओर से होने वाली गतिविधियां आरबीआई की ओर से विनियमित ढांचे के दायरे में हैं। जांच में पता चला कि ये कंपनियां वास्तव में करोड़ों रुपये के ऑनलाइन विदेशी मुद्रा और मल्टी लेवल मार्केटिंग घोटाले के माध्यम से उत्पन्न आय को सफेद करने के लिए सिर्फ एक मुखौटा थीं। इन कंपनियों ने भारत में हजारों निवेशकों को ठगा था। इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी, राजेंद्र सूद, विनीत कुमार और संतोष कुमार हजारों निवेशकों को ठगने के बाद दुबई फरार हो गए हैं।
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कंपनी के ग्राहक काल्पनिक थे और कागजों पर मौजूद थे
ईडी ने जांच में पाया कि कंपनी के प्रत्येक कार्यालय में 10 से 30 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से कई ने स्वीकार किया कि कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा था और वे अक्सर कंपनी की वास्तविक गतिविधियों से अनजान थे। फर्मों ने पूरे देश में ग्राहक आधार होने का दावा किया था, मगर ईडी को ऐसे सबूत मिले हैं, जो बताते हैं कि कई ग्राहक काल्पनिक थे और सिर्फ कागजों में मौजूद थे। क्यूएफएक्स, वाईएफएक्स, टीएलसी कॉइन व बॉटब्रो के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया जा रहा था।