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Chandigarh-Haryana News: 2030 तक अरावली संरक्षण का रोडमैप तैयार, 90 फीसदी क्षेत्र के संरक्षण का प्रस्ताव
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मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ग्रीन वॉल परियोजना पर तेजी से काम कराएगी सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने अरावली पर्वत शृंखला के संरक्षण के लिए 2030 तक की ठोस कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसके तहत अरावली क्षेत्र के करीब 90 फीसदी हिस्से को संरक्षित रखने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार का अरावली ग्रीन वॉल परियोजना पर तेजी से कार्य कराने पर फोकस है ताकि मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सरकार का लक्ष्य 2030 तक अरावली को सुरक्षित, समृद्ध और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
यहां जारी एक बयान में मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली पर्वत शृंखला को लेकर दी गई नई परिभाषा का हरियाणा सरकार स्वागत करती है। इससे संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्यावरण बचाना नहीं बल्कि हरित रोजगार सृजन, जनभागीदारी बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना है।
मंत्री राव नरबीर ने कहा कि हरियाणा वह पावन भूमि है जहां वैदिक सभ्यता का उद्भव हुआ और भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिशन लाइफ और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलें पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बना रही हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर सीएम नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने ऑक्सी वन, प्राण वायु देवता योजना और वन मित्र जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
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दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नारनौल, चरखी दादरी, बाढड़ा, लोहारू और केरू क्षेत्रों में जाटी व रोहिड़ा जैसे स्थानीय वृक्षों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। प्राण वायु देवता योजना की तर्ज पर इन वृक्षों के संरक्षण पर वार्षिक मानदेय दिया जाएगा जिससे ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने कहा कि राजस्थान, गुजरात और दिल्ली के साथ मिलकर अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। गुरुग्राम अरावली जैव विविधता पार्क जैसे मॉडल इस दिशा में सफल उदाहरण हैं जिसे भारत का पहला अन्य प्रभावी क्षेत्र आधारित संरक्षण उपाय (ओईसीएम) भी घोषित किया गया है।
राव नरबीर ने कहा कि युवाओं को जोड़ने के लिए गांव स्तर पर वन मित्रों की नियुक्ति की गई है। वहीं 75 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों को 2500 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। शहरी क्षेत्रों में ऑक्सी वन विकसित कर वायु शुद्धता बढ़ाने और मरुस्थलीकरण रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने अरावली पर्वत शृंखला के संरक्षण के लिए 2030 तक की ठोस कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसके तहत अरावली क्षेत्र के करीब 90 फीसदी हिस्से को संरक्षित रखने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार का अरावली ग्रीन वॉल परियोजना पर तेजी से कार्य कराने पर फोकस है ताकि मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सरकार का लक्ष्य 2030 तक अरावली को सुरक्षित, समृद्ध और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
यहां जारी एक बयान में मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली पर्वत शृंखला को लेकर दी गई नई परिभाषा का हरियाणा सरकार स्वागत करती है। इससे संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्यावरण बचाना नहीं बल्कि हरित रोजगार सृजन, जनभागीदारी बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना है।
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मंत्री राव नरबीर ने कहा कि हरियाणा वह पावन भूमि है जहां वैदिक सभ्यता का उद्भव हुआ और भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिशन लाइफ और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलें पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बना रही हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर सीएम नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ने ऑक्सी वन, प्राण वायु देवता योजना और वन मित्र जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
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दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नारनौल, चरखी दादरी, बाढड़ा, लोहारू और केरू क्षेत्रों में जाटी व रोहिड़ा जैसे स्थानीय वृक्षों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। प्राण वायु देवता योजना की तर्ज पर इन वृक्षों के संरक्षण पर वार्षिक मानदेय दिया जाएगा जिससे ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।
मंत्री ने कहा कि राजस्थान, गुजरात और दिल्ली के साथ मिलकर अरावली ग्रीन वॉल परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। गुरुग्राम अरावली जैव विविधता पार्क जैसे मॉडल इस दिशा में सफल उदाहरण हैं जिसे भारत का पहला अन्य प्रभावी क्षेत्र आधारित संरक्षण उपाय (ओईसीएम) भी घोषित किया गया है।
राव नरबीर ने कहा कि युवाओं को जोड़ने के लिए गांव स्तर पर वन मित्रों की नियुक्ति की गई है। वहीं 75 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों को 2500 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। शहरी क्षेत्रों में ऑक्सी वन विकसित कर वायु शुद्धता बढ़ाने और मरुस्थलीकरण रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।