फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Preventive detention cannot be extended merely on the basis of opinion.

Chandigarh-Haryana News: केवल राय के आधार पर नहीं बढ़ाई जा सकती निवारक हिरासत

विज्ञापन
- बिना दिमाग लगाए हिरासत पुष्टी वाले आदेश को हाईकोर्ट ने किया रद्द
विज्ञापन



- एनडीपीएस केस के आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश


चंडीगढ़। निवारक हिरासत से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल एडवाइजरी बोर्ड की राय के आधार पर किसी व्यक्ति की हिरासत बढ़ाना कानून सम्मत नहीं माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि पुष्टि करने वाली सरकारी अथॉरिटी को स्वतंत्र रूप से अपने विवेक के अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित करना अनिवार्य है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से जारी छह महीने की हिरासत पुष्टि के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि यदि याचिकाकर्ता किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।


जसबीर सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की ओर से पारित पुष्टि आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 एफआईआर दर्ज होने के आधार पर सात जनवरी 2026 को निवारक हिरासत आदेश जारी किया गया था। बाद में एडवाइजरी बोर्ड की राय मिलने पर सरकार ने उसकी हिरासत छह महीने तक बढ़ा दी थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पुष्टि आदेश पूरी तरह यांत्रिक है और उसमें कहीं भी यह नहीं दर्शाया गया कि सरकार ने स्वतंत्र रूप से तथ्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार एडवाइजरी बोर्ड की सकारात्मक राय केवल एक सहायक तत्व है, अंतिम निर्णय सरकार को स्वतंत्र विवेक से लेना होता है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का हवाला देते हुए कहा कि निवारक हिरासत जैसी असाधारण शक्ति का प्रयोग अत्यंत सावधानी और कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ ही किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान की मूल आत्मा है और सरकार की संतुष्टि केवल औपचारिक या यांत्रिक नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि पुष्टि आदेश विस्तृत होना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि हिरासत जारी रखना क्यों आवश्यक है और उसकी अवधि कितनी तथा क्यों तय की गई। केवल एडवाइजरी बोर्ड की राय की नकल कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


फैसले में अदालत ने पाया कि हरियाणा सरकार के आदेश में न तो हिरासत जारी रखने का कोई स्वतंत्र कारण दर्ज था और न ही छह महीने की अवधि तय करने का आधार बताया गया। ऐसे में आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने अंत में हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के गृह सचिव को इस फैसले की प्रति भेजी जाए ताकि भविष्य में निवारक हिरासत मामलों में कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed