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ओपीएस कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं : हाईकोर्ट
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ओपीएस की कटऑफ तारीख को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
1 जनवरी 2006 के बाद नियुक्त हुए पुलिसकर्मियों ने दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की पेंशन नीति में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना से जुड़ी कटऑफ तय करना राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत सीमित परिस्थितियों को छोड़कर दखल नहीं दे सकती। 2007–08 में नियुक्त हरियाणा पुलिसकर्मियों की याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने 28 अक्टूबर 2005 को कटऑफ डेट मानने के राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराया।
मामला उन पुलिसकर्मियों से जुड़ा था जिन्होंने 3 मई 2006 को जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2007–08 में नियुक्त हुए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हरियाणा सरकार ने 8 मई 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन में ओपीएस का लाभ देने के लिए 28 अक्टूबर 2005 को कटऑफ तिथि तय कर दी। जबकि राज्य में एनपीएस को औपचारिक रूप से 18 अगस्त 2008 को अधिसूचित किया गया था। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने एनपीएस की अधिसूचना की तिथि को आधार बनाकर ओपीएस का लाभ बढ़ाया है। इसलिए राज्य सरकार को भी वही मानक अपनाना चाहिए और कटऑफ डेट 18 अक्टूबर 2008 मानी जानी चाहिए।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने निर्णय में कहा कि हरियाणा सरकार ने 28 अक्टूबर 2005 को नियमों में संशोधन कर ओपीएस को समाप्त कर दिया था और यह स्पष्ट कर दिया गया था कि 01 जनवरी 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारी एनपीएस के अंतर्गत आएंगे। भले ही एनपीएस की अधिसूचना 18 अगस्त 2008 को जारी हुई हो लेकिन नियमों में संशोधन पहले ही लागू हो चुका था। इससे ओपीएस प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की नीतियों को यथावत अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 1 जनवरी 2006 के बाद हुई थी। उस समय ओपीएस अस्तित्व में नहीं थी और वे पिछले कई वर्षों से एनपीएस में योगदान कर रहे हैं। ऐसे में ओपीएस कोई मौलिक या अर्जित अधिकार नहीं है जिसके लिए वे अब दावा कर सकें।
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1 जनवरी 2006 के बाद नियुक्त हुए पुलिसकर्मियों ने दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की पेंशन नीति में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना से जुड़ी कटऑफ तय करना राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत सीमित परिस्थितियों को छोड़कर दखल नहीं दे सकती। 2007–08 में नियुक्त हरियाणा पुलिसकर्मियों की याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने 28 अक्टूबर 2005 को कटऑफ डेट मानने के राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराया।
मामला उन पुलिसकर्मियों से जुड़ा था जिन्होंने 3 मई 2006 को जारी विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2007–08 में नियुक्त हुए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हरियाणा सरकार ने 8 मई 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन में ओपीएस का लाभ देने के लिए 28 अक्टूबर 2005 को कटऑफ तिथि तय कर दी। जबकि राज्य में एनपीएस को औपचारिक रूप से 18 अगस्त 2008 को अधिसूचित किया गया था। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने एनपीएस की अधिसूचना की तिथि को आधार बनाकर ओपीएस का लाभ बढ़ाया है। इसलिए राज्य सरकार को भी वही मानक अपनाना चाहिए और कटऑफ डेट 18 अक्टूबर 2008 मानी जानी चाहिए।
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जस्टिस जगमोहन बंसल ने निर्णय में कहा कि हरियाणा सरकार ने 28 अक्टूबर 2005 को नियमों में संशोधन कर ओपीएस को समाप्त कर दिया था और यह स्पष्ट कर दिया गया था कि 01 जनवरी 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारी एनपीएस के अंतर्गत आएंगे। भले ही एनपीएस की अधिसूचना 18 अगस्त 2008 को जारी हुई हो लेकिन नियमों में संशोधन पहले ही लागू हो चुका था। इससे ओपीएस प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की नीतियों को यथावत अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 1 जनवरी 2006 के बाद हुई थी। उस समय ओपीएस अस्तित्व में नहीं थी और वे पिछले कई वर्षों से एनपीएस में योगदान कर रहे हैं। ऐसे में ओपीएस कोई मौलिक या अर्जित अधिकार नहीं है जिसके लिए वे अब दावा कर सकें।
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