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Chandigarh-Haryana News: सरकारी चिकित्सकों के एक हजार पद खाली
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चंडीगढ़। हरियाणा में चिकित्सकों की कमी सालों से बनी हुई है। कभी भी चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं होती। जितने आते हैं, उनमें से कई छोड़कर चले जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक एक हजार लोगों पर एक चिकित्सक होना चाहिए। जब इतनी संख्या में चिकित्सक होंगे तो मरीजों को गुणवत्तापूर्वक इलाज मिल सकेगा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के आबादी करीब पौने तीन करोड़ है। इस हिसाब से प्रदेश में कम से कम 27 हजार चिकित्सक होने चाहिए। राज्य में चिकित्सकों के करीब 5437 स्वीकृत पद हैं। इनमें से करीब 1100 पद खाली चल रहे हैं। यानी करीब सवा चार हजार चिकित्सक काम कर रहे हैं।
वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संख्या भी करीब 15 हजार है। राज्य में करीब एक हजार आयुष चिकित्सक भी तैनात हैं। यहां भी काफी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में प्राइवेट व सरकारी मिलाकर राज्य में करीब 20 हजार चिकित्सक काम कर रहे हैं। इसके बावजूद डब्ल्यूएचओ के मानक से राज्य में चिकित्सकों की कमी है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डाॅ. राजेश ख्यालिया का कहना है कि राज्य में चिकित्सकों की भारी कमी है। खासकर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की। अधिकतर जिलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। कई जगह फिजीशियन भी नहीं हैं। सरकारी अस्पताल में एक चिकित्सक ओपीडी में 200 से 250 मरीज देखता है। ऐसे चिकित्सक मरीज को एक से डेढ़ मिनट तक समय दे पाते हैं। ऐसे में मरीजों को अच्छा इलाज कहां से मिलेगा। चिकित्सकों पर काम का बोझ भी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी ऐसे चिकित्सक हैं, जिन्हें जीवन भर सिर्फ एक ही प्रमोशन मिल पाता है और वह रिटायर हो जाते हैं।
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मेडिकल ऑफिसर से वह एसएमओ ही बन पाते हैं। प्रदेश सरकार को आबादी के मुताबिक चिकित्सक बढ़ाने होंगे और वेतनमान भी आकर्षक होना चाहिए। आईएएम के पूर्व प्रेसिडेंट डाॅ. अजय महाजन ने कहा कि आईएमए के साथ करीब आठ हजार चिकित्सक हैं, मगर इनकी संख्या करीब 14 से 15 हजार होगी। हालांकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। ब्यूरो
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के आबादी करीब पौने तीन करोड़ है। इस हिसाब से प्रदेश में कम से कम 27 हजार चिकित्सक होने चाहिए। राज्य में चिकित्सकों के करीब 5437 स्वीकृत पद हैं। इनमें से करीब 1100 पद खाली चल रहे हैं। यानी करीब सवा चार हजार चिकित्सक काम कर रहे हैं।
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वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संख्या भी करीब 15 हजार है। राज्य में करीब एक हजार आयुष चिकित्सक भी तैनात हैं। यहां भी काफी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में प्राइवेट व सरकारी मिलाकर राज्य में करीब 20 हजार चिकित्सक काम कर रहे हैं। इसके बावजूद डब्ल्यूएचओ के मानक से राज्य में चिकित्सकों की कमी है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डाॅ. राजेश ख्यालिया का कहना है कि राज्य में चिकित्सकों की भारी कमी है। खासकर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की। अधिकतर जिलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। कई जगह फिजीशियन भी नहीं हैं। सरकारी अस्पताल में एक चिकित्सक ओपीडी में 200 से 250 मरीज देखता है। ऐसे चिकित्सक मरीज को एक से डेढ़ मिनट तक समय दे पाते हैं। ऐसे में मरीजों को अच्छा इलाज कहां से मिलेगा। चिकित्सकों पर काम का बोझ भी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी ऐसे चिकित्सक हैं, जिन्हें जीवन भर सिर्फ एक ही प्रमोशन मिल पाता है और वह रिटायर हो जाते हैं।
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मेडिकल ऑफिसर से वह एसएमओ ही बन पाते हैं। प्रदेश सरकार को आबादी के मुताबिक चिकित्सक बढ़ाने होंगे और वेतनमान भी आकर्षक होना चाहिए। आईएएम के पूर्व प्रेसिडेंट डाॅ. अजय महाजन ने कहा कि आईएमए के साथ करीब आठ हजार चिकित्सक हैं, मगर इनकी संख्या करीब 14 से 15 हजार होगी। हालांकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। ब्यूरो