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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Notice to Haryana Staff Selection Commission for not doing biometric verification of candidates, Court News, Haryana News

Chandigarh-Haryana News: अभ्यर्थियों का बायोमीट्रिक सत्यापन न करने पर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस

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-हाईकोर्ट सख्त : जूनियर इंजीनियर पद के लिए जारी परिणाम को वापस लेने का जारी किया आदेश
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ओएमआर शीट पर बायोमीट्रिक हस्ताक्षरों का मिलान करने की मांग को लेकर दाखिल की गई थी अर्जी

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के बायोमीट्रिक सत्यापन के निर्देश संबंधी आदेश का पालन न करने पर प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने नोटिस में कहा, क्यों न एचएसएससी के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। वहीं, अनुपालन न होने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने आयोग से जूनियर इंजीनियर के पद के लिए घोषित परिणाम को वापस लेने को कहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया, एचएसएससी के अधिकारी अवमानना करने और निर्देशों की अवहेलना करने के दोषी हैं। कोर्ट ने कहा कि यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि बायोमीट्रिक सत्यापन करने का दायित्व कोई कार्यकारी निर्णय नहीं था बल्कि एक न्यायिक आदेश था। इस प्रकार, उपर्युक्त गैर-अनुपालन अपने आप में आयोग को उनके द्वारा पहले से घोषित अंतिम परिणाम को वापस लेने को बाध्य करता है। यह याचिका जूनियर इंजीनियर (सिविल) के पद पर चयन के लिए चुने गए उम्मीदवारों के ओएमआर शीट (ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन) पर बायोमीट्रिक हस्ताक्षरों का मिलान करने की मांग करते हुए दाखिल की गई थी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि आवेदन करने वाला उम्मीदवार वास्तव में इस न्यायालय के निर्णयों के अनुसार लिखित परीक्षा में उपस्थित हुआ था या नहीं।
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कोर्ट को बताया गया कि 2018 के आदेश के बाद शुरू की गई सभी चयन प्रक्रियाओं में उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार की वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए उम्मीदवारों के आधार कार्ड के साथ फिंगर प्रिंट/बायोमीट्रिक का मिलान किया जाना आवश्यक था। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद निर्विवाद दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि विभिन्न विज्ञापनों और तैयार किए गए परिणामों के संबंध में, प्रतिवादी-आयोग द्वारा बायोमीट्रिक सत्यापन किया जा रहा है लेकिन इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि जूनियर इंजीनियर (सिविल) के वर्तमान मामले में भी उक्त प्रक्रिया का अनुपालन क्यों नहीं किया गया है।
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कोर्ट ने एचएसएससी द्वारा दायर हलफनामे में विरोधाभास को उजागर किया जिसमें आयोग ने सभी चयन प्रक्रियाओं के संबंध में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को स्वीकार किया था। कोर्ट ने कहा कि एचएसएससी ने सुविधाजनक रूप से शब्दों के प्रयोग में हेराफेरी की है और ऐसा दर्शाया है जैसे दस्तावेजों का सत्यापन और अभ्यर्थी का सत्यापन एक ही प्रक्रिया है।
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