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Chandigarh-Haryana News: कांग्रेस संगठन में अपने जिले में तैनात नहीं होंगे स्थानीय नेता
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- कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में गुटबाजी से बचकर पर्यवेक्षकों के साथ सहयोगी नेताओं की नियुक्ति में जुटी
- पंजाब, हिमाचल और साउथ के राज्यों से 21 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के बाद हलचल तेज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 11 साल बाद हरियाणा में कांग्रेस संगठन का विस्तार करने जा रही है। इसके लिए कांग्रेस हाईकमान ने प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को पर्यवेक्षक के सहयोगी के तौर पर उनके जिले में ड्यूटी नहीं मिलेगी। संगठन विस्तार के लिए जून अंत से लेकर 10 जुलाई तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रदेश में ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकारिणी का जल्द विस्तार करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने पंजाब, हिमाचल सहित अन्य राज्यों के 21 वरिष्ठ नेताओं की ऑब्जर्वर कमेटी गठित की है। इनमें प्रदेश से एक भी नेता को पर्यवेक्षक नहीं बनाया गया है, उसका उद्देश्य संगठन विस्तार में पारदर्शिता रखना है।
गुटबाजी से बचकर स्थानीय नेताओं की नियुक्ति चुनौती
हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला के तीन अलग-अलग गुट माने जाते हैं। इन गुटों में शामिल नेताओं को चुनना सभी 21 पर्यवेक्षकों के लिए एक चुनौती होगी। विधानसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के 37 विधायक जीते हैं, जिनमें हुड्डा गुट के 33 विधायक शामिल हैं। अब पर्यवेक्षकों के सहयोगी के तौर पर नियुक्ति के लिए सभी गुट अपने समर्थकों के लिए जोर लगाएंगे। 21 पर्यवेक्षकों के साथ हरियाणा के दो से तीन नेताओं को सहयोगी के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद चार सदस्यीय कमेटी प्रदेश में कार्यकारिणी गठन को लेकर फैसला लेगी। अभी तक हरियाणा में विपक्ष का नेता नहीं चुना जा सका है। इस पर भी पर्यवेक्षक काम करेंगे।
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कोट्स...
हरियाणा कांग्रेस के संगठन विस्तार को लेकर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसी के तहत पदाधिकारियों की नियुक्ति भी हो रही है। स्थानीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षकों के साथ नियुक्त किया जाएगा। किसी नेता की उसके जिले में ड्यूटी नहीं मिलेगी। जून अंत या 10 जुलाई तक संगठन विस्तार कर दिया जाएगा।
उदयभान, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस।
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- पंजाब, हिमाचल और साउथ के राज्यों से 21 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के बाद हलचल तेज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 11 साल बाद हरियाणा में कांग्रेस संगठन का विस्तार करने जा रही है। इसके लिए कांग्रेस हाईकमान ने प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को पर्यवेक्षक के सहयोगी के तौर पर उनके जिले में ड्यूटी नहीं मिलेगी। संगठन विस्तार के लिए जून अंत से लेकर 10 जुलाई तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रदेश में ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकारिणी का जल्द विस्तार करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने पंजाब, हिमाचल सहित अन्य राज्यों के 21 वरिष्ठ नेताओं की ऑब्जर्वर कमेटी गठित की है। इनमें प्रदेश से एक भी नेता को पर्यवेक्षक नहीं बनाया गया है, उसका उद्देश्य संगठन विस्तार में पारदर्शिता रखना है।
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गुटबाजी से बचकर स्थानीय नेताओं की नियुक्ति चुनौती
हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला के तीन अलग-अलग गुट माने जाते हैं। इन गुटों में शामिल नेताओं को चुनना सभी 21 पर्यवेक्षकों के लिए एक चुनौती होगी। विधानसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के 37 विधायक जीते हैं, जिनमें हुड्डा गुट के 33 विधायक शामिल हैं। अब पर्यवेक्षकों के सहयोगी के तौर पर नियुक्ति के लिए सभी गुट अपने समर्थकों के लिए जोर लगाएंगे। 21 पर्यवेक्षकों के साथ हरियाणा के दो से तीन नेताओं को सहयोगी के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद चार सदस्यीय कमेटी प्रदेश में कार्यकारिणी गठन को लेकर फैसला लेगी। अभी तक हरियाणा में विपक्ष का नेता नहीं चुना जा सका है। इस पर भी पर्यवेक्षक काम करेंगे।
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हरियाणा कांग्रेस के संगठन विस्तार को लेकर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसी के तहत पदाधिकारियों की नियुक्ति भी हो रही है। स्थानीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षकों के साथ नियुक्त किया जाएगा। किसी नेता की उसके जिले में ड्यूटी नहीं मिलेगी। जून अंत या 10 जुलाई तक संगठन विस्तार कर दिया जाएगा।
उदयभान, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस।