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Chandigarh-Haryana News: न्यायिक अनुशासनहीनता, जज के खिलाफ जांच का हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश

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-रजिस्ट्रार जनरल को केस की फाइल प्रशासनिक जज के समक्ष प्रस्तुतर करने का आदेश
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-फरीदाबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश से जुड़ा हुआ है यह पूरा मामला
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के एक ही मामले में और एक ही दिन दो अलग-अलग आदेश पारित करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले को न्यायिक अनुशासनहीनता बताते हुए जांच का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि केस की फाइल उस जिले के प्रशासनिक जज के पास भेजी जाए। फरीदाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने जालसाजी के एक मामले में पहले मौखिक रूप से अंतरिम ज़मानत देने का आदेश सुनाया लेकिन बाद में उसी दिन गिरफ्तारी-पूर्व ज़मानत देने का आदेश पारित कर दिया। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से फरीदाबाद की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा ने अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना एक ही तारीख के दो आदेश दर्ज करना हमें अतार्किक लगता है। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि न्यायिक अधिकारी ने मौखिक आदेश दिया था कि आरोपी जांच में शामिल हो लेकिन बाद में वह इस निष्कर्ष पर पहुंचीं कि जमानत दी जानी चाहिए। प्रियंका कुमारी पर आरोप है कि उसने संपत्ति प्राप्त करने के लिए एक जाली समझौता किया और दस्तावेज़ों पर फरीदाबाद के उप-पंजीयक की मुहर और हस्ताक्षर भी लगाए।

इस मामले में उसने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। 19 नवंबर 2024 को जमानत को लेकर दो आदेश अपलोड किए गए। दूसरे आदेश में कहा गया था कि यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आता है बल्कि एक दीवानी विवाद है जिसे आपराधिक प्रकृति का रंग दिया गया है। हाईकोर्ट ने न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगा और सरकार से भी जवाब मांगा। दोनों पक्षों की जांच के बाद, न्यायालय ने पाया कि आरोप सत्य थे। कोर्ट ने कहा कि पहले आदेश में अग्रिम ज़मानत जांच में शामिल होने और 50,000 रुपये की ज़मानत देने की शर्त पर दी गई थी। सरकार के अनुसार न तो अभियुक्त जांच में शामिल हुई और न ही उसने कोई ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी का आचरण न केवल निंदनीय है, बल्कि मामले की गहन जांच की जरूरत है।
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