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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   In the last three years, we never got less than 9000 cusecs of water: CM, water dispute, Haryana news

पिछले तीन साल में कभी 9000 क्यूसेक से कम पानी नहीं मिला : सीएम

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नायब सिंह सैनी बोले - संकीर्ण नजरिए से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में सहयोग करें पंजाब के सीएम
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के सीएम की ओर से पानी आपूर्ति को लेकर दिए आंकड़ों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि एक-एक बूंद पानी का हिसाब बीबीएमबी के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा की सरकारों के पास होता है। सीएम मान ने यह नहीं बताया कि 2022, 2023 और 2024 में अप्रैल, मई और जून में कभी हरियाणा कॉन्टेक्ट प्वाइंट (एचसीपी) पर 9000 क्यूसेक से कम पानी नहीं दिया गया। सीएम सैनी ने पंजाब सीएम से अनुरोध किया कि वह संकीर्ण नजरिए से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में सहयोग करें।
सीएम ने कहा कि जो पानी बीबीएमबी एचसीपी को भेजता है, उसमें से दिल्ली का 500 क्यूसेक, राजस्थान का 800 क्यूसेक और पंजाब का खुद का 400 क्यूसेक पानी शामिल है। इस तरह हरियाणा को 6800 क्यूसेक पानी मिलता है। उन्होंने कहा कि मान साहब भूल गए कि अप्रैल और मई में पंजाब और हरियाणा में एक भी खेत में धान की रोपाई नहीं की जाती, क्योंकि ऐसा करना कानूनन प्रतिबंधित है। इन महीनों में बीबीएमबी से छोड़े गए पानी से केवल पेयजल की आपूर्ति होती है। n सीएम ने कहा कि मान साहब ने पौंग और रणजीत सागर डैम में पानी का स्तर कम होने की बात की है, लेकिन यह नहीं बताया कि भाखड़ डैम में क्या स्थिति है। प्रदेश को पानी भाखड़ा डैम से मिलता है न कि पौंग या रणजीत सागर डैम से। राज्यों की पानी की मांग हर 15 दिन में कम या ज्यादा होती है, जिसे तकनीकी कमेटी तय करती है। पिछले एक सप्ताह में हरियाणा को केवल 4,000 क्यूसेक पानी मिला है, जो कुल मांग का लगभग 60 प्रतिशत है।
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भाखड़ा से छोड़े जाने वाले पानी का आंकड़ा
वर्ष भाखड़ा बांध जल स्तर (फीट) एचपीसी को मिलने वाला पानी (क्यूसेक)
29 अप्रैल 2020-21 1525.60 8263

29 अप्रैल 2021-22 1564.1 9726
29 अप्रैल 2022-23 1570.54 9850

29 अप्रैल 2023-24 1567.33 10067
29 अप्रैल 2024-25 1555.82 -----

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पंजाब को कटौती का अधिकार नहीं, हरियाणा सरकार ने नहीं की पैरवी : कांग्रेस

चंडीगढ़। पंजाब के पानी में कटौती करने पर कांग्रेस ने कहा कि हरियाणा के पानी में कटौती करने का अधिकार नहीं है। पार्टी नेताओं ने इस मुद्दे पर मजबूत पैरवी न करने का आरोप लगाते हुए हरियाणा सरकार को भी घेरा है। सांसद कुमारी सैलजा ने संसद से सड़क तक हरियाणा के हक की आवाज उठाने की बात कही है।
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कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा कोई अहसान नहीं मांग रहा, बल्कि यह प्रदेश के हिस्से का पानी है, जो पंजाब सरकार को हर हाल में देना ही पड़ेगा। पंजाब सरकार द्वारा 9500 क्यूसेक पानी को अचानक घटाकर 4000 क्यूसेक करना घोर आपत्तिजनक है। हरियाणा की भाजपा सरकार की ओर से इसका कोई विरोध भी न करना और अधिक आपत्तिजनक है। भाजपा ने सत्ता में आने के बाद से ही हरियाणा के हितों की पैरवी मजबूती से नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के एसवाईएल पर हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बावजूद आज तक सरकार हरियाणा के हक का पानी नहीं ले पाई।
सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार हरियाणा का पानी रोककर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दोनों प्रदेशों के बीच हुए जल समझौतों की खुलेआम अवहेलना कर रही है। प्रदेश और केंद्र में दोनों जगह भाजपा सरकार होने के बावजूद वह इसे रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। यह भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। अगर हरियाणा को उसके हक का पानी नहीं मिला तो इस भीषण गर्मी में प्रदेश के अनेक जिलों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। अगर सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ हरियाणा के हक की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ेगी।



हरियाणा के साथ विश्वासघात भाजपा-कांग्रेस भी शामिल : अभय

इनेलो प्रमुख और पूर्व विधायक अभय चौटाला ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री गीदड़ भभकी दे रहे हैं। हरियाणा सरकार ने चुप्पी साध रखी है। हरियाणा के साथ विश्वासघात किया जा रहा है और इसमें कांग्रेस भी शामिल है।
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दोनों राज्यों में पानी पर रही है तनातनी, छह दशक से चल रहा एसवाईएल विवाद

चंडीगढ़। 1966 में हरियाणा के गठन के बाद से ही दोनों राज्यों में पानी को लेकर विवाद रहा है। हरियाणा और पंजाब के बीच पानी का विवाद मुख्य रूप से सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) से जुड़ा है। इस नहर का उद्देश्य राबी और ब्यास नदियों के पानी को हरियाणा पहुंचाना था, लेकिन पंजाब ने इस परियोजना का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पानी नहीं दिया है। एसवाईएल से पानी न मिलने पर भाखड़ा जल समझौता अस्तित्व में आया था। इसके जरिए मिलने वाले पानी से आधे हरियाणा की प्यास बुझ रही है।

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पानी की लड़ाई
1976 में केंद्र सरकार ने पंजाब के 7.2 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से 3.5 एमएएफ पानी हरियाणा को देने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके लिए सतलुज-यमुना को जोड़ने वाली सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) परियोजना बनी। 1980 में हरियाणा ने नहर खोदने का काम पूरा कर लिया।
1981
में एसवाईएल परियोजना पूरी न होने पर पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा जल समझौता हुआ। इसके तहत हरियाणा को पंजाब से लगभग 1.8 एमएएफ पानी मिल रहा है।

1982 में पंजाब ने एसवाईएल नहर बनाने का कार्य शुरू किया, लेकिन सिख दंगों के दौरान विरोध के कारण 1990 में कई इंजीनियरों व मजदूरों की मौत के बाद इसे रोक दिया गया।
1996 में हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब को नहर निर्माण पूरा करने का आदेश देने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पंजाब ने नहर निर्माण से इन्कार कर दिया।


2004
में पंजाब ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके सभी जल समझौतों के रद्द कर दिया था।
2016
को सुप्रीम कोर्ट ने उस अधिनियम को रद्द कर दिया जिसके तहत पंजाब सरकार ने सभी जल समझौतों को रद्द कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार ने एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए अधिगृहीत 5,376 एकड़ भूमि को गैर-अधिसूचित कर दिया और इसे मूल मालिकों को वापस कर दिया।
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हरियाणा का पक्ष - 1966 में हुए बंटवारे के दौरान तय हुए नियमों के तहत राज्य को उसके हिस्से का पानी दिया जाए। एसवाईएल नहर के पानी पर हरियाणा का हक है।
पंजाब का पक्ष -
हमें खुद पानी की जरूरत। अतिरिक्त पानी नहीं है।
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