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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   If clarification is received on contract violation then it is wrong to blacklist companies: High Court, Court News, Haryana news

कान्ट्रैक्ट उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मिल जाए तो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना गलत : हाईकोर्ट

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-एचवीपीएनएल के कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अगर कान्ट्रैक्ट का उल्लंघन करने का स्पष्टीकरण दे दिया गया हो और वजह ईमानदार हो तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने जैसी सजा देना अनुचित है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की सजा का असर कंपनी के व्यापार के साथ-साथ इसके कर्मियों की आजीविका पर भी पड़ता है। कोर्ट ने एचवीपीएनएल द्वारा जारी ब्लैकलिस्टिंग आदेश को निरस्त कर दिया।
एमएस फ्लोरल इलेक्ट्रिकल प्राइवेट लिमिटेड ने याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) द्वारा लगाए गए एक साल के ब्लैक लिस्टिंग आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि एचवीपीएनएल ने हांसी में 132 केवी सबस्टेशन निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी किया था। एमएस गुप्ता इंडस्ट्रीज ने फ्लोरल इलेक्ट्रिकल के साथ 2 मार्च 2020 को एक जाइंट वेंचर एग्रीमेंट किया और उसी के आधार पर निविदा भरी। बाद में फ्लोरल इलेक्ट्रिकल के बोर्ड ने यह प्रस्ताव पास किया कि वह सिर्फ जॉइंट वेंचर का हिस्सा रहेगा लेकिन सारी वित्तीय और संविदात्मक जिम्मेदारी गुप्ता इंडस्ट्रीज की होगी। कुछ समय बाद एचवीपीएनएल और गुप्ता इंडस्ट्रीज के बीच विवाद पैदा हो गया और मामला मध्यस्थता तक पहुंच गया। हालांकि, सिर्फ गुप्ता इंडस्ट्रीज ने मध्यस्थता याचिका दायर की थी। एचवीपीएनएल ने आपत्ति जताई कि कान्ट्रैक्ट तो जाइंट वेंचर के साथ था, इसलिए फ्लोरल का नाम भी शामिल होना चाहिए था। जब इस याचिका में बदलाव कर फ्लोरल को शामिल करने की कोशिश की गई, तो वह भी 7 मार्च 2024 को खारिज हो गई।
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कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का ऐसा घोर कदाचार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी समझौते के उल्लंघन को उचित और ईमानदार ढंग से समझाया जा सके या फिर अगर कोई वास्तविक विवाद मौजूद हो, तो ऐसे में ब्लैक लिस्टिंग नहीं करना चाहिए।
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