फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court said Cybercrimes eroding public trust in digital platforms

साइबर अपराध डिजिटल प्लेटफॉर्म में जनता के विश्वास को कम कर रहे: हाईकोर्ट

विज्ञापन
-आरोपी को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इन्कार
विज्ञापन

-संदिग्ध खातों की पहचान के बाद दर्ज किया गया था मामला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को साइबर ठगी के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध डिजिटल प्लेटफॉर्म में जनता के विश्वास को कम करते हैं और एक उन्नत एवं डिजिटल रूप से सशक्त डिजिटल भारत की आकांक्षाओं के विपरीत हैं। न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने एक बैंक खाते से संबंधित मामले में एक अभियुक्त को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करते हुए यह टिप्पणी की है। इस खाते में एक वर्ष में 5.70 करोड़ से अधिक जमा और निकाले गए जबकि यह खाता सब्जियों और फलों के व्यापार के लिए खोला गया था।
न्यायालय ने पाया कि पुलिस को इस खाते से जुड़ी कथित साइबर धोखाधड़ी से संबंधित 14 साइबर अपराध शिकायतें मिली हैं। कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों का प्रसार एक बड़ा खतरा पैदा करता है क्योंकि यह डिजिटल वित्तीय लेनदेन प्लेटफार्मों में जनता के विश्वास को व्यवस्थित रूप से कम करता है। इन अपराधों की विशेषता यह है कि वे एक साथ कई पीड़ितों को, अक्सर एक ही कृत्य से, पीड़ित कर सकते हैं। न्यायालय ने आगे कहा कि साइबर अपराधों के परिणाम व्यक्तिगत सीमाओं से परे होते हैं और असंख्य अनजान नागरिकों को खतरे में डालते हैं। कोर्ट ने कहा कि वास्तव में, हमारे देश में साइबर अपराध एक मूक वायरस की तरह काम करता है। समाज पर ऐसा कहर बरपाता है जो केवल आर्थिक नुकसान से कहीं आगे तक फैला है।
विज्ञापन

वर्तमान मामला साइबर विभाग के डीजी के निर्देश पर दर्ज किया गया था जब राज्य भर में कुछ खातों की पहचान संदिग्ध पाई गई थी। जांच करने पर पुलिस ने पाया कि खाते के लिए दिया गया पता एक आवासीय संपत्ति का था जिसमें व्यावसायिक गतिविधि का कोई संकेत नहीं था। इससे जुड़ा मोबाइल नंबर भी अमान्य पाया गया। यह पुलकित भारद्वाज नाम के व्यक्ति के नाम पर खोला गया था लेकिन इसे अन्य लोग चला रहे थे। गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए आरोपी करनाल निवासी दीपक के वकील ने दलील दी कि पैसा गेमिंग प्लेटफॉर्म पर कमाया गया था। अदालत को बताया गय कुल लेन-देन की मात्रा बड़ी लग सकती है लेकिन यह एक ही राशि के बार-बार किए गए सट्टे को दर्शाता है न कि वास्तविक आय या लाभ को। हालांकि, अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री और प्रारंभिक जांच आरोपों के लिए एक उचित आधार स्थापित करती प्रतीत होती है। अदालत ने आरोपी को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत देने से इन्कार करते हुए कहा कि यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि वर्तमान में याचिकाकर्ता ने गेमिंग एप्लिकेशन में इतनी बड़ी राशि के निवेश को उचित ठहराने के लिए आय का कोई वैध स्रोत प्रदर्शित नहीं किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed