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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में भूजल रिचार्ज 11 फीसदी बढ़ा, मगर दोहन 136 प्रतिशत
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राज्य में 9.36 के बजाय 12.72 बीसीएम पानी जमीन से निकाला गया
88 उपमंडल रेड और 11 क्रिटिकल जोन में, 36 उपमंडल ही सुरक्षित जोन में हैं
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। भूजल रिचार्ज की स्थिति हरियाणा में सुधरने लगी है। 2023 के 8,69,053.15 हेक्टेयर मीटर की तुलना में 2024 में 9,35,857.56 हेक्टेयर मीटर पानी रिचार्ज किया गया, जो करीब 11 फीसदी अधिक है। यह हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) के लिए बड़ी उपलब्धि है।
मगर, चिंता की बात यह भी है कि राज्य में भूजल का दोहन बदस्तूर जारी है।
भूजल प्रकोष्ठ, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग व केंद्रीय भूजल बोर्ड की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जितना भूजल रिचार्ज किया गया, उससे कहीं ज्यादा भूजल निकाल दिया गया। राज्य में साल भर में 10.32 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) सालाना भूजल रिचार्ज हुआ। इस अवधि में 9.36 बीसीएम भूजल निकाला जाना चाहिए था, मगर पूरे साल में 12.72 बीसीएम पानी जमीन से निकाला गया। हरियाणा में कुल भूजल निकासी दर 135.7 फीसदी से बढ़कर 136 फीसदी हो गई है।
राज्य की स्थिति ऐसी है कि 143 उपमंडल में से सिर्फ 36 ही सुरक्षित जोन में हैं। 88 उपमंडल रेड जोन में हैं। यानी इनमें 100 फीसदी से ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। 11 उपमंडल क्रिटिकल जोन में हैं। जहां 90 से 100 फीसदी भूजल निकाला जा रहा है। 8 ब्लॉक में 70 से 90 फीसदी के बीच भूजल निकासी दर्ज की गई है।
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दो साल में 5.8 बीसीएम पानी बचाया
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि हरियाणा में पानी बचाने की दिशा में बेहतरीन कदम उठाया जा रहा है। पिछले दो साल में हरियाणा में 5.8 बीसीएम पानी बचाया जा चुका है। अगले दो साल के लिए लक्ष्य भी तय कर लिया गया है, मगर दोहन रोकने के लिए तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
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शोधित पानी का इस्तेमाल बढ़ाया
पानी बचाने के लिए राज्य के सभी विभागों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम सामने है कि भूजल रिचार्ज में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जहां पानी का धड़ल्ले से दोहन किया जा रहा है, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ शोधित पानी के इस्तेमाल की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है। इससे लगता है कि आने वाले सालों में हमें कुछ और कामयाबी मिलने के आसार हैं।
केशनी आनंद अरोड़ा, चेयरपर्सन, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण
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ऐसे बढ़ा भूजल रिचार्ज
सिंचाई विभाग की ओर से 100 से ज्यादा स्टोरेज बनाए गए
चार लाख एकड़ में धान की सीधी बुवाई
शोधित पानी का 40 फीसदी तक किया जा रहा इस्तेमाल
शहरों व गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए
1597 तालाबों को पुनर्जीवित किया गया
भूजल रिचार्ज के लिए 1050 गड्ढे खोदे गए
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इन जिलों के 88 उपंडल में सर्वाधिक भूजल दोहन
अंबाला : अंबाला -1, बराड़ा, नारायणगढ़, साहा
भिवानी : बहल, कैरू, लोहारू, तोशाम
दादरी : बाढड़ा, लोहारू
फरीदाबाद : बल्लभगढ़, फरीदाबाद, फरीदाबाद शहर
फतेहाबाद : फतेहाबाद, रतिया, टोहाना, जाखल, नागपुर, भूना
गुरुग्राम : फर्रुखनगर, पटौदी, सोहाना, गुरुग्राम, गुरुग्राम शहर
हिसार : नारनौद
जींद : अलेवा, उचाना, उझाना, सफीदों, जींद
कैथल : सीवन, गुहला, कैथल, कलायत, पूंडरी, राजौंद, ढांड
कुरुक्षेत्र : इस्लाईमाबाद, बाबैन, लाडवा, पेहोवा, शाहाबाद, थानेसर, पिपली
महेंद्रगढ़ : कैनाना, महेंद्रगढ़, सीहमा, अटेली, नांगल, नारनौल, नांगल चौधरी
मेवात : तावड़ू
पलवल : बढौली, पृथला
पानीपत : बापौली, इसराना, मतलौडा, पानीपत, समालखा, सनौली खुर्द
रेवाड़ी : खोल, रेवाड़ी, नाहर, धारूखेड़ा, जाटूसाना, बावल
सिरसा : रानिया, सिरसा, नाथूसरी चौपटा, ओडां, डबवाली, एलनाबाद
सोनीपत : गनौर, सोनीपत, राई, मुरथल
यमुनानगर : जगाधरी, मुस्तफाबाद, बिलासपुर, साढौरा, रादौर
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88 उपमंडल रेड और 11 क्रिटिकल जोन में, 36 उपमंडल ही सुरक्षित जोन में हैं
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। भूजल रिचार्ज की स्थिति हरियाणा में सुधरने लगी है। 2023 के 8,69,053.15 हेक्टेयर मीटर की तुलना में 2024 में 9,35,857.56 हेक्टेयर मीटर पानी रिचार्ज किया गया, जो करीब 11 फीसदी अधिक है। यह हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (एचडब्ल्यूआरए) के लिए बड़ी उपलब्धि है।
मगर, चिंता की बात यह भी है कि राज्य में भूजल का दोहन बदस्तूर जारी है।
भूजल प्रकोष्ठ, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग व केंद्रीय भूजल बोर्ड की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जितना भूजल रिचार्ज किया गया, उससे कहीं ज्यादा भूजल निकाल दिया गया। राज्य में साल भर में 10.32 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) सालाना भूजल रिचार्ज हुआ। इस अवधि में 9.36 बीसीएम भूजल निकाला जाना चाहिए था, मगर पूरे साल में 12.72 बीसीएम पानी जमीन से निकाला गया। हरियाणा में कुल भूजल निकासी दर 135.7 फीसदी से बढ़कर 136 फीसदी हो गई है।
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राज्य की स्थिति ऐसी है कि 143 उपमंडल में से सिर्फ 36 ही सुरक्षित जोन में हैं। 88 उपमंडल रेड जोन में हैं। यानी इनमें 100 फीसदी से ज्यादा भूजल निकाला जा रहा है। 11 उपमंडल क्रिटिकल जोन में हैं। जहां 90 से 100 फीसदी भूजल निकाला जा रहा है। 8 ब्लॉक में 70 से 90 फीसदी के बीच भूजल निकासी दर्ज की गई है।
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दो साल में 5.8 बीसीएम पानी बचाया
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि हरियाणा में पानी बचाने की दिशा में बेहतरीन कदम उठाया जा रहा है। पिछले दो साल में हरियाणा में 5.8 बीसीएम पानी बचाया जा चुका है। अगले दो साल के लिए लक्ष्य भी तय कर लिया गया है, मगर दोहन रोकने के लिए तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
शोधित पानी का इस्तेमाल बढ़ाया
पानी बचाने के लिए राज्य के सभी विभागों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसका परिणाम सामने है कि भूजल रिचार्ज में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जहां पानी का धड़ल्ले से दोहन किया जा रहा है, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ शोधित पानी के इस्तेमाल की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है। इससे लगता है कि आने वाले सालों में हमें कुछ और कामयाबी मिलने के आसार हैं।
केशनी आनंद अरोड़ा, चेयरपर्सन, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण
ऐसे बढ़ा भूजल रिचार्ज
सिंचाई विभाग की ओर से 100 से ज्यादा स्टोरेज बनाए गए
चार लाख एकड़ में धान की सीधी बुवाई
शोधित पानी का 40 फीसदी तक किया जा रहा इस्तेमाल
शहरों व गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए
1597 तालाबों को पुनर्जीवित किया गया
भूजल रिचार्ज के लिए 1050 गड्ढे खोदे गए
इन जिलों के 88 उपंडल में सर्वाधिक भूजल दोहन
अंबाला : अंबाला -1, बराड़ा, नारायणगढ़, साहा
भिवानी : बहल, कैरू, लोहारू, तोशाम
दादरी : बाढड़ा, लोहारू
फरीदाबाद : बल्लभगढ़, फरीदाबाद, फरीदाबाद शहर
फतेहाबाद : फतेहाबाद, रतिया, टोहाना, जाखल, नागपुर, भूना
गुरुग्राम : फर्रुखनगर, पटौदी, सोहाना, गुरुग्राम, गुरुग्राम शहर
हिसार : नारनौद
जींद : अलेवा, उचाना, उझाना, सफीदों, जींद
कैथल : सीवन, गुहला, कैथल, कलायत, पूंडरी, राजौंद, ढांड
कुरुक्षेत्र : इस्लाईमाबाद, बाबैन, लाडवा, पेहोवा, शाहाबाद, थानेसर, पिपली
महेंद्रगढ़ : कैनाना, महेंद्रगढ़, सीहमा, अटेली, नांगल, नारनौल, नांगल चौधरी
मेवात : तावड़ू
पलवल : बढौली, पृथला
पानीपत : बापौली, इसराना, मतलौडा, पानीपत, समालखा, सनौली खुर्द
रेवाड़ी : खोल, रेवाड़ी, नाहर, धारूखेड़ा, जाटूसाना, बावल
सिरसा : रानिया, सिरसा, नाथूसरी चौपटा, ओडां, डबवाली, एलनाबाद
सोनीपत : गनौर, सोनीपत, राई, मुरथल
यमुनानगर : जगाधरी, मुस्तफाबाद, बिलासपुर, साढौरा, रादौर