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Haryana: ऑडिट रिपोर्ट का जवाब देने में सरकारी विभाग लापरवाह, 1653 सिफारिशों पर नहीं हुआ कोई काम
Wed, 11 Jun 2025 01:37 AM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
Updated Wed, 11 Jun 2025 01:37 AM IST
सार
वित्त विभाग ने कहा है कि निर्देशों का पालन न करने से न केवल पीएसी/सीओपीयू रिपोर्ट की सिफारिशों/पैराग्राफों का बोझ बढ़ रहा है बल्कि काम में भी बाधा आ रही है। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ रही है।
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नियंत्रक महालेखाकार
- फोटो : संवाद
विस्तार
सरकारी योजनाओं व खर्च की समीक्षा करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी), लोक लेखा समिति (पीएसी) और सार्वजनिक उपक्रम समिति (सीओपीयू) की ओर से सौंपी जाने वाली ऑडिट रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने और उनका जवाब देने में देरी बरती जा रही है।
हरियाणा विधानसभा की समितियों ने इस बारे में सवाल उठाया और सरकार को इस संबंध में पत्र भेज गंभीर चिंता भी जताई है। लोक लेखा समिति की 91वीं रिपोर्ट के मुताबिक 1,653 सिफारिशें अभी लंबित हैं। इन पर कोई काम नहीं हुआ है।
वहीं, 71वीं सीओपीयू रिपोर्ट के मुताबिक 265 सिफारिशों पर अभी कोई काम नहीं हुआ है। अब वित्त विभाग ने सभी विभाग के प्रमुखों को बिना किसी देरी के ऑडिट पैराग्राफ का जवाब दें और इसका जल्द से जल्द निपटारा करें।
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वित्त विभाग ने यह भी कहा है कि निर्देशों का पालन न करने से न केवल पीएसी/सीओपीयू रिपोर्ट की सिफारिशों/पैराग्राफों का बोझ बढ़ रहा है बल्कि काम में भी बाधा आ रही है। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ रही है। विभाग ने यह भी सवाल उठाया है कि जो जवाब भेजे भी जा रहे हैं, उनमें कईयों में तथ्यात्मक रूप से गलत जवाब हैं।
उल्लेखनीय है कि सीएजी, पीएसी व सीओपीयू की जिम्मेदारी है कि वह सरकारी व्यय की जांच करती है कि धन का इस्तेमाल कानूनी व वित्तीय मानदंडो के अनुसार किया जा रहा है या नहीं। खामियां मिलने पर समितियां सरकार की खामियों को उजागर करते हुए सिफारिशें भी देती हैं, ताकि भविष्य में सरकारी धन का गलत इस्तेमाल न किया जा सके।
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हरियाणा विधानसभा की समितियों ने इस बारे में सवाल उठाया और सरकार को इस संबंध में पत्र भेज गंभीर चिंता भी जताई है। लोक लेखा समिति की 91वीं रिपोर्ट के मुताबिक 1,653 सिफारिशें अभी लंबित हैं। इन पर कोई काम नहीं हुआ है।
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वहीं, 71वीं सीओपीयू रिपोर्ट के मुताबिक 265 सिफारिशों पर अभी कोई काम नहीं हुआ है। अब वित्त विभाग ने सभी विभाग के प्रमुखों को बिना किसी देरी के ऑडिट पैराग्राफ का जवाब दें और इसका जल्द से जल्द निपटारा करें।
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वित्त विभाग ने यह भी कहा है कि निर्देशों का पालन न करने से न केवल पीएसी/सीओपीयू रिपोर्ट की सिफारिशों/पैराग्राफों का बोझ बढ़ रहा है बल्कि काम में भी बाधा आ रही है। इससे सरकार को अनावश्यक रूप से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ रही है। विभाग ने यह भी सवाल उठाया है कि जो जवाब भेजे भी जा रहे हैं, उनमें कईयों में तथ्यात्मक रूप से गलत जवाब हैं।
उल्लेखनीय है कि सीएजी, पीएसी व सीओपीयू की जिम्मेदारी है कि वह सरकारी व्यय की जांच करती है कि धन का इस्तेमाल कानूनी व वित्तीय मानदंडो के अनुसार किया जा रहा है या नहीं। खामियां मिलने पर समितियां सरकार की खामियों को उजागर करते हुए सिफारिशें भी देती हैं, ताकि भविष्य में सरकारी धन का गलत इस्तेमाल न किया जा सके।